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क्या है पश्चिम बंगाल में दंगे का सच?

एक घटना. फिर उसके बाद दूसरी घटना. और घटनाओं के बीच घटता बहुत कुछ ऐसा, जो गैर-ज़रूरी भी है और ख़तरनाक भी. किसी घटना से आंखें मूंद लेना उतना ही बुरा है, जितना कि घटना के बारे में झूठ फैलाना. सोशल मीडिया के ज़माने में घर-घर पहुंचते बिना पांव वाले झूठ कहरबरपा नतीजे ला रहे हैं.

अमूमन बोले हुए झूठ के फेल होने के चांसेस ज़्यादा होते हैं. लोग उसको अफवाह मान के हवा में उड़ा सकते हैं क्योंकि उनके लिए वो बात सुनी-सुनाई है. वहां ये गुंजाइश होती है कि झूठ फैलाने वाले का मकसद पिट जाए. लेकिन व्हाट्सऐप के ज़माने में – वीडियो और तस्वीरों के रूप में – एक मारक और अचूक हथियार हाथ लगा है अफवाहबाजों के. उन्हें बस फोटोज वायरल करनी हैं. चाहे वो कहीं की भी हो, किसी भी घटना की हो. लोग फोटो के साथ परोसी जा रही कहानी पर जल्दी यकीन कर लेते हैं. क्योंकि बहुसंख्य जनता ना तो जानती है और ना ही मानती है कि इसमें भी फर्जीवाड़ा हो सकता है. ना ही लोगों के पास उसे वेरीफाई करने का कोई ज़रिया होता है. तो जो दिखाया जा रहा है उसे ही सच मानना पड़ता है. ऊपर से व्यक्ति जिस धर्म/पार्टी/विचारधारा से जुड़ा है उसकी तरफ उसका बायस्ड होना भी उसके विवेक पर असर डालता है. मसलन इस्लाम का कट्टर अनुयायी बड़ी आसानी से मुसलमानों पर होते ज़ुल्म की तस्वीरें सच्ची मान लेता है. इसी तरह कोई हिंदू बच्चा कश्मीर के नाम पर खपाये जा रहे बलूचिस्तान के वीडियो पर ईमान ले आता है. इस वक्त पश्चिम बंगाल में दंगा हुआ है और उसके बारे में तमाम सच्ची-झूठी बातें फैलाई जा रही हैं.

असल में क्या हुआ पश्चिम बंगाल में

ईद-उल-मिलाद का दिन. पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में पड़ने वाले धुलागढ़ में एक जुलूस निकला. हज़रत मुहम्मद साहब की सालगिरह की ख़ुशी में जश्न का जुलूस. उस जुलूस में किसी ने सुतली बम फेंक दिया. उसके बाद मुस्लिम समाज भड़क गया. बाजारों में तोड़-फोड़ शुरू हुई. कई मकानों और दुकानों में आग लगा दी गई. एक सीनियर पुलिस अधिकारी का कहना है कि उन्होंने पहले दिन कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था और स्थिति कंट्रोल में थी.

हिंसा अगले दिन फिर भड़की. मुसलमानों के एक समूह ने हिंदू घरों और दुकानों पर हमला बोला और उन्हें आग के हवाले कर दिया. दंगे भड़क उठे. लगभग दो घंटों तक पुलिस और दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने डटे रहे. पुलिस ऑफिसर ने कहा, ‘उन लोगों के पास बम थे. हमें आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.’ पुलिस ने आगे ये भी बताया कि दोनों ही समुदायों के सदस्यों के खिलाफ़ केस रजिस्टर कर लिया गया है. हालांकि घटना के हफ्ते भर बाद तक हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं.

मीडिया और ममता पर सवाल

मेन स्ट्रीम मीडिया में इस ख़बर का नदारद होना काफी बवाल खड़ा कर गया है. ममता बैनर्जी पर इस घटना को दबाने के आरोप लग रहे हैं. टीएमसी के एमएलए सीतल कुमार से जब पूछा गया तब उन्होंने कहा, ‘कुछ टेंशन तो थी लेकिन दोनों समुदायों ने पुलिस के साथ बैठकर मामला सुलझा लिया है. अब माहौल शांत है.’

पहली बात तो ये कि ऐसी किसी घटना का उसके होने के कई दिनों बाद तक मुख्यधारा की ख़बरों में जगह ना पाना दुःख की बात है. ऊपर से स्टेट मशीनरी पर जब गंभीर आरोप लगते हैं तब उसका फ़र्ज़ होता है कि मामले पर लिपटी धूल छांटे. इसमें ममता सरकार बुरी तरह फेल रही है. इस घटना के कई वर्जन छंट-छंट कर बाहर आ रहे हैं. और फिर सोशल मीडिया के जरिए मनमानी व्याख्या के साथ आगे अरसाल किए जा रहे हैं. ‘बिका हुआ मीडिया ये नहीं दिखाएगा’ के हैशटैग के साथ परोसी जाती वहां की ख़बरें खलबली भी मचा रही हैं और ज़हर भी फैला रही है.

आइये कुछ तस्वीरें देखते हैं. जो धुलागढ़, हावड़ा के फ़साद की बताकर शेयर की जा रही हैं, लेकिन मामला कुछ और है:

I Support Arnab Goswami नाम के इस फेसबुक पेज पर ममता बैनर्जी पर तंज कसते हुए इन तस्वीरों के साथ लिखा गया,‘बंगाल दंगों की भयंकर तस्वीरें, हिन्दुओं को भगवान ही बचा सकता है.’

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India Arising नाम के एक और पेज ने सेम तस्वीर इस कैप्शन के साथ डाली:‘बंगाल जल रहा है, हिन्दुओं पर उनके घर में हमले हो रहे हैं.’

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एक ये भी उदाहरण देखिये जहां किसी ने अपनी प्रोफाइल से भी सेम फोटोज पोस्ट किए, बस कैप्शन बदला:‘कहां है आमिर खान और अवॉर्ड वापसी गैंग?’ 

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इन तस्वीरों को हज़ारों लोगों ने देखा और शेयर किया. अब जानिए इन तस्वीरों का सच. ऊपर दिखाई गई तमाम तस्वीरें बांग्लादेश से हैं. और वो भी कुछ महीने पुरानी. पहले से भड़की आग में और ईंधन झोंकने के लिए इन्हें इस्तेमाल किया जा रहा है. उन तारीखों को लाल रंग में हाईलाइट कर रहे हैं जिनमें ये ख़बरें प्रकाशित हुई.

ये रही पहली तस्वीर:

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दूसरी तस्वीर:

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तीसरी तस्वीर:

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चौथी तस्वीर:

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एक लोकल भाजपा नेता ने नाम न देने की शर्त पर हमसे कहा, हालिया मामले में मंदिर तोड़े जाने का जो दावा किया जा रहा है, वो बेबुनियाद है. ये सच है कि दुकानों, मकानों की लूट के साथ-साथ एक मंदिर में भी लूटपाट हुई.

जब साम्प्रदायिक दंगे होते हैं, तब अफवाहों का बाज़ार वैसे ही गर्म होता है. अफरातफरी के उस माहौल को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक चले जाते हैं. हम सबका फ़र्ज़ है कि फोटोशॉप के इस दौर में रिसीव होने वाली हर चीज़ का ऐतबार न करें. अपनी अकल लगा के सही-गलत की पहचान करें. पहले से बिगड़ी फिज़ा को और ना बिगाड़ें. कुछ भी फॉरवर्ड करने से पहले कई बार सोचें.पहले से मर रहे लोगों की संख्या बढ़ाने में योगदान न दें. आपका फॉरवर्ड किया हुआ ऐसा कोई भी मैसेज किसी और जगह किसी और की जान का ग्राहक बन सकता है. थोडा सा ज़िम्मेदार बनना हर एक की सोशल/मॉरल/नेशनल ड्यूटी है.


साभार: SMHoaxSlayer

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