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आप Nokia को 'मरा' समझते रहे, जबकि इसके बिना आपका फोन 'जिंदा' नहीं होता!

Nokia हर उस मॉडर्न स्मार्टफोन पर हमसे छिपा हुआ टैक्स वसूल रही जो आप चला रहे. इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि आपके पास किस कंपनी का डिवाइस है. आईफोन है या सैमसंग. Vivo है या Oppo. Realme या Redmi. हर डिवाइस पर 'लगान' वसूला हो रहा.

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Nokia की टैक्स वसूली.

आज हम Nokia की बात करेंगे. हां पता है, आप कहोगे ‘नोकिया जिंदा भी है क्या?’ जनाब जिंदा ही नहीं बल्कि हमसे टैक्स भी वसूल रही है. कौन सा टैक्स? वो क्या टैक्स वसूलेंगे क्योंकि उनका तो डिब्बा गुल है. जनाब यही तो हमारी गलतफहमी है. नोकिया हर उस मॉडर्न स्मार्टफोन पर हमसे छिपा हुआ टैक्स वसूल रही जो आप चला रहे. इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि आपके पास किस कंपनी का डिवाइस है. आईफोन है या सैमसंग. Vivo है या Oppo. Realme या Redmi. हर डिवाइस पर 'लगान' वसूली हो रहा.

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अब नोकिया ऐसा कैसे करती है वो बताने से पहले जरा ये जान लेते हैं कि आज हम इसकी चर्चा क्यों कर रहे. दरअसल कुछ दिनों पहले नोकिया ने 14 हजार कर्मचारियों को निकालने की बात कही तो सोशल मीडिया गरमा गया. लोग पूछने लगे कि इनके पास इतने कर्मचारी हैं भी सही? इनके फोन तो बंद हो गए तो ये क्या बनाते हैं? फोन बंद हुए हैं, कंपनी नहीं. फोन का बिजनेस तो ऊंट के मुंह में जीरे जैसा था. अब 'ऊंट' क्या करता है, वो जान लीजिए.

फोन की टावर से बात करवाता है

दुनिया के सबसे खुशहाल देश फिनलैंड से आने वाली नोकिया एक मोबाइल बनाने वाली कंपनी से पहले एक नेटवर्क कंपनी है. 1920 के दशक से टेलीफोन बनाने से सफर स्टार्ट हुआ जो 50 के दशक में ट्रांजिस्टर बनाने तक पहुंचा. 60 के दशक में सेटेलाइट और 80 के दशक में इंटरनेट के तार बिछाने का काम यही कंपनी करती रही है.

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आज की तारीख में फोन के टावर से लेकर 4G, 5G मॉडम भी यही कंपनी बनाती है. आने वाले सालों में हम जब 6G के युग मे दाखिल होंगे तो भी उसका फीता नोकिया ही काटने वाली है. आपके फोन का सिग्नल जब टावर से कनेक्ट होता है तो वो नोकिया के मॉडम से होकर जाता है, भले कंपनी कोई सी भी हो. कुछ सालों पहले चीनी Oppo & Vivo ने इसको बायपास करने की कोशिश की तो कंपनी ने उनके ऊपर केस ठोक दिया. फैसले के बाद अब दोनों को हर डिवाइस बेचने पर नोकिया को रॉयल्टी देनी पड़ती है.  

नोकिया के पास फिलहाल 20 हजार से ज्यादा टेक्नोलॉजी पेटेंट हैं. कंपनी का नेटवर्क के इलाके में इतना दबदबा है कि उसे “The Idea Factory” भी कहा जाता है. इतना बता दिया तो ये भी जान लीजिए कि स्मार्टफोन को लेकर इनके सीईओ का क्या कहना है.

कंपनी के पूर्व सीईओ Pekka Lundmark का मानना है कि साल 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी शुरू हो चुकी होगी, लेकिन तब तक स्मार्टफोन 'कॉमन इंटरफेस' नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि 6G के आने से पहले ही लोग स्मार्टफोन की तुलना में स्मार्ट ग्लासेज और दूसरे डिवाइस को यूज करने लगेंगे. ये सब बातें उन्होंने 2022 में कहीं थीं.

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आज 2026 है और एलन मस्क की Neuralink का ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस सिस्टम कई मरीजों के दिमाग में फिट हो चुका है. एक चिप जो दिमाग में लगी है और उसके इशारे से सब काम हो रहे. Meta Ray-Ban ग्लास के दो वर्जन मार्केट में आ चुके हैं. अभी 2030 में 4 साल बाकी हैं. इसलिए नोकिया को एक्सपर्ट ने कभी ‘No नहीं kia’. 

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