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मोदी को क्लीन चिट न देने वाले चुनाव अधिकारी को फंसाने का तरीका खोज रही सरकार!

अशोक लवासा. पूर्व प्रशासनिक अधिकारी. और चुनाव आयुक्त. कहा जा रहा है कि मोदी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की सज़ा मिल रही है. क्या सजा? सरकार ने पब्लिक सेक्टर इकाइयों को पत्र लिखकर कहा है कि वे इस बात की जांच करें कि अशोक लवासा ने अपनी साख का इस्तेमाल तो कहीं किसी फैसले में तो नहीं किया है.

इस बारे में अंग्रेजी अखबार इन्डियन एक्सप्रेस ने खबर छापी है. 29 अगस्त को एक गोपनीय पत्र जारी किया गया था. इस पत्र पर ऊर्जा सचिव की सहमति थी. सभी सरकारी कंपनियों के केन्द्रीय सतर्कता अधिकारियों को ये चिट्ठी भेजी गयी है.

अशोक लवासा साल 2009 से 2013 तक ऊर्जा मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी, एडिशनल सेक्रेटरी और स्पेशल सेक्रेटरी के पदों पर कार्यरत थे. पत्र में इस कार्यकाल का हवाला देते हुए लिखा गया है कि अशोक लवासा पर ये आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने बतौर IAS अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान अपने पद का इस्तेमाल कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया है.

इलेक्शन कमिश्नर अशोक लवासा
इलेक्शन कमिश्नर अशोक लवासा

इस पत्र में ऊर्जा मंत्रालय ने 14 कंपनियों की सूची भी भेजी है, जो बिजली उत्पादन और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र से जुड़ी हैं. इन सभी कंपनियों में अशोक लवासा की पत्नी नोवेल लवासा बतौर निदेशक कार्यरत रह चुकी हैं.

14 कंपनियों के अलावा 135 प्रोजेक्टों की सूची भी सौंपी गयी है, जो राज्य सरकारों और सरकारी कंपनियों द्वारा A2Z ग्रुप की कंपनियों को दिए गए थे, इनके साथ नावेल लवासा को मिले 45.8 लाख रुपयों की पेमेंट भी शामिल है. अशोक लवासा के इसी कार्यकाल के दौरान अन्य 13 बड़े प्रोजेक्टों की सूची भी सरकारी कंपनियों को दी गयी है, जो भिन्न-भिन्न राज्य सरकारों द्वारा A2Z वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड को दिए गए.

पत्र में लिखा गया है कि सभी सतर्कता अधिकारी “किसी भी सबूत के लिए” अपने सभी अभिलेखों की जांच करें, जिनसे ये पता चल सके कि क्या अशोक लवासा ने अपने पद और ताकत का इस्तेमाल क्या इन कंपनियों या सहयोगी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया?

इन कंपनियों में NTPC (नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन), NHPC (नेशनल हाइड्रो पॉवर कारपोरेशन), REC (रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन) और PFC (पॉवर फाइनेंस कारपोरेशन) का नाम शामिल है.

क्यों लवासा के खिलाफ जांच पर सवाल उठ रहे हैं?

लोकसभा चुनाव 2019. मई का महीना. देश के कई हिस्सों में चुनाव प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी की जनसभाएं थीं. नरेंद्र मोदी पर आरोप लगे कि उन्होंने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया. इसके खिलाफ़ चुनाव आयोग में शिकायत की गयी. कुल चार शिकायतें. आरोप थे कि नरेंद्र मोदी ने लातूर और चित्रदुर्गा में दिए गए भाषण में पहली बार वोट दे रहे लोगों को बालाकोट हमले के नाम पर बरगलाने की कोशिश की थी, वहीं वर्धा और नांदेड़ में नरेंद्र मोदी ने बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक संबंधी भाषण दिया था.

इन शिकायतों की जांच के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और अशोक लवासा की टीम बैठी थी. इन सभी शिकायतों में अशोक लवासा ने असहमति जतायी थी, जबकि सुनील अरोड़ा और सुशील चंद्रा ने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी. मतलब 2-1 की बढ़त से पाया गया कि नरेंद्र मोदी ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया था. यही नहीं, खबरें ये भी बताती हैं कि आयोग की क्लीन चिट में लवासा की आपत्ति का भी कोई ज़िक्र नहीं किया गया.

इसके बाद अशोक लवासा ने आयोग की आदर्श आचार संहिता की मीटिंगों में शामिल होने से इंकार कर दिया. 1 नवंबर को जब चुनाव आयोग ने झारखण्ड चुनावों की घोषणा की थी, तो मीटिंग में अशोक लवासा मौजूद नहीं थे.

Ashok Lavasa And Novel Lavasa
अशोक लवासा और उनकी पत्नी नोवेल लवासा

इसी साल सितम्बर के महीने में इनकम टैक्स विभाग ने अशोक लवासा की पत्नी नोवेल लवासा को उनके इनकम टैक्स रिटर्न में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस जारी किया था. कुछ ही दिनों बाद अशोक लवासा के बेटे अबीर लवासा और उनकी बहन शकुन्तला लवासा भी आयकर विभाग के घेरे में आए. बच्चों की डॉक्टर शकुन्तला लवासा को आयकर विभाग ने नोटिस भेजा. शकुन्तला लवासा ने गुड़गांव में एक अपार्टमेन्ट खरीदा था, इसी अपार्टमेन्ट पर आयकर विभाग ने नोटिस भेजा है. रुपाली बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बनायी गयी चार मंजिला इमारत में शकुन्तला लवासा ने घर खरीदा, जिसमें पहले से अशोक लवासा और नोवेल लवासा के अपार्टमेन्ट मौजूद थे. नौरिश आर्गेनिक फ़ूड लिमिटेड में 10 हज़ार शेयर रखने वाले अबीर लवासा और नॉरिश आर्गेनिक फ़ूड लिमिटेड की जांच की जा रही है.

हालांकि अशोक लवासा या उनके परिवार ने पूरे मसले पर कुछ भी कहने से इंकार किया है. इन्डियन एक्सप्रेस से बातचीत में अशोक लवासा ने कहा है,

“मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं और मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता है.”


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