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भतीजे ने पहले ही बता दिया था कि पार्टी टूटेगी, लेकिन चाचा समझ नहीं पाए!

देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर महाराष्ट्र के सीएम बन गए हैं. शनिवार 23 नवंबर को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें सीएम पद की शपथ दिलाई. एनसीपी के अजित पवार डिप्टी सीएम बने हैं. उन्होंने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही है. वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि ये फैसला पार्टी का नहीं है. बीजेपी को समर्थन देना का फैसला एनसीपी का नहीं है. एनसीपी इस फैसले के साथ नहीं है. शरद पवार ने कहा कि अजित पवार ने पार्टी तोड़ दी. वहीं सरकार बनाने के बाद अजित पवार का बयान आया है. उन्होंने कहा कि मैंने स्थाई सरकार देने के लिए फैसला लिया है. मैंने शरद पवार को सबकुछ पहले बता दिया था. तीन दल मिलकर स्थिर सरकार नहीं बन सकते हैं. महीने से चर्चा चली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अजित पवार सीएम देवेंद्र फडणवीस के घर पर हैं.

अजीत पवार शरद पवार के भतीजे हैं. शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले उन्होंने अपने वॉट्सऐप नंबर पर स्टेटस लगाया है जिसमें उन्होंने लिखा कि पार्टी और परिवार टूट गया. मीडिया से बात करते हुए सुप्रिया सुले की आंखों में आंसू थे. उन्होंना कहा, ‘मैं जल्द ही सबकुछ बताऊंगी.

एनसीपी चीफ शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज़ है. मामला महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक स्कैम का है. अजित पवार और बाकी कई बड़े नाम इस कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर हुआ करते थे. अजित पवार पर आरोप लगते हैं कि जब गलत चीजें हो रही थीं. उस दौरान वो महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे. और उस पद का फायदा भी उन्होंने उठाया. बीजेपी को समर्थन देने के मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी जोड़कर देखा जा रहा है. अजित पवार बारामती से विधायक हैं. पिछले 52 सालों में यहां से विधायक की कुर्सी पर सिर्फ दो ही लोग बैठे हैं. और वो दोनों ही पवार परिवार से हैं. शरद पवार और अजित पवार. अब तक दोनों ही छह-छह बार विधायक रहे हैं. दोनों ने मिलाकर आठ बार कांग्रेस और चार बार एनसीपी के झंडे पर जीत हासिल की. शरद पवार 1967 से 1990 तक लगातार कांग्रेस से लड़ें और जीते. बाद में उनके उत्तराधिकारी के रूप में अजित पवार ने भी 2 बार कांग्रेस से चुनाव लड़कर जीत हासिल की. फिर शरद पवार कांग्रेस से अलग हो गए और एनसीपी बना ली. तबसे अब तक चार बार अजित पवार एनसीपी से यहां जीतते रहे थे. सेना या भाजपा में से कोई भी, कभी भी यहां जीत नहीं पाया था. अजित पवार लगातार सातवीं बार यहां से जीते हैं.

7 अप्रैल 2013 को आया अजित पवार का एक बयान बेहद चर्चा में रहा. पुणे के पास इंदापुर में एक फंक्शन में उन्होंने कहा था, “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” उनके इस बयान की काफी लानत-मलामत हुई. बाद में खुद अजित पवार ने इसके लिए माफ़ी मांगी थी. कहा था कि ये उनके जीवन की सबसे बड़ी ग़लती थी. 2014 लोकसभा इलेक्शंस के दौरान उन पर वोटर्स को धमकाने के आरोप भी लगे थे. कहा गया कि उन्होंने गांववालों को धमकी भी दी थी. बोला था कि अगर सुप्रिया सुले को वोट नहीं दिया तो वो गांववालों का पानी बंद कर देंगे.


जब भारत की संसद में लोकसभा है तो राज्यसभा की जरूरत क्यों पड़ी?

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