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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- तबलीगी जमात के खिलाफ प्रोपेगैंडा चलाया गया, 'बलि का बकरा' बनाया गया

दिल्ली निज़ामुद्दीन मरकज़ मामला. बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने शनिवार, 22 अगस्त को 29 विदेशी तबलीगी जमात के सदस्यों समेत कई व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में तबलीगी जमात के विदेशियों को ‘बलि का बकरा’ बनाया गया. कोर्ट ने मीडिया को लेकर भी तल्ख टिप्पणी की. कहा कि तबलीगी जमात को कोरोना वायरस संक्रमण का जिम्मेदार बताकर प्रोपेगैंडा चलाया गया.

विदेशी नागरिकों के अलावा 6 भारतीयों और कई मस्जिदों के ट्रस्टी के ख़िलाफ़ शरण देने को लेकर महाराष्ट्र पुलिस ने FIR दर्ज की थी. महामारी ऐक्ट, महाराष्ट्र पुलिस ऐक्ट, डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट और फॉरेनर्स ऐक्ट से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया था.

याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा

जस्टिस टीवी नलावडे और जस्टिस एमजी सेवलिकर की डिवीजन बेंच ने आयवरी कोस्ट, घाना, तंजानिया, जिबूती, बेनिन और इंडोनेशिया के याचिकाकर्ताओं की अपील पर सुनवाई की. महाराष्ट्र पुलिस ने दावा किया था कि इन लोगों के अलग-अलग मस्जिद में रहने और नमाज़ पढ़ने की सूचना मिली थी, जो कि लॉकडाउन के आदेशों का उल्लंघन था. इसके बाद इनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वो वैध वीज़ा पर भारत आए. उन्होंने ये भी कहा कि एयरपोर्ट पर उनकी स्क्रीनिंग में निगेटिव पाए जाने के बाद ही वो एयरपोर्ट से बाहर आए.

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने कहा,

‘भारत में संक्रमण के ताज़े आंकड़े दिखाते हैं कि याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ ऐसे ऐक्शन नहीं लिए जाने चाहिए थे. विदेशियों के खिलाफ जो ऐक्शन लिया गया, उसकी क्षतिपूर्ति के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाने की ज़रूरत है.’

कोर्ट ने कहा,

‘दिल्ली के मरकज़ में आए विदेशी लोगों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रोपेगैंडा चलाया गया. भारत में फैले कोविड-19 संक्रमण का जिम्मेदार इन विदेशी लोगों को ही बनाने की कोशिश की गई. तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया गया.’

ओवैसी ने बीजेपी को घेरा

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी को घेरा. उन्होंने ट्वीट कर कहा,

‘ये सही समय पर दिया गया फैसला है. मीडिया ने तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया ताकि बीजेपी को आलोचना से बचाया जा सके. इस प्रोपैगैंडा की वजह से देशभर में मुस्लिमों को नफरत और हिंसा का शिकार होना पड़ा.’

निज़ामुद्दीन मरकज़

इसी साल मार्च महीने में दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ में तबलीगी जमात का जमावड़ा हुआ था, जिसमें देश-विदेश के हजारों लोग शामिल हुए थे. बाद में इसे कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बताया गया. मीडिया की कई रिपोर्ट्स में देश के अलग-अलग इलाकों के तमाम कोरोना के मामले मरकज़ से जोड़े गए.


कोरोना टेस्ट नेगेटिव आने के बावजूद 3000 तबलीगी जमात के लोग रिहा क्यों नहीं हुए?

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