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इंडिया की फ्लाइट्स में जो अटेंडेंट हमें ग्लैमरस लगते हैं, वो लंदन के एक होटल को मंगते लगे

बच्चा पैदा होता है, तो नाल के ज़रिए मां से जुड़ा होता है. अंग्रेज़ी में नाल को अंबिलिकल कॉर्ड कहते हैं. मां से अलग होने पर इस नाल का एक सिरा बच्चे के तन पर बना रहता है और कुछ दिन बाद खुद गिर जाता है. फिर घर वाले नेम-धरम करके नाल का सिरा ज़मीन में गाड़ देते हैं. और बड़े-बुज़ुर्गों का कहना है कि आपकी नाल जहां गड़ी हो, आप उस जगह से कभी अलग नहीं हो सकते. कितने भी दूर चले जाएं, आपके अंदर आपका देस बना रहता है. कपड़े भले बदल जाएं, आपकी हरकतें नहीं बदलतीं.

बुजुर्ग लोग ये जो बोल गए हैं, वो वक्त की कसौटी पर कसी बात है. ताज़ा प्रूफ आया है लंदन से. वहां के हीथ्रो एयरपोर्ट के पास एक होटल है. इस होटल के स्टाफ ने शिकायत की है कि उनके यहां रुकने वाला एयर इंडिया का क्रू बफे का खाना टिफिन में भर ले जाता है! होटल वालों ने कुछ दिन देखा, फिर एयर इंडिया को एक मेल लिख दिया कि आपके कुछ क्रू मेंबर जब खाना खाने आते है, तो अपने साथ एक खाली डब्बा लाते हैं, इसमें बफे का खाना भर ले जाते हैं आप अपने लोगों को समझाएं.

फोटोःरॉयटर्स
सिंबॉलिक इमेज  (फोटोःरॉयटर्स)

एयर इंडिया के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (इन फ्लाइट सर्विस डिपार्टमेंट) ने फिर एक मेल अपने सभी फ्लाइट अटेंडेंट्स को भेजा. A buffet is not a takeaway टाइटल के साथ. ताकि जिन्हें एचआर टाइप के मेल पूरा पढ़ने में आफत आती है, वे पहली लाइन से ही मामला समझ जाएं. एयर इंडिया के इस वॉर्निंग नोट में कहा गया है कि लोग न सुधरे तो एयर लाइन को सख्त कार्रवाई करनी पड़ेगी. ऐसे क्रू मेंबर आगे से अंतरर्राष्ट्रीय रूट्स पर नहीं भेजे जाएंगे.

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा है कि वॉर्निंग नोट फर्ज़ी भी हो सकता है, क्योंकि असिस्टेंट जनरल मैनेजर रैंक के किसी अफसर को इस तरह का नोट भेजने की अथॉरिटी नहीं होती. लेकिन इस मामले की जांच करवाई जा रही है. 

पर ऐसा होता कायकू था?

एयर इंडिया के क्रू मेंबर कुछ और कहते हैं. उनका कहना है कि वॉर्निंग नोट आया है और ऐसा भी नहीं है कि एयर इंडिया के क्रू को होटल में लंच/डिनर बफे में खाने का लिहाज़ नहीं. मामला कुछ और है.टाइम्स ऑफ इंडिया  के हवाले से एक क्रू मेंबर ने अपना पक्ष रखा हैः

“जब हम सुबह 7.30 या फिर शाम 6.30 बजे लंदन पंहुचते हैं, तब घर छोड़े हुए हमें 14 से 15 घंटे हो चुके होते हैं. ऐसे में होटल जाकर हम पहले नींद पूरी करते हैं, क्योंकि 26 घंटों के अंदर हमें दोबारा ड्यूटी पर जाना होता है (पहले की तरह अब दो दिन का रेस्ट नहीं मिलता). इसलिए कुछेक क्रू मेंबर खाना टिफिन में ले आते थे, ताकि नींद पूरी होने पर अपने वक्त से खा सकें. सभी लोग ऐसा नहीं करते थे.

जो क्रू मेंबर कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, उनका हाल और बुरा है. उनकी तनख्वाह 60% तक कम होती है. और ऊपर से जिस होटल का ये मामला है, वहां रूम सर्विस से खाना मंगाने पर ज़्यादा पैसे देने होते हैं. खाने में भी सैंडविच वगैरह ही होता है, जो लोग कम पसंद करते हैं. कहीं और खाना हो, तो बहुत दूर जाना होता है. इसलिए कुछ लोग बफे का खाना टिफिन में रख लेते हैं.”

सही है. ये सफाई न भी आती तो भी अपने यहां तो किसी को ऑब्जेक्शन होना नहीं था. होटल से अपने हक का खाना ले जाने का बाकायदा रिवाज़ है हमारे यहां. टेबल पर नहीं खा पाए, तो पैक करवा कर ले जाते हैं. सौंफ मुट्ठी भरकर खाते हैं. और नाना प्रकार के संस्कार हैं हमारे. ये सात समंदर पार भी जारी रहा, सुन कर बाई-गॉड कलेजे को बहुत सुकून मिला.


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