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संसद में हंगामे का नतीजा, लोकसभा में इन 5 चर्चित विधेयकों को पारित होने में एक घंटा भी नहीं लगा

पेगासस (Pegasus) मामले को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच जारी तनातनी की वजह से संसद का मॉनसून सत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है. संसद के दोनों सदनों में कामकाज लगभग बंद ही रहा. इसका नतीजा क्या रहा, ये संसदीय मामलों पर शोध करने वाली संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव की एक रिपोर्ट में सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हंगामे के चलते इस सत्र में लोकसभा की कार्यवाही केवल 14% रही है. आलम ये रहा कि केवल एक घंटे से भी कम समय में 5 विधेयक पारित किए गए. जबकि इसी साल की शुरुआत में बजट सत्र के दौरान लोकसभा द्वारा पारित विधेयकों पर औसतन 2.5 घंटे का वक़्त लगा था.

इस मामले में राज्यसभा का कामकाज लोकसभा से थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन कुल-मिलाकर यहां भी निराशाजनक काम हुआ है. पीआरएस के मुताबिक, मौजूदा सत्र में राज्यसभा की प्रोसीडिंग केवल 22 प्रतिशत रही. जहां लोकसभा में पारित पांच विधेयकों की चर्चा में खर्च किया गया कुल समय 44 मिनट था, वहीं राज्यसभा में तीन विधेयक पारित किए गए, जिन पर कुल 72 मिनट समय खर्च किया गया.

Rajyasabha
मॉनसून सत्र में खाली रही राज्यसभा और लोकसभा. (फाइल फोटो)

5 मिनट में पारित हुआ विधेयक

लोकसभा में पारित विधेयकों की बात करें तो यहां एक विधेयक को पारित कराने में सबसे अधिक 14 मिनट का समय लगा. वहीं, एक अन्य विधेयक को महज 5 मिनट में ही पारित कर दिया गया. पीआरएस के मुताबिक, 28 जुलाई को पारित दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2021 केवल 5 मिनट में पारित किया गया था. बाकी के विधेयकों में कितना समय लगा, ये भी जान लीजिए.

– 26 जुलाई: राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान, उद्यमिता और प्रबंधन विधेयक, 2019 को पारित होने में छह मिनट लगे. उसी दिन फैक्टरिंग रेगुलेशन (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित हुआ था, जिसमें 13 मिनट का वक़्त लगा था.

– 29 जुलाई: अंतर्देशीय पोत विधेयक, 2021 को मंजूरी मिलने में महज़ 6 मिनट का वक़्त लगा. इसी दिन पांचवां और  आख़िरी विधेयक भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 भी पारित हुआ. इसमें सबसे ज़्यादा 14 मिनट में पारित किया गया.

ये हाल रहा लोकसभा का. अब राज्यसभा में पारित 3 विधेयकों में लगे समय की बात कर लेते हैं. यहां सबसे कम चर्चा वाला विधेयक रहा फैक्टरिंग रेगुलेशन (संशोधन) विधेयक, 2020. इसे 29 जुलाई को सदन के पटल पर रखा गया और महज 14 मिनट में पारित कर दिया गया. उससे पहले 28 जुलाई को लाए गए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 को पारित करने में 18 मिनट लगे. वहीं, उससे पहले 27 जुलाई को नौवहन के लिए समुद्री सहायता विधेयक, 2021 को ऊपरी सदन ने 40 मिनट में पारित किया था. इसमें सबसे ज़्यादा 7 सांसदों ने चर्चा में भाग लिया था. पीआरएस लेजिस्लेटिव ने बताया कि 2021 के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में किसी भी विधेयक को पारित करने से पहले उस पर औसतन दो घंटे चर्चा की गई थी.

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लोकसभा में महज एक घंटे से भी कम समय में पारित हुए 5 बिल. (फाइल फोटो)

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा?

लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही जिस पेगासस मामले की वजह से ठप रही, उसे सरकार कोई मुद्दा ही नहीं मानती. ये हम नहीं, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है. एक तरफ़ पेगासस मामले में विपक्ष सरकार को घेरने के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है, वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी विपक्ष ने बर्ताव को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया है. प्रह्लाद जोशी ने कहा है,

“पेगसस कोई मुद्दा नहीं है. सरकार लोगों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है. भारत के लोगों से सीधे जुड़े कई मुद्दे हैं… सरकार उन पर चर्चा के लिए तैयार है.”

जोशी ने आगे कहा कि पेगासस पर विपक्ष आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से जो भी जानना चाहता है वो पूछ सकता है और वे इस मुद्दे पर एक विस्तृत बयान दे चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पेगासस मामला

इस बीच, पेगासस जासूसी मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. 30 जुलाई को वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार ने शीर्ष अदालत में PIL दायर की है. इसमें मामले की SIT जांच कराने की बात कही गई है. याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना से याचिका को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था. खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को मंजूरी दे दी है, जो अगले की जाएगी.


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