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इस तारीख़ तक पता चल जाएगा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने में किन लोगों ने साज़िश रची थी?

बाबरी मस्जिद विध्वंस केस. साल 1992 के इस मामले में लखनऊ की स्पेशल CBI कोर्ट में सुनवाई चल रही है. पहले 31 अगस्त तक सुनवाई पूरी करके CBI कोर्ट को अपना फ़ैसला सुना देना था. अब सुप्रीम कोर्ट ने नयी मियाद दी है. कहा है कि 30 सितम्बर तक सुनवाई और जजमेंट का काम पूरा हो जाए.

स्पेशल CBI कोर्ट के जज सुरेंद्र कुमार यादव की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया है. 

इस केस में कब-कब क्या-क्या हुआ?

– 6 दिसम्बर 1992. कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी. और इसी दिन रामजन्मभूमि थाने में एक के बाद एक दो FIR दर्ज करवाई गयीं. इसके बाद पत्रकारों द्वारा कुल 47 FIR. इन FIR में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा के नाम हैं. इनके अलावा कई अज्ञात कारसेवकों का भी ज़िक्र बतौर आरोपी FIR में किया गया.

– 13 दिसम्बर, 1992. केंद्र सरकार ने आदेश दिया कि मामले की जांच CBI को दे दी जाए. 

– 5 अक्टूबर 1993. CBI ने इस मामले में पहली चार्जशीट दायर की. इस चार्जशीट में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, बृजभूषण शरण सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, विहिप नेता अशोक सिंघल, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, गिरिराज किशोर, शिवसैनिक पवन पांडेय, अयोध्या के तत्कालीन डीएम आरएस श्रीवास्तव और एसएसपी डीबी राय के नाम थे.

आडवाणी, जोशी और अशोक सिंघल : राम मंदिर आंदोलन को इस मोड़ तक लेकर आने में इन तीन नेताओं का प्रमुखता से लिया जाता रहा है.
आडवाणी, जोशी और अशोक सिंघल : राम मंदिर आंदोलन को इस मोड़ तक लेकर आने में इन तीन नेताओं का नाम प्रमुखता से लिया जाता रहा है.

– CBI की करीब दो साल की जांच के बाद तारीख़ आई 11 जनवरी 1996. इस दिन CBI लखनऊ कोर्ट में एक सप्लीमेंटरी चार्जशीट दायर करती है. इस चार्जशीट में कुछ और नाम जोड़े जाते हैं. ये नाम थे- रामविलास वेदांती, धर्म दास, नृत्य गोपाल दास, महामण्डलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, विजया राजे सिंधिया और सतीश कुमार. इस चार्जशीट में CBI ये भी कहती है कि बाबरी मस्जिद पर जो हमला किया गया, उसकी भरपूर प्लानिंग की गयी थी. ये एक बड़ी साज़िश का हिस्सा था. 

– साल 1997. लखनऊ कोर्ट के जज ने आदेश दिया कि इस मामले के अब तक के 48 आरोपियों के खिलाफ़ आरोप तय किए जाएं. इस आदेश को 48 में से 33 आरोपियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी. 4 साल तक इस केस में कोई ख़ास बढ़त नहीं हो सकी.

– 12 फ़रवरी, 2001 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि विशेष जज को मामले की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है. ये भी कहा कि 198/92 के तहत सुनवाई के लिए जो आदेश जारी हुआ था, वो ग़लत था. ख़बरें बताती हैं कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 198/92 के तहत चल रहे केस में आरोपियों के खिलाफ़ आपराधिक साज़िश का चार्ज हटाने का आदेश दिया.

– 19 सितंबर 2003. CBI विशेष अदालत में तैनात विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट विमल कुमार सिंह ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को सभी आरोपों से बरी कर दिया. इसे देखते हुए 10 अक्टूबर, 2003 को भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की कि उन पर तय किए गए आरोपों पर पुनर्विचार किया जाए. 

– लेकिन दो साल बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आडवाणी को मिली चैन की सांस छीन ली. 6 जुलाई, 2005. हाई कोर्ट ने आडवाणी पर फिर से आरोप तय करने का आदेश जारी किया. 28 जुलाई 2005. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद सिंह ने आडवाणी पर फिर से साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप तय कर दिया.

– साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गयी CBI की पुनर्विचार याचिका भी ख़ारिज हो गयी. आडवाणी और अन्य लोगों के खिलाफ़ आपराधिक साज़िश के आरोप रद्द ही रहे. साल 2010 तक रायबरेली और लखनऊ, दो अलग-अलग अदालतों में मुक़दमों की सुनवाई हो रही थी.

– आख़िरकार 19 अप्रैल, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया. आडवाणी और बाक़ी लोगों को आपराधिक साज़िश के आरोप के अधीन लाया गया. और CBI कोर्ट को ये आदेश जारी किया गया कि वो अगले 2 साल में इस मामले की सुनवाई पूरी कर ले. 2 साल की मियाद पूरी हो गयी. फिर 19 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई और फ़ैसले की मियाद को बढ़ा दिया. कहा कि 6 महीने के अंदर सभी गवाहों और आरोपियों के बयान दर्ज कर लें. और उसके बाद फ़ैसला सुनाएं. 

कल्याण सिंह
कल्याण सिंह

– इस केस के मुख्य आरोपी और ढांचा गिराए जाने के समय यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह से भी लम्बे समय तक पूछताछ नहीं हो सकी थी. 4 सितम्बर, 2014 को कल्याण सिंह ने राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ले ली. इस शपथ के बाद उन्हें भारतीय संविधान के तहत इम्यूनिटी मिली. राज्यपाल से पूछताछ या गिरफ़्तारी नहीं की जा सकती. लेकिन सितम्बर 2019 में राज्यपाल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद कल्याण सिंह पर फिर से CBI का शिकंजा कसा. और अब सुनवाई और आरोपियों की लिस्ट में फिर से आ गए हैं. और अब जो है, वो सब आपके सामने है. 

– 4 जून, 2020 से फिर से आरोपियों की पेशी कोर्ट में शुरू हुई है. कोरोना की वजह से वर्चुअल हियरिंग हो रही है. इसमें आडवाणी, जोशी, उमा भारती, कटियार, कल्याण सिंह समेत कई नामज़द नेताओं ने अपने बयान दर्ज कराए हैं. और अब ये एक नयी डेडलाइन.

ज़मीन पर फ़ैसला और आवंटन

अयोध्या भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट पिछले साल अपना फ़ैसला सुना चुका है. विवादित क्षेत्र को राम मंदिर के लिए दे दिया गया है. इसके लिए हाल फ़िलहाल नरेंद्र मोदी अयोध्या जाकर भूमि पूजन भी कर आए हैं. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को अयोध्या के बाहरी इलाके में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ की ज़मीन आवंटित करने की बात कही थी. अयोध्या के ही धुन्नीपुर गांव में ज़मीन आवंटित हुई. और एक तरफ़ राम मंदिर के निर्माण के साथ ही, धुन्नीपुर में भी मस्जिद का निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.


लल्लनटॉप वीडियो : अयोध्या में जिस राम मंदिर का भूमिपूजन PM मोदी ने किया, उसके आंदोलन के नायक कौन हैं?

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