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अफगानिस्तान में अब बिना 'सास-बहू' के चलेंगे टीवी सीरियल!

टीवी पर आप सीरियल देखें और उसमें सारे पुरूष दिखाई दें. पूरे शो में एक भी फीमेल कैरेक्टर दिखाई ना दे, ऐसे शो की कल्पना करना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन ये अफगानिस्तान में होने जा रहा है. अंग्रेजी अखबार बीबीसी की खबर के मुताबिक, तालिबान ने टीवी और न्यूज के लिए 8 पॉइंट्स की धार्मिक गाइडलाइंस जारी की है. इसके मुताबिक अफगानिस्तान में उन सभी टीवी शोज पर पाबंदी लगा दी है, जिनमें किसी भी प्रकार से महिला किरदारों को दिखाया जाता है. इसका मतलब ये है कि अफगानिस्तान में टीवी पर अब ना तो सास दिखाई देगी, ना बहू और ना ही कोई बेटी! सुनने में थोड़ा अजीब है, लेकिन ये सच है. बिना महिलाओं के टीवी सीरियल्स कैसे बनाये और दिखाए जाएंगे, ये देखना दिलचस्प होगा.

क्या हैं धार्मिक गाइडलाइंस?

इस्लाम पर आधारित इन गाइडलाइंस के अनुसार, महिला न्यूज ऐंकर और महिला संवाददाताओं के लिए हिजाब पहनना जरूरी है. साथ ही उन सभी विदेशी फिल्मों पर पाबंदी लगाई गई है, जिनमें इस्लाम धर्म या शरिया कानून को लेकर मज़ाक उड़ाया गया हो, प्रोफेट मोहम्मद को लेकर टिप्पणी की गई हो, या फिर किसी दूसरे धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचार किया गया हो.

इसमें महिलाओं के टीवी सीरियल्स में काम करने या दिखाई देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है. साथ ही फिल्मों में पुरुषों के अंग प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी गई है, पुरुषों के टीवी पर शर्ट उतारने को भी प्रतिबंधित किया गया है. इससे पहले तालिबान छोटी बच्चियों और लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी लगा चुका है.

पत्रकारों ने जताया विरोध!

अफगानिस्तान में पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था से जुड़े हुज्जतउल्ला मुजद्देदी के मुताबिक ये नियम अप्रत्याशित है. इनके लागू होने से टीवी शोज बनाने वाले लोगों को मजबूरन अपना व्यापार बंद करना पड़ सकता है.

ईरान और सऊदी अरब भी ज्यादा अलग नहीं?

ईरान एक ऐसा इस्लामिक मुल्क है, जहां महिलाओं को बिना हिजाब पहने बाहर जाने की इजाज़त नहीं है. डेली मेल की खबर के मुताबिक पिछले महीने ईरान ने नए सेंसरशिप नियमों को जारी किया था, जिनमें महिलाओं को टीवी पर पिज्जा खाते हुए या दस्ताने पहने हुए नहीं दिखाया जा सकता. इसके अलावा टीवी पर पुरूष द्वारा महिला को चाय परोसते हुए भी नहीं दिखाया जा सकता.  इसी साल फरवरी में ईरान के राष्ट्र प्रमुख अयातुल्ला अली खामेनेई ने टीवी पर दिखने वाले कार्टून में महिला किरदारों पर हिजाब लगाने का फ़रमान जारी कर दिया था, जिसपर कई महिला पत्रकारों और सामाजिक संस्थाओं ने विरोध जताया था.

सऊदी अरब में ‘इस्लामिक कोड्स ऑफ ड्रेस एण्ड बिहेवियर’ लागू है, जिसके अंतर्गत घर से बाहर महिलाओं का हिजाब पहनना जरूरी है. 2014 में इसके विरोध के चलते एक महिला ऐंकर ने बिना हिजाब के शो किया था, जिसको लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

बिना हिजाब के ऐंकरिंग करती महिला पत्रकार. तस्वीर-द इंडिपेंडेंट
बिना हिजाब के ऐंकरिंग करती महिला पत्रकार. तस्वीर-द इंडिपेंडेंट

मिस्र ने नजीर पेश की

मिस्र में न्यूज ऐंकर के हिजाब पहनना जरूरी नहीं है. अलजज़ीरा की खबर के मुताबिक, पिछले 50 सालों से चली आ रही इस परंपरा को 2012 में राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी ने खत्म कर दिया. यहां महिलाओं को अपनी मर्जी से न्यूज शो के दौरान हिजाब पहनने की इजाज़त दे दी गई. इसी के साथ फातमा नबील हिजाब के साथ टीवी पर खबर पढ़ने वाली पहली ऐंकर बनीं.

हिजाब पहन कर खबर पढ़तीं फातमा नबील. तस्वीर- अलजजीरा
हिजाब पहन कर खबर पढ़तीं फातमा नबील. तस्वीर- अलजज़ीरा

अफगानिस्तान में 1996 वाले दौर की वापसी?

इससे पहले साल 1996 में अफगानिस्तान में तालिबान ने इस तरह की गाइडलाइंस जारी की थी. उस वक्त महिलाओं को पूरी तरह से बुर्के में रहने का आदेश दिया गया था. महिलाओं को हाथ की कलाई, पैर का कोई भी हिस्सा दिखाई देने या अपने साथ किसी पुरूष को ना ले जाने पर बीच सड़क पर पीटा जाता था. कई मानवाधिकार संस्थाओं ने इन घटनाओं को लेकर विरोध जताया था.

अमेरिका की विदाई के बाद बनी सरकार

20 साल पहले अमेरिकी सेना ने तालिबान को अफगानिस्तान से उखाड़ फेका था, लेकिन पिछले साल सितंबर में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ते ही तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद कई दिनों तक देश में उथल-पुथल जैसी स्थिति रही, लोग देश छोड़ने के लिए कोई भी हद पार करने के लिए तैयार हो गए थे. लेकिन सरकार बनते ही तालिबान ने अपनी बदली हुई तस्वीर दुनिया को दिखाने की कोशिश की. हालांकि, महिलाओं के प्रति तालिबान के रवैये के चलते ये कोशिश बेकार साबित हो गई. तालिबान ने स्कूल से लेकर नौकरियों में महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए.


वीडियो- दुनियादारी: अफगानिस्तान के पूर्व वित्तमंत्री ने तालिबान की जीत की सच्चाई बता दी

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