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क्या एक केंद्रीय मंत्री को किसी राज्य की पुलिस गिरफ्तार कर सकती है?

केंद्रीय सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे. आज 24 अगस्त की दोपहर खबर आई कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. 20 साल बाद भारत में किसी केंद्रीय मंत्री पर इस तरह की कार्रवाई हुई है. इससे पहले मुंबई में शिवसेना और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प भी हुई. ये सारा बखेड़ा खड़ा हुआ राणे की एक आपत्तिजनक टिप्पणी से. 23 अगस्त को राणे रायगड ज़िले में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे थे. इस मौके पर उन्होंने कहा,

”ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को आज़ादी मिलने का साल याद नहीं. अपने भाषण के दौरान उन्हें पीछे मुड़कर सालों की गिनती पूछनी पड़ी. अगर मैं वहां होता, मैं उन्हें एक ज़ोरदार थप्पड़ मारता.”

राणे का दावा था कि उद्धव ठाकरे 15 अगस्त को महाराष्ट्र शासन के मुख्य कार्यक्रम में भाषण के दौरान स्वतंत्रता मिलने का साल भूल गए थे और उन्हें अपने सहयोगी से साल पूछना पड़ा था.

इस बात से शिवसेना के कार्यकर्ता काफी नाराज़ हुए और उन्होंने मुंबई समेत कई जगहों पर नारायण राणे को लेकर पोस्टर लगा दिए. इनमें से कई जगह उन्हें कोंबड़ीचोर लिखा गया था. माने मुर्गी चुराने वाला. नारायण राणे अपने शुरुआती दिनों में मुंबई के चेंबूर में चिकन की एक दुकान चलाते थे. तब वो शिवसेना में होते थे.

खबर ये भी है कि शिवसैनिकों ने नागपुर में भाजपा कार्यालय पर पत्थर चलाए. नारायण राणे के घर के बाहर शिवसैनिकों ने प्रदर्शन किया. वो इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने नाशिक सहित कई ज़िलों में नारायण राणे के खिलाफ FIR कर दी. इसके बाद गिरफ्तारी का वॉरंट जारी कर दिया गया और नाशिक पुलिस की एक टीम राणे की तलाश में रत्नागिरी के चिपलून की ओर रवाना हो गई.

जैसे ही ये मालूम चला कि पुलिस वाकई राणे पर कार्रवाई कर सकती है, राणे के वकीलों ने अग्रिम ज़मानत के लिए कोशिश शुरू कर दी. राणे के वकील पहले रत्नागिरी सत्र न्यायालय पहुंचे, जहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली. इसके बाद राणे के वकीलों ने बंबई उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया. लंच के बाद जब बंबई उच्च न्यायालय में जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की, तो राणे के वकील अनिकेत निकम ने आपात सुनवाई की अपील की. इसपर न्यायालय ने कहा कि निकम को रजिस्ट्री में विधिवत आवेदन देना होगा.

क्योंकि ऐसा हुआ नहीं था, न्यायालय ने मामले को आगे सुनने से इनकार कर दिया. इसके बाद तय हो गया कि राणे गिरफ्तार कर लिए जाएंगे. दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब रत्नागिरी पुलिस ने राणे को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन्हें अपने साथ ज़िले में ही पड़ने वाले संगमेश्वर पुलिस स्टेशन ले गई. यहां नाशिक पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया.

दोपहर बाद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी राणे के समर्थन में उतर गया. पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक ट्वीट में राणे की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया.

पुलिस केंद्रीय मंत्री को कर सकती है गिरफ्तार?

जैसे ही राणे की हिरासत की खबर आई, कुछ कौतुहल इस बात को लेकर भी पैदा हो गया कि क्या किसी राज्य कि पुलिस एक केंद्रीय मंत्री को इस तरह गिरफ्तार कर सकती है? हम आपके लिए इस सवाल का जवाब लेकर आए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर 24 अगस्त को छपी रिपोर्ट में संबंधित नियमों की जानकारी है. राणे एक राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं. नियम ये कहते हैं कि अगर संसद सत्र में न हो, तो पुलिस जैसी एजेंसियां सांसदों को आपराधिक मामलों के संबंध में गिरफ्तार कर सकती हैं. लेकिन राज्यसभा के रूल्स ऑफ प्रोसीजर और कॉन्डक्ट ऑफ बिज़नेस के धारा 22 A के तहत पुलिस, जज अथवा मैजिस्ट्रेट को राज्यसभा के सभापति को एक निर्धारित फॉर्मेट में जानकारी देनी होती है. इसमें गिरफ्तारी का कारण और हिरासत/कैद की जगह बतानी होती है.

इसके बाद अगर राज्यसभा की कार्यवाही चल रही हो, तो सभापति गिरफ्तारी की जानकारी सदन के साथ बांटते हैं. अगर सदन न चल रहा हो, तो ये जानकारी राज्यसभा के बुलेटिन में प्रकाशित की जाती है.

सांसदों के विशेषाधिकार होते हैं. और उन्हें गिरफ्तारी से छूट मिलती है. ये छूट किसी सत्र से 40 दिन पहले शुरू होती है, सत्र के दौरान बनी रहती है और सत्र के 40 दिन बाद तक चलती है. लेकिन ये छूट सिर्फ दीवानी मामलों में होती है. ये छूट फौजदारी के मामलों में नहीं मिलती. अगर मामले पर एहतियातन नज़रबंदी या प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधान लागू होते हैं, तब भी सांसद गिरफ्तारी से छूट का दावा नहीं कर सकते.

नाशिक पुलिस ने इस संबंध में तैयारी कर रखी थी. नाशिक पुलिस कमिश्नर दीप पांडेय ने दोपहर में प्रेस को बताया था कि राणे को गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश किया जाएगा. गिरफ्तारी के बाद राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को आधिकारिक सूचना दी जाएगी क्योंकि राणे एक राज्यसभा सांसद हैं.

जब थप्पड़ की बात पर बखेड़ा खड़ा हुआ है, तो आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में लगातार थप्पड़ का ज़िक्र हो रहा है. 1 अगस्त को ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था,

”हमें कोई थप्पड़ मारने की धमकी न दे. वर्ना हम ऐसा थप्पड़ मारेंगे कि थप्पड़ की धमकी देने वाले दोबारा उठेंगे नहीं.”

इस बयान पर महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष प्रवीण दरेकर ने कहा था कि ये महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं.

इससे पहले भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने कहा था कि हम माहिम में आए हैं तो उन्हें (यानी शिवसेना को) लगता है कि शिवसेना भवन तोड़ने आ गए हैं. वक्त आया तो हम शिवसेना भवन भी तोड़ देंगे. इस बात पर विवाद हुआ तो लाड को कहना पड़ा कि वो बाल ठाकरे का सम्मान करते हैं और उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया. खुद नारायण राणे भी अपने बयानों के चलते सुर्खियां बटोरते रहे हैं. उन्होंने हाल ही में बाढ़ग्रस्त चिपलूण का दौरा किया था.

कौन हैं नारायण राणे?

नारायण राणे की महाराष्ट्र के कोंकण से भाजपा के कद्दावर नेता हैं. उन्होंने 60 के दशक में शिवसेना की राजनीति शुरू की. 1990 में वो शिवसेना से विधायक बने. 1999 में वो शिवसेना-भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बने. लेकिन इसी साल ये गठबंधन चुनाव हार गया. 2005 में राणे ने शिवसेना से अपनी राह अलग कर ली. फिर कांग्रेस में शामिल हुए और सूबे में मंत्री भी रहे.

2017 में ये कहते हुए कांग्रेस से अलग हो गए, कि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा रहा. सितंबर 2017 में उन्होंने महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष नाम से पार्टी बनाई. अक्टूबर 2019 में इस पार्टी का भाजपा में विलय हो गया. राणे अब राज्यसभा में भाजपा सांसद हैं और जून में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें मंत्रिपद दिया गया. राणे के बेटे नितेश राणे फिलहाल कणकवली विधानसभा से विधायक हैं.

राणे की छवि एक बाहुबली नेता की रही है. वो किस्सा महाराष्ट्र में खूब रस लेकर सुनाया जाता है जब जून 2002 में विलासराव देशमुख की सरकार अल्पमत में आ गई थी. चूंकि देशमुख से पहले राणे ही महाराष्ट्र के सीएम थे, तो उन्होंने इस संकट का फायदा उठाकर अपनी सरकार बनाने की सोची. इसके लिए उन्होंने एनसीपी और कांग्रेस के विधायकों को मुंबई के एक स्पोर्ट्स क्लब में छिपा दिया था.

कांग्रेस एनसीपी ने आरोप लगाया कि विधायक किडनैप हो गए हैं, और उन्हें डराकर सरकार गिराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. तब महाराष्ट्र सरकार ने क्लब में पुलिस फोर्स भेजी थी, लेकिन वो विधायकों को छुड़वा नहीं पाए थे. ये अलग बात है कि विलासराव देशमुख की सरकार तब बच गई थी.

फिलहाल राणे के आक्रामक रुख की वजह बताई जा रही है बृहन्नमुंबई महानगर पालिका के आगामी चुनाव. दर्शक जानते ही हैं कि BMC का बजट लगभग महाराष्ट्र सरकार के बजट के बराबर होता है. इसीलिए इसके चुनावों को लेकर महाराष्ट्र में खूब होड़ होती है. इसके अलावा महाराष्ट्र के दूसरे बड़े शहरों में महानगरपालिकाओं के भी चुनाव हैं. इनमें से नागपुर, पुणे और नाशिक जैसी बड़ी नगर पालिकाएं शामिल हैं. तो महाराष्ट्र में सभी नेता और पार्टियां मुखर होकर अपनी बात रख रहे हैं.

***

पुनश्चः

भारत के इतिहास में अब तक सिर्फ तीन बार केंद्रीय मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है. राणे तीसरे हैं. पहले दो थे वाजपेयी कैबिनेट में मंत्री टीआर बालू और मुरसोली मारन. बालू, पर्यावरण और वन मंत्री थे. और मारन थे उद्योग मंत्री. एम करुणानिधि की डीएमके एनडीए सरकार में थी. और इसी कोटे से दोनों को मंत्रिपद मिला था. लेकिन ये दोनों एक तीसरे नेता के चक्कर में गिरफ्तार हुए थे.

दरअसल तब तमिलनाडु में सरकार थी एआईएडीएमके की. मुख्यमंत्री थीं जे जयललिता. 30 जून 2001 को जे. जयललिता के आदेश पर सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को गिरफ्तार किया गया. उनपर चेन्नई में हुए कथित फ्लायओवर घोटाले में शामिल होने का आरोप था. जब पुलिस करुणानिधि को गिरफ्तार करने पहुंची तो डीएमके काडर आड़े आ गया. टीआर बालू और मुरसोली मारन भी वहीं थे. पुलिस ने करुणानिधि को गिरफ्तार किया घोटाले के आरोप में, और बालू और मारन को गिरफ्तार किया शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में. इनके साथ डीएमके के कई कार्यकर्ता भी गिरफ्तार हुए थे. धक्का-मुक्की में मारन की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. मुरसोली मारन करुणानिधि के भांजे थे.

इस घटना पर तब खूब हंगामा हुआ था. गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम सन टीवी पर लाइव दिखाया गया था. इसके बाद केंद्र में तत्कालीन कानून मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार केंद्रीय मंत्रियों को गिरफ्तार करने बाबत एक प्रक्रिया का ऐलान करेगी.


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