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EMI बाउंस होने पर भी लोन वाला फोन चलेगा चकाचक, लेकिन गरारी यहां रहेगी फंसी!

RBI के नए प्रपोजल के मुताबिक ईएमआई बाउंस होने या लोन डिफ़ॉल्ट होने पर फोन लॉक (Banks Can't Disable Mobile Phones)तो नहीं होगा मगर फोन के कई सारे फीचर्स ब्लॉक हो सकते हैं. बैंक ग्राहक के मोबाइल या टैबलेट को वसूली का साधन भी नहीं बना पाएंगे.

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लोन वाला फोन लॉक नहीं होगा

लोन पर लिया हुआ फोन ब्लॉक नहीं होगा. आरबीआई के नए प्रपोजल के मुताबिक बैंक या फाइनेंस करने वाले मोबाइल को डिसेबल (financiers can not block phones) नहीं कर पाएंगे. अरे-अरे आप कहां चल दिए. फोन लेने. रुकिए तो जरा, ठहरिए तो जरा. पूरी बात तो समझ लीजिए. आरबीआई ने क्या प्रपोजल दिया है. इसके पहले सितंबर में क्या कहा था. दरअसल सितंबर 2025 में आरबीआई ने प्रपोजल दिया था कि अगर स्मार्टफोन की EMI अगर बाउंस हुई तो फोन लॉक हो जाएगा. मतलब फोन सिर्फ पेपरवेट बनाने के काम ही आएगा. ईएमआई बाउंस चार्ज तो लगेंगे ही. लेकिन, 

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आरबीआई के नए प्रपोजल के मुताबिक ईएमआई बाउंस होने या लोन डिफ़ॉल्ट होने पर फोन लॉक तो नहीं होगा मगर फोन के कई सारे फीचर्स ब्लॉक हो सकते हैं. बैंक ग्राहक के मोबाइल या टैबलेट को वसूली का साधन भी नहीं बना पाएंगे. सोशल मीडिया या किसी और तरीके से धमकी भी नहीं चलेगी. 

फोन या टैबलेट अब ‘वसूली भाई’ नहीं बनेगा

आरबीआई के नए प्रपोजल के मुताबिक, कोई भी बैंक EMI पर मोबाइल या टैबलेट में किसी भी फीचर को बंद करने या डिसेबल करने के लिए कोई ऐप या तकनीक इंस्टाल नहीं करेगा. माने अगर ईएमआई नहीं भरी तो मोबाइल की स्क्रीन को रिमाइन्डर या धमकी देने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जैसा अभी तक कई केस में देखा गया है.

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एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक बैंक या मोबाइल फाइनेंस करने वाली एजेंसी को मोबाइल के कुछ फीचर ब्लॉक करने का जुगाड़ मिलेगा लेकिन वो भी तब जब लोन डिफ़ॉल्ट हुए 90 दिन से ज्यादा हो गए हों. मोटा-माटी तीन ईएमआई बाउंस होने के बाद. इसके बाद मोबाइल फोन की आउटगोइंग जरूर बंद की जा सकती है. हालांकि ये अभी साफ नहीं है मगर प्रपोजल के मुताबिक, इनकमिंग कॉल्स, एसएमएस, इंटरनेट, इमरजेंसी मैसेज और सरकारी मैसेज को ब्लॉक नहीं किया जा सकता है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आउटगोइंग कॉल ही ब्लॉक होगी.

बैंक को मिलेगा सिर्फ एक घंटा

ग्राहक ने अगर ईएमआई भर दी तो बैंक को एक घंटे के अंदर सारे फीचर्स अनब्लॉक करना होंगे. अगर ऐसा नहीं किया तो 250 रुपये घंटे के हिसाब से बैंक को पेनाल्टी लगेगी. ड्राफ्ट के मुताबिक बैंक को ऋण बकाया की वसूली के लिए अपने कर्मचारी/वसूली एजेंट द्वारा उधारकर्ता/गारंटीधारक को किए गए कॉल के समय और संख्या का पूरा लेखा-जोखा भी रखना पड़ेगा.

हालांकि जैसे हमने पहले ही कहा, ये अभी एक प्रपोजल है. आरबीआई ने ग्राहक और बैंक के बीच एक बैलेंस बनाने की कोशिश की है. वैसे हमारी आपको सलाह होगी कि लोन चाहे फोन का हो या घर या कार या कोई और, ईएमआई एकदम टेम से भरिए. 

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