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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मुशायरा रद्द, CAA प्रोटेस्ट में शामिल शायरों को बुलाया गया था

इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शुक्रवार, 13 अगस्त को आयोजित मुशायरे को अचानक रद्द कर दिया गया. मंच सजने और मेहमानों के आने के बाद मुशायरे का कार्यक्रम रद्द किए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. इस मुशायरे में शाहीन बाग में नागरिकता कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए शायरों को बुलाया गया था. कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर मामले के उछलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस कार्यक्रम को रद्द करने का फैसला किया.

क्या है मामला?

आज तक के पंकज श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, आजादी की सालगिरह के अमृत महोत्सव के तहत इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शुक्रवार 13 अगस्त की शाम मुशायरे का कार्यक्रम रखा गया था. इस मुशायरे में शबीना अदीब और हाशिम फिरोजाबादी को बुलाया गया था. शबीना अदीब और हाशिम फिरोजाबादी पिछले साल शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे. दोनों शायरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के अन्य लोगों के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी. ऐसे में इन दोनों शायरों को बुलाए जाने का विरोध सोशल मीडिया पर हो रहा था.

इन शायरों के शामिल होने की वजह से मुख्य अतिथि प्रयागराज के कमिश्नर संजय गोयल ने भी कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया था. सेंट्रल यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करने से मना कर दिया था. ऐसे में औपचारिक शुरुआत से पहले सैकड़ों की भीड़ के बीच अचानक कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया.

इन्हें बुलाया गया था

इस कार्यक्रम में जिन शायरों के नाम पर विवाद हुआ है उनके साथ ही ताहिर फराज, भूषण त्यागी, इकबाल अशर, पॉपुलर मेरठी, भालचंद्र त्रिपाठी, कलीम कैसर और मोइन शादाब को भी बुलाया गया था. कार्यक्रम रद्द करने का ऐलान होते वक़्त तमाम शायर व दूसरे मेहमानों के साथ ही बड़ी संख्या में श्रोता भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए थे.

कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के सीनेट हॉल में होना था और इसे इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी का उर्दू डिपार्टमेंट, उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी और यूनिवर्सिटी की केंद्रीय सांस्कृतिक समिति ने साझा तौर पर आयोजित कर रहा था.

यूनिवर्सिटी प्रशासन का क्या कहना है?

इस मामले में इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की ओर सफाई पेश की गई है. यूनिवर्सिटी की PRO डॉ जया कपूर ने पूरे मामले में कहा है कि कुछ मेहमानों का अप्रूवल न मिलने के चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा है. कुछ जगहों पर ऐसा चल रहा है कि राज्य या फिर केन्द्र सरकार के हस्तक्षेप से कार्यक्रम रद्द किया गया है. ये पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है. कार्यक्रम रद्द किए जाने को लेकर किसी तरह की अफवाह फैलाना सही नहीं है.


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