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उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत के प्रधानों की ताकत सांसद-विधायकों से ज्यादा हो गई क्या?

उत्तर प्रदेश का गोरखपुर जिला. आमतौर पर इसकी 2 पहचान रही है – एक पहचान नाथ संप्रदाय के प्रसिद्ध तीर्थस्थल गोरखनाथ मंदिर की वजह से है, तो दूसरी पहचान पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय का यहां होना है. लेकिन वर्तमान में एक तीसरी पहचान भी है और वह पहचान राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले के रूप में है. नेताओं के साथ किसी जिले की जुड़ी इस तरह की पहचान अक्सर पक्षपात या विशेष कृपा के आरोपों को भी हवा देती रही है.

ताजा मामला यूपी में ग्राम पंचायतों को मिलने वाली परफार्मेंस ग्रांट से जुड़ा है. इसके तहत जिले की 37 ग्राम पंचायतों को कुल मिलाकर 300 करोड़ रुपए परफार्मेंस ग्रांट के रूप में मिले हैं. बताया जा रहा है कि यह रकम जिले को सांसद और विधायक फंड से मिलने वाली रकम से भी कई गुणा ज्यादा है. बताते चलें कि वर्तमान में सांसद क्षेत्रीय विकास निधि (MPLADS) का वार्षिक फंड प्रति सांसद 5 करोड़ रुपए है, जबकि उत्तर प्रदेश में विधायकों के लिए इस प्रकार के फंड की राशि प्रति विधायक 3 करोड़ रुपए है. ये दोनों फंड कोविड 19 से पैदा हालात के बीच फिलहाल सस्पेंड किए जा चुके हैं.

लेकिन यदि ये दोनों फंड चालू रहते तो इसके अंतर्गत गोरखपुर जिले को कुल 37 करोड़ रुपये प्राप्त होते. 37 करोड़ इसलिए क्योंकि गोरखपुर जिले में 2 संसदीय सीटें (5 करोड़ × 2) और 9 विधानसभा सीटें (3 करोड़ × 9) आती हैं. इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि जिले की 37 पंचायतों को बतौर परफार्मेंस ग्रांट मिलने वाली 300 करोड़ रुपये की रकम इन सांसद-विधायक फंड्स से काफी ज्यादा है.

क्या है यह परफार्मेंस ग्रांट?

परफार्मेंस ग्रांट मतलब प्रदर्शन के आधार पर एक्स्ट्रा पैसा दिया जाना. यानी कोई ग्राम पंचायत पिछले वित्तीय वर्ष में दिए गए पैसों से बढ़िया काम करती है, तो उस पंचायत को अगले वित्तीय वर्ष में मिलने वाले पैसों के साथ परफार्मेंस ग्रांट के रूप में कुछ और पैसा देना.

पंचायतों को परफार्मेंस ग्रांट देने की सिफारिश एन के सिंह की अध्यक्षता वाले 15वें वित्त आयोग ने की थी. 15वें वित्त आयोग की इस सिफारिश से उत्तर प्रदेश के राज्य वित्त आयोग ने भी अपनी सहमति जताई थी. तब जाकर राज्य सरकार ने राज्य के उम्दा परफार्मेंस करने वाले चुनिंदा ग्राम पंचायतों को परफार्मेंस ग्रांट देना शुरू किया.

इसी परफार्मेंस ग्रांट के तहत अब मुख्यमंत्री के गृह जिले गोरखपुर की इन 37 पंचायतों को इतनी बड़ी रकम थमाई जा रही है. सबसे ज्यादा 25.53 करोड़ रुपया जंगलरानी सुहास कुंवारी ग्राम पंचायत को दिया गया है, जबकि दूसरे नंबर पर भेउसा उर्फ बनकटा ग्राम पंचायत है, जिसे 18.62 करोड़ मिले हैं. सबसे कम 3.01 करोड़ मरचा ग्राम पंचायत को मिले हैं. अपराध पर लगाम लगाने के मकसद से अपने इलाके में CCTV कैमरा लगवाने वाले छितौना ग्राम पंचायत को भी 3.53 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

गोरखपुर जिले की छितौना पंचायत ने अपने इलाके में CCTV कैमरा लगवाया है. फ़ोटो क्रेडिट : ANI
गोरखपुर जिले की छितौना पंचायत ने अपने इलाके में CCTV कैमरे लगवाए है. फ़ोटो क्रेडिट : ANI

परफार्मेंस ग्रांट पर सवाल क्यों?

परफार्मेंस ग्रांट के नाम से ही स्पष्ट है कि इसे पंचायतों के प्रदर्शन के आधार पर दिया जाता है. यानी जहां के ग्राम प्रधानों ने बढ़िया काम किया है, उनकी पंचायतें इस ग्रांट को पाने की हकदार हैं. लेकिन न्यूज वेबसाइट jagran.com के मुताबिक ग्रांट पाने वाली कई पंचायतें ऐसी है जिन पर पिछले वित्तीय वर्ष का 50-50 लाख तक रुपया बिना खर्च हुए ऐसे ही पड़ा है. ऐसे में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जिन पंचायतों ने पिछले साल का ही पूरा पैसा ही खर्च नहीं किया, उन्हें उनकी किस परफार्मेंस के आधार पर परफार्मेंस ग्रांट दिया गया है?

उत्तर प्रदेश में 15 से 29 अप्रैल के बीच पंचायत चुनाव भी होने हैं. ऐसे में चुनाव से पहले परफार्मेंस ग्रांट जारी किए जाने के मामले को किस रूप में देखा जाएगा – यह तो आनेवाला समय ही बताएगा.


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