Submit your post

Follow Us

क्या सांसद रहते सदन में बच्चों की ख़ातिर रोये थे योगी आदित्यनाथ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 मई को वाराणसी के डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और फ्रंटलाइन वर्कर्स से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये बात कर रहे थे. PM ने पहले तो कोविड काल में इन सभी की जी-तोड़ मेहनत के लिए तारीफ़ की, फिर एक पुराने वाकये का ज़िक्र किया. बोले –

“ज़मीन पर किया गया काम हमेशा नज़र आता है. मुझे याद है पूर्वांचल में पहले किस तरह बच्चों में दिमागी बुखार वाली बीमारी का कहर था. इससे हर वर्ष हज़ारों बच्चों की दुखद मृत्यु हो जाती थी. आपको याद होगा आज जो हमारे मुख्यमंत्री हैं, योगी जी, वे जब पहले सांसद थे तो पार्लियामेंट में इन बच्चों की ज़िंदगी के लिए, जिस तरह से इनकी मृत्यु हो रही थी, उससे वे फूट-फूटकर पार्लियामेंट में रोये थे. उस समय की सरकारों से वे याचना करते थे कि इन बच्चों को बचाइए, कुछ व्यवस्था करिए. वे रो पड़ते थे.”

प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत का पूरा वीडियो आप यहां देख सकते हैं. इसमें योगी आदित्यनाथ से जुड़ी बात 18वें मिनट से है.

अब जब PM मोदी ने कहा तो कुछ सोच-समझकर ही कहा होगा. ये सोचकर हमने सोचा कि हम भी देखें कि योगी आदित्यनाथ सांसद रहते हुए संसद में कब रोये. हमारी तलाश जाकर रुकी 12 मार्च 2007 पर. जब गोरखपुर से तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ संसद में फूट-फूटकर रोये थे. लेकिन क्यों रोये थे? क्या दिमागी बुखार से मर रहे बच्चों की ख़ातिर रोये थे? इसका जवाब UP का CM बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने ही लल्लनटॉप के सरपंच सौरभ द्विवेदी के सामने दिया था. वे बोले थे –

“गोरखपुर में एक व्यापारी की हत्या हो गई थी. निर्दोष व्यापारी की हत्या. हत्या के बाद जो उपद्रवी थे, उनको सत्ता का संरक्षण प्राप्त होना. और सत्ता का संरक्षण प्राप्त होने के साथ-साथ एक सत्ता द्वारा प्रायोजित उपद्रव किस तरीके से निर्दोष लोगों को जेल में ठूंसने का काम करता था, इसका मैं स्वयं भुक्तभोगी हूं. 11 दिन तक मैं जेल में रहा. मुझे 27 जनवरी को जेल में डाला जाता है. संसद को सूचना दी जाती है कि मेरे ख़िलाफ 107/16 में FIR की जा रही है. 31 जनवरी को मेरे ख़िलाफ बैक डेट पर फिर से FIR दर्ज की जाती है. 10 हज़ार से ज़्यादा निर्दोष नागरिकों को जेल के अंदर डाला गया था. ”

इसके बाद योगी कहते हैं कि उस समय जो भी उपद्रव हुआ, उसके समय तो वे वहां मौजूद भी नहीं थे. बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा था –

“मैंने यही प्रशासन से कहा, यही संसद से कहा कि मैं देखकर ताज्जुब हूं कि जब मुझे न्याय नहीं मिल सकता तो देश के उन लोगों पर क्या बीत रही होगी जो इस आशा में हैं कि कोई सांसद या विधायक उनको न्याय दिला पाएगा.”

योगी आदित्यनाथ की पूरी बात आप यहां सुन सकते हैं.

दरअसल 2007 में जब उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी और योगी आदित्यनाथ तब गोरखपुर से सांसद हुआ करते थे, तो उन्हें 11 दिन के लिए जेल में भेजा गया था. इसी बात का ज़िक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ संसद में रो पड़े थे. रोते हुए उन्होंने कहा था –

“मैं तीसरी बार गोरखपुर से लोकसभा का सदस्य बना हूं. पहली बार मैं 25 हज़ार वोटों से जीता, दूसरी बार 50 हज़ार से और तीसरी बार मैं लगभग डेढ़ लाख मतों से चुनकर आया हूं. लेकिन पिछले कुछ समय से महोदय मुझे जिस तरह से राजनीतिक विद्वेष, राजनीतिक पूर्वाग्रह का शिकार बनाया जा रहा है, मैं आपसे केवल यह अनुरोध करने आया हूं कि क्या मैं इस सदन का सदस्य हूं या नहीं हूं? और क्या ये सदन मुझे संरक्षण दे पाएगा या नहीं दे पाएगा? अगर ये सदन मुझे संरक्षण नहीं दे सकता है तो मैं आज ही सदन को छोड़कर वापस जाना चाहता हूं. मेरे लिए कोई महत्व नहीं रखता. मैंने अपने जीवन से संन्यास लिया है अपने समाज के लिए. मैंने अपने परिवार को छोड़ा है. मैंने अपने मां-बाप को छोड़ा है. लेकिन आज मुझे अपराधी बनाया जा रहा है. केवल राजनीतिक पूर्वाग्रह के तहत. सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने वहां भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए थे. क्योंकि मैंने भारत-नेपाल सीमा पर ISI और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर आवाज उठाई थी.”

इस दौरान बच्चों की मौत या दिमागी बुखार का ज़िक्र नहीं था. रोने से याद आया, वाराणसी के फ्रंटलाइन वर्कर्स से हुई इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी भी एक मौके पर भावुक हो गए. वे इससे पहले भी कई बार भावुक हो चुके हैं. नीचे लगा वीडियो देखिए और जानिए कब-कब.


राकेश टिकैत तो अब रोए, पर पीएम मोदी 2014 में किस बात पर रोए थे?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

बाबा रामदेव ने ऐलोपैथी पर क्या कह दिया कि IMA ने केस दर्ज करने की मांग की है

पूछा है कि हेल्थ मिनिस्ट्री की साख पर सवाल उठाना क्या एंटीनेशनल नहीं है?

संबित सहित तमाम BJP नेताओं के ट्वीट को भ्रामक बताने पर केंद्र ने ट्विटर को तगड़ी डोज़ दे दी

क्या होता है मैनिपुलेटेड मीडिया टैग?

बंगाल: नंदीग्राम से चुनाव हार चुकीं ममता बनर्जी अब इस सीट से लड़ेंगी!

सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने अपनी सीट छोड़ी.

चिपको आंदोलन के मशहूर पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना से निधन

94 वर्षीय सुंदरलाल बहुगुणा कोरोना संक्रमण के कारण 8 मई से एम्स ऋषिकेश में भर्ती थे.

विदेश जाने वाले भारतीय लोग क्यों Covishield की वैक्सीन लगवाना चाहते हैं?

विदेशों में काम करने और पढ़ने के लिए जाने वालों की टेंशन समझिए?

अजय, सलमान, अमिताभ बच्चन जैसे सितारों के घर, दफ्तर, सेट आए ताउ’ते की चपेट में

अजय देवगन के 'मैदान' का सेट एकदम तहस-नहस हो गया.

यूपीः पंचायत चुनाव ड्यूटी में लगे शिक्षकों की मौत- हकीकत और सरकारी दावे की पड़ताल

शिक्षकों की मौत के आंकड़े क्या बता रहे हैं?

अगर कोरोना हुआ है तो ठीक होने के 3 महीने बाद ही लगवा सकेंगे वैक्सीन

जानिए वैक्सीनेशन से जुड़े अहम सवालों के जवाब.

पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के जिस कोरोना मॉडल की तारीफ़ की उसकी सच्चाई क्या है?

डेटा के साथ खिलवाड़ कर रही शिवराज सरकार?

UP: चुनावी ड्यूटी में लगे 1621 टीचरों की मौत का दावा, लेकिन सरकार 3 मौतें ही मान रही

जानिए सरकारी आंकड़े पर शिक्षक संगठन ने क्या जवाब दिया है.