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मोदी के इस काम को बॉलीवुड कर रहा है सपोर्ट

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15 अगस्त के दिन लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने अपील की, कि देश के नागरिक ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ का इस्तेमाल करना बंद कर दें, और इसे ख़त्म करने के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास करें. प्रधानमंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक खत्म करने के अभियान को 2 अक्टूबर से एक आन्दोलन में तब्दील करने की भी अपील की. इसका असर अभी से दिखाई देने लगा है. प्रधानमंत्री के इस अभियान को बॉलीवुड से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, आमिर खान, करण जौहर और आयुष्मान खुराना जैसे बॉलीवुड स्टार्स ने पीएम के इस प्रयास की तारीफ़ करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है. सबसे पहले आमिर खान ने एक ट्वीट कर इस अभियान को सपोर्ट किया. आमिर ने लिखा-

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ को खत्म करने का प्रयास, ऐसी कोशिश है जिसे हम सबको मजबूती के साथ सपोर्ट करना चाहिए. ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ का उपयोग करना बंद कर दें.

आमिर के इस सपोर्ट के प्रति, आभार जताने के लिए प्रधानमंत्री ने भी सक्रियता दिखाई, उन्होंने आमिर का शुक्रिया अदा करते हुए, एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है-

‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ खत्म करने के मूवमेंट में अपना महत्वपूर्ण सपोर्ट देने के लिए शुक्रिया आमिर खान. आपके उत्साह बढ़ाने वाले ये शब्द, इस मूवमेंट को और अधिक मजबूत करने के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरणा देंगे.

प्रधानमंत्री के इस ट्वीट के एक घंटे बाद ही आयुष्मान खुराना  का भी ट्वीट आ गया. आयुष्मान खुराना ने लिखा-

‘जलवायु परिवर्तन हो रहा है और हम सबको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्यावरण बचाने के लिए हम थोड़ी सी कोशिश करें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को शुक्रिया जो उन्होंने ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ को खत्म करने के लिए, लोगों से आग्रह किया’

  Climate change is real and all of us should ensure we do our bit to protect the environment. Thank you Prime Minister @narendramodi ji on urging people to eliminate ‘single-use plastic’. — Ayushmann Khurrana (@ayushmannk) August 28, 2019

बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना फोटो.
बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना फोटो.

आयुष्मान खुराना के ट्वीट के एक घंटे के अंदर ही करन जौहर का भी ट्वीट आ गया. उन्होंने लिखा है-

‘हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ के इस्तेमाल को खत्म करने की पहल, बेहद अच्छा प्रयास है। केवल इस महान देश के नागरिक होने के नाते ही नहीं, बल्कि दुनिया के एक नागरिक होने के नाते हमें इस पहल का समर्थन करना चाहिए. हमारा पर्यावरण ही हमें परिभाषित करता है.’

 

 क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भी प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण का जिक्र किया था. उन्होंने कहा कि इस बार 2 अक्टूबर को जब बापू की 150वीं जयंती मनाई जा रही होगी. तब वह इस मौके पर प्लास्टिक के खिलाफ एक नए जन-आंदोलन की शुरुआत करेंगे. अब सवाल आता है कि सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है?

भारत को 'केवल एक बार इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक' से मुक्त करने के लिए, किए जाने वाले जन आन्दोलन के लिए गांधी जयंती को चुना गया है.
‘केवल एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक’ से भारत को मुक्त करने के लिए गांधी जयंती को चुना गया है.

वैसे तो भारत में ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ की कोई तय परिभाषा नहीं है, लेकिन मोटा-माटी इसकी परिभाषा यह है- प्लास्टिक की बनी ऐसी चीजें, जिनका हम सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल कर सकते हैं या एक बार इस्तेमाल करने के बाद ही फेंक देते हैं और जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, वह ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ कहलाती है.

प्लास्टिक की समस्या कितनी बड़ी है?

प्लास्टिक की समस्या केवल भारत की नहीं है बल्कि ये एक ग्लोबल प्रॉब्लम है. मानचित्रों से बढ़कर ये समस्या सभी देशों के लिए नुकसान पहुंचा रही है. चूंकि मनुष्यों द्वारा यूज किया गया प्लास्टिक, अंततः समुंद्र में ही पहुंचता है और समुंद्र दुनिया के कई हिस्सों की अर्थव्यवस्था को चलाता है. यूं करके समुंद्रों में एक सीमा से अधिक प्लास्टिक पहुंचने पर पूरी दुनिया को नुकसान होना तय है. प्लास्टिक फ्री चैलेंज की एक रिपोर्ट की मानें तो, दुनियाभर में हर साल करीब 30 करोड़ टन प्लास्टिक प्रोड्यूस होता है. इसमें से सिर्फ आधा ही डिस्पोजेबल होता है, दुनियाभर में सिर्फ 10-13 प्रतिशत प्लास्टिक ही रिसाइकल हो पा रहा है.

प्लास्टिक की समस्या अब केवल किसी ख़ास देश तक सिमित न रहकर, ग्लोबल प्रॉब्लम बन चुकी है.
प्लास्टिक की समस्या, अब केवल किसी ख़ास देश तक सीमित न रहकर, ग्लोबल प्रॉब्लम बन चुकी है.

भारत की स्थिति जानने के लिए, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा किए गए एक सर्वे पर नजर मार सकते हैं. इस सर्वे के अनुसार शहरों से रोजाना 4 हजार 59 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है. इस आधार पर अनुमान लगाया गया था कि देशभर से रोजाना 25 हजार 940 टन प्लास्टिक कचरा निकल रहा है. इसमें से सिर्फ 60% कचरा ही एकत्रित या रिसाइकल हो पा रहा है. बाकी कचरा नदी-नालों के जरिए समुद्र में चला जाता है या फिर उसे जानवर खा लेते हैं. एक अनुमान ऐसा भी लगाया जा रहा है कि अगर प्लास्टिक को समुंद्र में पहुंचने से नहीं रोका गया, तो 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा.


ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे श्याम ने की है.


प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से पहले उसके नीचे लिखा नंबर देख लीजिए

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