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अमेरिका ने माना- काबुल ड्रोन हमले में ISIS आतंकी नहीं, आम नागरिक मारे गए थे

अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान के काबिज़ होने के कुछ दिन बाद ही काबुल (Kabul) एयरपोर्ट के पास आत्मघाती धमाका हुआ. हमले में 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए. दावा किया गया कि इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-Khorasan) का हाथ है. झल्लाए अमेरिका (America) ने 29 अगस्त को ड्रोन हमला (Drone Attack) करके आतंकियों को मार गिराने का दावा किया. अब अमेरिका गलती मान रहा है कि असल में ड्रोन हमले में आम नागरिक मारे गए थे.

मरने वालों में 7 मासूम बच्चे शामिल

अमेरिकी रक्षा सचिव (रक्षा मंत्री) लॉयड ऑस्टिन ने काबुल में हुए ड्रोन हमले के लिए शुक्रवार यानी 17 सितंबर को माफी मांगी. इसमें दस लोगों की मौत हो गई थी. ऑस्टिन ने एक बयान में कहा कि

“मैं ड्रोन हमले में मारे गए लोगों के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. हम क्षमा चाहते हैं और हम इस भयानक गलती से सीखने का प्रयास करेंगे.”

अफगानिस्तान में किए गए ड्रोन हमले में अमेरिका ने अपनी गलती मान ली है. अमेरिका ने एक बयान में कहा है कि आतंकियों के भ्रम में उसने कार पर जो मिसाइल दागी थी, वो भूल थी. उस कार में अफगानिस्तान में बचाव कार्य में लगे ऐड वर्कर थे. इस हमले में 7 बच्चों समेत 10 बेकसूर लोग मारे गए. अमेरिकी सैन्य जांच टीम ने पाया कि ड्रोन हमले से जिस वाहन को निशाना बनाया गया, उसमें आईएसआईएस-खुरासान गुट के आतंकी होने का संदेह था, लेकिन यह गलत साबित हुआ. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के कमांडर जनरल फ्रैंक मैंकेंजी ने शुक्रवार रात यह ऐलान किया.

उन्होंने कहा,

“यह हमला इस विश्वास के साथ किया गया था कि यह हमारे सुरक्षा बलों और हवाई अड्डे के जरिये निकाले गए लोगों पर मंडराते खतरे को रोक देगा, लेकिन यह एक गलती थी और मैं माफी मांगता हूं. मुझे अब विश्वास हो गया है कि उस हमले में 7 बच्चों समेत 10 नागरिक दुखद रूप से मारे गए थे. इसके अलावा जांच में पता चला है कि यह संभावना नहीं है कि स्ट्राइक में निशाना बनाया गया वाहन और मारे गए लोग ISIS-K से जुड़े थे और उनसे अमेरिका को कोई सीधा खतरा था. मैं इस हमले और दुखद परिणाम के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हूं.”

इससे पहले 15 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को भी संसदीय समिति के सामने सुनवाई के वक्त तगड़ी डांट सुननी पड़ी थी. जब उनसे पूछा गया कि बाइडन प्रशासन ने जिस पर ड्रोन हमला किया वो एड वर्कर था या ISIS-K गुट का आतंकी. तो उन्होंने कहा कि प्रशासन इस हमले की समीक्षा कर रहा है. सवाल पूछने वाले सीनेटर ने कहा कि ये समीक्षा तो ड्रोन हमले के पहले की जानी चाहिए थी.

जिसे विस्फोटक बताया वो पानी की बोतलें निकलीं

अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि विस्फोटक को सफेद टोयोटा सिडान के ट्रंक में लोड किया गया था, जिसे हेलफायर मिसाइल ने उड़ा दिया था. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने तब दावा किया था कि जिस कार को उड़ाया गया था उसमें विस्फोटक नहीं पानी की बोतलें थीं. अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि एक घनी आबादी वाले इलाके में एक अन्य विस्फोट किया गया, जहां हमला हुआ वहां पर शायद प्रोपेन गैस टैंक था. इसके साथ ही उन्होंने स्वीकारा कि कार चालक जेमारी अहमदी का इस्लामिक स्टेट से कोई संबंध नहीं था और वह एक अमेरिकी सहायता समूह के लिए लंबे समय से कार्य कर रहा था. मैकेंजी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने करीब 8 घंटे तक टोयोटा कोरोला को ट्रैक करने के बाद हमला शुरू किया और उसे एक खतरा माना. उन्होंने कहा कि उस वक्त 60 से ज्यादा खुफिया जानकारी मिली थी जिससे संकेत मिला कि हमला हो रहा है. उन्होंने कहा कि छह रीपर ड्रोन ने गाड़ी का पीछा किया था.

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड जे ऑस्टिन ने भी 29 अगस्त को अमेरिकी स्ट्राइक में 10 अफगान नागरिकों की मौत के लिए माफी मांगी. न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच रिपोर्ट के अनुसार 29 अगस्त को जिस वक्त अमेरिका द्वारा एयरस्ट्राइक किया गया था उस वक्त 43 साल के जेमारी अहमदी 1996 मॉडल की एक टोयोटा कोरोला कार चला रहे थे, जो हमले में नष्ट हो गई. इस एयरस्ट्राइक में जेमारी और 7 बच्चों सहित परिवार के 9 सदस्यों की मौत हो गई थी. अमेरिकी सेना का दावा था कि इस कार में विस्फोटक था.


वीडियो – तालिबान ने अपनी सरकार ने एक भी महिला क्यों शामिल नहीं की?

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