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कोरोना मरीज ने अस्पताल से मां को मेसेज किए- 3 दिन से ऑक्सीजन नहीं मिली, मुझे बचा लो

“3 दिन से बिना ऑक्सीजन के जान निकली जा रही है… यहां न कोई पानी दे रहा है और न ही डॉक्टर है… मुझे बचा लो… यहां से ले जाओ… मैं मर जाऊंगा.”

ये बातें नवांशहर पंजाब के 23 साल के गुरसेवक ने 16 मई को अपनी मां कमलजीत कौर को वॉट्सऐप पर मेसेज करके कही थीं. 17 मई की सुबह 4 बजे कोरोना (corona) पीड़ित गुरसेवक ने दम तोड़ दिया. ये घटना जालंधर (Jalandhar) के पंजाब इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (PIMS) की है. मौत से पहले बेटे के दर्द भरे और अस्पताल की अव्यवस्था को उघाड़ते मेसेज मिलने के बाद अब मां कमलजीत कौर अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रही हैं. उन्होंने डॉक्टर पर थप्पड़ मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए हैं. अस्पताल ने आरोपों को गलत बताया है.

‘बात मान लेते तो शायद जिंदा होता’

गुरदीप को कुछ दिन पहले ही कोरोना के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पंजाब के नवांशहर जिले के रहने वाले गुरसेवक की मां कमलजीत कौर ने दैनिक भास्कर अखबार को बताया-

“गुरसेवक को हम 13 मई को पंजाब इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, जालंधर लेकर आए. उन्होंने भर्ती करने में ही एक घंटा लगा दिया. कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे चौथी मंजिल पर कोरोना वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. उसी दिन से गुरसेवक फोन पर बताता रहा कि यहां कोई उसकी खैर खबर लेने वाला नहीं है. डॉक्टर और स्टाफ उसके करीब नहीं आते. अगर हम गुरसेवक की बात मान लेते तो शायद वह आज जिंदा होता.”

कमलजीत ने अस्पताल के डॉक्टर पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा-

“बेटे के मेसेज मिलने के बाद मैं डॉ. कुलबीर शर्मा के पास गई. बेटे को ऑक्सीजन न मिलने की बात बताई. इस पर डॉक्टर बोले- अगर ऑक्सीजन आंदी होई ता मैं तेरे थप्पड़ मारना’ (अगर ऑक्सीजन आ रही होगी तो मैं तुम्हारे थप्पड़ मार दूंगा). मैं बोली मार लेना लेकिन एक बार चेक तो कर लो. फिर 2 से 3 बार फोन करने के बाद डॉक्टर ने वीडियो कॉल करके बेटे का चेहरा दिखाया, और बोले- यह देख मास्क लगा है.”

डॉक्टर कुलबीर इन आरोपों को गलत बता रहे हैं.

Pims
गुरसेवक की मां ने पंजाब इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पर अपने बेटे के इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं.

आखिरी मेसेज में लिखा- आज मेरी लाश ले जाना

कमलजीत कौर ने बेटे गुरसेवक के मेसेज दिखाते अखबार को बताया कि बेटे ने उसे 16 मई को दोपहर 3:19 बजे मेसेज भेजे थे. इसमें लिखा था-

“एक बार मुझे यहां से ले जाओ. मुझे किसी पर विश्वास नहीं हो रहा है. कुछ करो जल्दी. मैं मर जाऊंगा. यहां कुछ नहीं, बस पैसे देते रहो. तीन दिन से बिना ऑक्सीजन के जान निकली जा रही है… फिर भी आप लोग डॉक्टर के पास जा रहे हैं. मुझे मौत देते, आप लोगों को शर्म आनी चाहिए. मुझे मरने के लिए छोड़ने के लिए.”

गुरसेवक ने दोपहर 3:40 बजे भेजे आखिरी मेसेज में लिखा- आज याद से मेरी लाश ले जाना.

‘लाश देने में लगा दिए 10 घंटे’

परिवार का आरोप है कि गुरसेवक की मौत के बाद भी अस्पताल का जुल्म खत्म नहीं हुआ. गुरसेवक के भाई गुरदीप सिंह ने बताया कि भाई की 17 मई सुबह 4 बजे मौत हो गई, लेकिन शव शाम 4 बजे के करीब दिया गया. अस्पताल ने कभी उसे सिविल अस्पताल भेजा, तो कभी कहीं और. हमें किसी भी तरह की मदद नहीं मिली. जब शाम को 4 बजे शव मिला तो मैंने खुद जाकर पीपीई किट खरीदी.

अस्पताल ने सारे आरोप नकारे

पंजाब इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकस साइंस ने गुरदीप और उनकी मां कमलजीत कौर के लगाए आरोपों को सिरे से खारिज किया है. अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी अमित सिंह ने द ट्रिब्यून अखबार को बताया-

“गुरसेवक को अस्पताल में 13 मई को भर्ती किया गया था. उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल उस वक्त सिर्फ 45 था. इस वजह से उसे लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया. शरीर में गिरते ऑक्सीजन लेवल की वजह से उसमें पेरिफेरल हाइपॉक्सिया की हालत बन गई. इसके चलते वह उल्टे सीधे मेसेज कर कह रहा था. उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कह रहा है.”

जालंधर के पंजाब इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंस (पिम्स अस्पताल) में हुई इस घटना से मृतक की मां कमलजीत कौर आहत और गुस्से में हैं. उनका कहना है कि उन्हें अपने बेटे की मौत का इंसाफ चाहिए. उन्होंने पुलिस में केस दर्ज कराने की बात कही है. गुरसेवक के भाई का कहना है कि इलाज में करीब 90 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन अस्पताल की लापरवाही की वजह से उनके भाई को बचाया नहीं जा सका.


वीडियो – उत्तर प्रदेश में झकझोर देने वाली घटना, 24 साल के दो जुड़वां भाइयों की कोरोना से जान गई

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