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40 हज़ार किसान-आदिवासियों ने देवेंद्र फडणवीस से क्या वादा लिया है?

अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले मुंबई पहुंचा मार्च अपने लक्ष्य पाने में कामयाब रहा है. महाराष्ट्र के किसानों और आदिवासियों की कई मांगें मान ली गई हैं.

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मुंबई में किसानों और आदिवासियों का महापड़ाव आखिर खत्म हो गया है. इनमें से कई लोग नंगे पांव इतनी दूर से चलकर आए थे और उनके पांव में छाले पड़ गए थे. लेकिन जब महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार और किसान सभा के बीच लिखित समझौते को आज़ाद मैदान के मंच पर पढ़ा गया तो इनकी थकान कुछ कम हो गई. महाराष्ट्र सरकार ने किसानों से ये वादे किए हैं –

1. किसान और आदिवासी जंगल की ज़मीन पर भी फसल ले पाएंगे.
2. 2008 के बाद के सभी कृषि कर्ज माफ होंगे, परिवार में एक से अधिक सदस्यों का 1.5 लाख तक का कर्ज माफ होगा.
3. स्वामिनाथन फॉर्म्युले पर फसल का न्यूनतम मूल्य दिया जाएगा.
4. महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल इलाके में 31 जल संरक्षण योजनाएं बनाई जाएंगी.
5. नार-पार, दमन गंगा और गिरनार रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे.
6. गंभीर बीमारियों से जूझ रहे आदिवासियों को वित्तीय मदद दी जाएगी.

पिछले साल जून में कर्ज माफी का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने ढेर सारी शर्तें लगा दी थी. ये भी कहा था कि 2009 से 2016 के बीच लिया कर्ज ही माफ होगा. इससे कई किसान कर्ज माफी से बाहर हो गए थे. इन शर्तों में अब ढील दी जाएगी. जिन आदिवासियों ने खेती के लिए 2011 से 2008 के बीच कर्ज लिया है, वो भी माफ किया जाएगा. इसके अलावा फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 लागू करने में जो अड़चनें आ रही हैं, उन्हें छह महीनों में हटाने का वादा किया गया है. यहां इस बात का ज़िक्र ज़रूरी है कि महाराष्ट्र उन राज्यों में से है, जहां फॉरेस्ट राइट्स एक्ट अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से लागू हुआ है. लेकिन काफी गुंजाइश बाकी थी.

मार्च के किसानों ने रात को आराम नहीं किया ताकि बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे बच्चों को तकलीफ नहीं हो. (फोटोः ऑल इंडिया किसान सभा के फेसबुक पेज से)
मार्च के किसानों ने रात को आराम नहीं किया ताकि बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे बच्चों को तकलीफ नहीं हो. (फोटोः ऑल इंडिया किसान सभा के फेसबुक पेज से)

रात भर चले, ताकि बच्चों को दिक्कत न हो

मुंबई तक के रास्ते में किसान हर रात पड़ाव करते थे. लेकिन आखिरी रात उन्होंने पड़ाव नहीं किया. दिन भर की थकान किनारे रख कर रात भर चले. ताकि बोर्ड परीक्षा देने जा रहे बच्चे ट्रैफिक जाम में न फंसें. किसानों नो दूसरों की फिक्र की तो उन्हें भी मुंबई के लोगों ने भी उनकी जितनी मदद हुई, की. कोई पानी की बोतलें लेकर आया तो कोई खाना. किसानों के नंगे पावों में छालों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब चली थीं तो कुछ लोग चप्पलें भी लेकर आए. मुंबई के डब्बे वाले भी किसानों के लिए पाव भाजी लेकर पहुंचे.

पैदल आए थे, ‘एसटी’ और ट्रेन से वापस गए

नासिक, पालघर, नंदूरबार और पड़ोसी ज़िलो के किसान मांगें माने जाने के बाद ‘एसटी’ से लौटे. महाराष्ट्र में सरकारी बसों को एसटी कहा जाता है – स्टेट ट्रांसपोर्ट. ये खासतौर पर उनके लिए चलाई गई थीं. दो स्पेशल ट्रेनें भी चलाई गईं. जाते-जाते किसानों ने कहा कि ये पहली बार है कि उन्हें सरकार से कोई वादा लिखित में मिला है. अभी वो वापस जा रहे हैं, लेकिन अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वो दोबारा मुंबई आएंगे.


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Devendra Fadnavis government agrees to demands of farmers and tribals, long march ends

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