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पूर्व SSP ने तब चौबेपुर के एसओ पर एक्शन नहीं लिया था, अब वही STF DIG हैं

कानपुर के विकास दुबे केस में अगर अब तक किसी की भूमिका सबसे ज़्यादा संदिग्ध नज़र आ रही है, तो वो हैं – चौबेपुर के एसओ विनय तिवारी. ड्यूटी अच्छे से ना निभाने का आरोप और मुख़बिरी का शक उन पर पहले से है. अब ये भी ख़बर है कि विनय तिवारी के संरक्षण में ही चौबेपुर में तमाम ग़लत काम चल रहे थे.

अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक पांच महीने पहले चौबेपुर के जरारी गांव में तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र ने लाखों रुपए का जुआ पकड़ा था. ये जुआ थानेदार विनय तिवारी के संरक्षण में चल रहा था और उन्हें इसके बदले में पैसा भी पहुंच रहा था. इसकी पूरी रिपोर्ट देवेंद्र मिश्रा ने तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को भी भेजी थी. लेकिन तब एसएसपी की तरफ से इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया.

इसके बाद से ही सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा और चौबेपुर एसओ विनय तिवारी की अन-बन शुरू हो गई थी.

एसएसपी का नए रोल में कमबैक

इसे एक तरह से तत्कालीन एसएसपी अनंत देव की लापरवाही भी माना जा रहा है कि शुरुआती शिकायतें आने पर ही विनय तिवारी पर कार्रवाई क्यों नही की गई. हालांकि अब अनंत देव का इस पूरी पिक्चर में कमबैक हो गया है, वो भी नए रोल में.

अनंत देव अब कानपुर कांड की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के DIG हैं. और इस पूरी जांच के केंद्र में एक बार फिर हैं चौबेपुर एसओ विनय तिवारी.

100 से ज़्यादा जगहों पर सर्च ऑपरेशन

वहीं यूपी पुलिस अब तक 100 से ज़्यादा जगहों पर अपराधी विकास दुबे की ढुंढाई कर चुकी है. उसे पकड़ने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान की पुलिस से भी मदद मांगी गई है. विकास के 50 से ज़्यादा करीबियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.


चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी ने आरोपी विकास दुबे को मुख़बिरी की थी!

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