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मारकाट-बवाल चलते रहें, Facebook को बस पैसा चाहिए, कंपनी की कर्मचारी ने क्या-क्या पोल खोल दी?

फेसबुक फिर गलत कारणों से चर्चा में है. कंपनी की एक पूर्व कर्मचारी व्हिसलब्लोअर बनकर सामने आई है. बताया कि फेसबुक की नीतियां इसके यूज़र्स के हितों और सुरक्षा को नजरअंदाज़ करती हैं. इस व्हिसलब्लोअर का दावा है कि इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये सामाजिक बंटवारे को बढ़ावा मिलता है, बच्चों पर बुरा असर पड़ता है और बतौर कंपनी फेसबुक इसे अनदेखा करती है.

क्या हैं दावे?

व्हिसलब्लोअर बनकर सामने आई इस कर्मचारी का नाम है फ़्रांसिस हॉगेन. उन्होंने रविवार को अमेरिकी न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि फ़ेसबुक अपने और यूज़र के हितों में हमेशा अपने हित को प्राथमिकता देती है.

इंटरव्यू में फ्रांसिस हॉगेन ने बताया कि फ़ेसबुक ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद अपने कई सेफ़्टी फ़ीचर्स हटा दिए जो सीधे तौर पर इसके यूजर्स की सुरक्षा से समझौता है. फ्रांसिस के हिसाब से ये फ़ैसला ‘लोकतंत्र से धोखा’ है.

इंटरव्यू में हॉगेन ने कहा,

“फ़ेसबुक का अपना शोध दिखाता है कि जो कंटेंट नफरत पैदा करने वाला है, विभाजनकारी है, ध्रुवीकरण कर सकता है, लोगों को भड़का सकता है, उसे बेचना आसान है. फ़ेसबुक को समझ आ गया है कि अगर वो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एल्गोरिदम बदलता है तो लोग साइट पर कम समय बिताएंगे. वे कम विज्ञापनों पर क्लिक करेंगे, जिससे कंपनी कम पैसा कमाएगी. इसीलिए फ़ेसबुक ने यूज़र्स की सुरक्षा और अपने मुनाफ़े के बीच मुनाफ़े को चुना.”

हॉगेन ने फेसबुक पर एक और गंभीर आरोप लगाया. कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद इसी साल जनवरी में वॉशिंगटन में हुए कैपिटल दंगों में फेसबुक का भी हाथ था. कंपनी के शोध के हवाले से फ़्रांसिस ने बताया,

“इंस्टाग्राम युवा महिलाओं में बेचैनी और डिप्रेशन बढ़ाता है. ये कई तरीक़े के ईटिंग डिसऑर्डर्स भी पैदा करता है. बेचैनी से ध्यान हटाने के लिए लोग इंस्टाग्राम पर ज़्यादा समय बिताते हैं. ये एक तरीक़े का दुष्चक्र है.”

फ़्रांसिस हॉगेन फ़ेसबुक की सिविल इंटीग्रिटी यूनिट में प्रोडक्ट मैनेजर थीं.
फ़्रांसिस हॉगेन फ़ेसबुक की सिविल इंटीग्रिटी यूनिट में प्रोडक्ट मैनेजर थीं.

हॉगेन का कहना है कि फ़ेसबुक ने अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ग़लत सूचना को दूर करने का प्रयास करने वाली सिविल इंटेग्रिटी यूनिट को बंद कर दिया. हॉगेन इस यूनिट में प्रोडक्ट मैनेजर थीं. उनके मुताबिक, फेसबुक की नीतियों से हताश होने के बाद उन्होंने इस साल की शुरुआत में कंपनी छोड़ दी और अब वो इस बारे में सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख रही हैं. मंगलवार को सीनेट फाइनेंस उपसमिति के सामने हॉगेन ने लिखित गवाही दी. इसमें उन्होंने कहा,

“जब हमने महसूस किया कि तंबाकू कंपनियां इससे होने वाले नुक़सान को छिपा रही हैं, तो सरकार ने कार्रवाई की. जब हमें लगा कि सीटबेल्ट के साथ कारें सुरक्षित हैं, तो सरकार ने कार्रवाई की. मैं आपसे यहां भी (यानी फेसबुक के मामले में) ऐसा ही करने की विनती करती हूं.”

बीते सोमवार की शाम फ़ेसबुक समेत कंपनी के अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई घंटों तक बंद रहे. अमेरिकी सीनेटर्स के पैनल के सामने हॉगेन ने इस पर भी टिप्पणी कर दी. कहा,

“ये अच्छी बात है कि 5 घंटे से अधिक समय तक फ़ेसबुक का उपयोग ध्रुवीकरण करने, लोकतंत्र को अस्थिर करने और युवा महिलाओं को उनके शरीर के बारे में बुरा महसूस कराने के लिए नहीं किया गया.”

समिति में और क्या बातें हुईं?

खबरों के मुताबिक, बैठक में फेसबुक के प्रतिनिधियों और सीनेटर्स दोनों की ओर से कानूनी सुधारों की मांग की गई है. पैनल के अध्यक्ष डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि फ़ेसबुक के प्रोडक्ट एडिक्टिव हैं और मार्क ज़करबर्ग को समिति के सामने गवाही देने के लिए आना चाहिए. बता दें कि जकरबर्ग इस बैठक में नहीं आए थे. बैठक में हुई बहस के बाद अलग-अलग आयोगों को फेसबुक की जांच करने के निर्देश दिए गए.

ज़करबर्ग ने क्या कहा?

फ्रांसिस हॉगेन के दावों पर फ़ेसबुक के मुखिया मार्क ज़करबर्ग ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक पोस्ट डाला है. इसमें उन्होंने फ़्रांसिस के आरोपों को खारिज किया है.

I wanted to share a note I wrote to everyone at our company.

Hey everyone: it’s been quite a week, and I wanted to…

Posted by Mark Zuckerberg on Tuesday, October 5, 2021

इस पोस्ट में ज़करबर्ग लिखते हैं,

“कई आरोपों का कोई मतलब नहीं है. अगर हम शोध को नज़रअंदाज़ करना चाहते तो हम इन महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने के लिए एक इंडस्ट्री-लीडिंग शोध कार्यक्रम क्यों तैयार करते? अगर हम अपने शोध परिणामों को छुपाना चाहते, तो हम जो कर रहे हैं उस पर पारदर्शिता और रिपोर्टिंग के लिए मानक क्यों स्थापित करते? हमारे जैसी किसी भी कंपनी की तुलना में हम सबसे ज़्यादा इन मुद्दों की चिंता करते हैं. और अगर सोशल मीडिया समाज के ध्रुवीकरण के लिए इतना ही ज़िम्मेदार है जितना कुछ लोग दावा करते हैं, तो हम अमेरिका में ध्रुवीकरण में बढ़ोतरी क्यों देख रहे हैं, जबकि दुनिया भर में सोशल मीडिया के भारी उपयोग के साथ ध्रुवीकरण में गिरावट आ रही है.

इन आरोपों के मूल में ये विचार है कि हम मुनाफे को (लोगों की) सुरक्षा और भलाई से ज्यादा प्राथमिकता देते हैं. ये कतई सच नहीं है. हमने ‘मीनिंगफ़ुल सोशल इंटरैक्शन’ की शुरुआत की. इस फ़ीचर ने वायरल वीडियोज़ कम और दोस्त-परिवार से जुड़ी अपडेट्स ज़्यादा दिखाईं. हमें पता था कि इसका मतलब होगा कि लोग फ़ेसबुक पर कम समय बिताएंगे, लेकिन हमारे शोध ने सुझाव दिया कि ये लोगों की भलाई की बात है. क्या ये मुनाफे पर केंद्रित लगता है?”

वहीं, नफरती और भड़काऊ कंटेंट को बढ़ावा देने वाले आरोप पर मार्क ने लिखा-

ये आरोप बिल्कुल भी तार्किक नहीं है. हम विज्ञापनों से पैसा कमाते हैं और विज्ञापनदाता लगातार हमें बताते हैं कि वे नहीं चाहते कि उनके विज्ञापन हानिकारक या गुस्से वाले कंटेंट के साथ दिखाए जाएं.

मैं विशेष रूप से बच्चों के साथ हमारे काम के बारे में उठाए गए सवालों पर केंद्रित हूं. मैंने अपने बच्चों और अन्य लोगों के ऑनलाइन होने वाले अनुभवों को प्रतिबिंबित करने के लिए बहुत समय बिताया है और मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि हम जो कुछ भी बनाएं, वो बच्चों के लिए सुरक्षित और अच्छा हो.

जकरबर्ग ने कहा कि वो नहीं मानते कि निजी कंपनियों को अपने सभी निर्णय स्वयं लेने चाहिए. इसके लिए चुनी हुई सरकार को भी आगे आना चाहिए. फेसबुक फाउंडर ने कहा कि वो सालों से इंटरनेट को रेग्युलेट करने के नियमों को अपडेट करने की बात कह रहे हैं. इस संबंध में उन्होंने चुनाव, हानिकारक कंटेंट, गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा से संबंधित कई सुझाव रेखांकित करने का दावा किया है. मसलन, युवाओं के लिए इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करने की सही उम्र क्या हो, इंटरनेट सेवादाताओं को लोगों की उम्र की पुष्टि कैसे करनी चाहिए और माता-पिता को अपने बच्चों की गतिविधि का एक्सेस देते हुए उनकी निजता को कैसे संतुलित करना चाहिए.


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