अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप को मारने की साजिश की जा रही थी? ये आरोप किसी और पर नहीं बल्कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से ट्रेनिंग लेने वाले एक शख्स पर लगे हैं. बताया गया कि शख्स ने इवांका की हत्या का प्लान बनाया था. आरोपी शख्स इराक का नागरिक बताया जा रहा है, जिसे तुर्किए से गिरफ्तार कर लिया गया है.
इराक का ये शख्स डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका को क्यों मारना चाहता था? IRGC ने दी थी ट्रेनिंग
साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. कासिम सुलेमानी ईरान की कुद्स फोर्स का चीफ था और उसे ईरान में बेहद ताकतवर और असरदार सैन्य नेता के तौर पर देखा जाता था. 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिका ने ड्रोन से हमले किए थे. इस दौरान हमले में कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी.


कौन है आरोपी?
इवांका की हत्या का प्लान बनाने वाले शख्स की पहचान 32 साल के मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी के तौर पर हुई है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस इराकी नागरिक को हाल ही में तुर्किए से अमेरिका लाया गया है. आरोपी को 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया था, जो ट्रंप की बेटी इवांका को मारना चाहता था. अब जानते हैं कि इवांका को मारने की पीछे की वजह क्या थी?
दरअसल, साल 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. कासिम सुलेमानी ईरान की कुद्स फोर्स का चीफ था और उसे ईरान में बेहद ताकतवर और असरदार सैन्य नेता के तौर पर देखा जाता था. 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिका ने ड्रोन से हमले किए थे. इस दौरान हमले में कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. इस हमले के वक्त डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे.

रिपोर्ट के मुताबिक, अल-सादी सुलेमानी को अपना गुरु मानता था और इसी वजह से वो सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था. कहा ऐसा भी जाता है कि उसने अपने साथियों से कहा था कि ‘ट्रंप ने हमारा घर जलाया है. अब हमें ट्रंप का घर जलाना होगा.’ लेकिन कहानी यहीं तक नहीं रुकती. तुर्किए से जब अल-सादी को पकड़ा गया, तब उसके पास से इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा वाले घर का ब्लूप्रिंट बरामद किया गया था. यानी घर के हर एक कोने के बारे में पूरी जानकारी उसके पास थी. इवांका और उनके पति जारेड कुशनर फ्लोरिडा के इसी घर में रहते हैं, जिसकी कीमत करीब 24 मिलियन डॉलर (229.51 करोड़) बताई जाती है.

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 2021 में अल-सादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मैप भी पोस्ट किया था. उस मैप में फ्लोरिडा का वही इलाका दिखाया गया था, जहां इवांका रहती हैं. पोस्ट के कैप्शन में उसने लिखा था,‘बदला सिर्फ वक्त की बात है.’ इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अरबी में लिखे गए एक दूसरे मैसेज में उसने कहा था,
अमेरिकियों, इस तस्वीर को देखो और समझ लो कि तुम्हारे महल और सीक्रेट सर्विस भी तुम्हें नहीं बचा पाएंगे. हम अभी निगरानी और एनालिसिस के दौर में हैं.

वाशिंगटन में मौजूद इराकी एंबेसी के पूर्व सैन्य अधिकारी इंतिफाध कनबर ने अखबार को बताया कि अल-सादी लोगों से कहता फिरता था कि ‘हमें इवांका को मारना होगा ताकि ट्रंप का घर वैसे ही जले, जैसे उसने हमारा घर जलाया.’
हालांकि, रिपोर्ट में ये साफ तौर पर नहीं लिखा गया है कि उसने खासतौर पर इवांका को ही निशाना क्यों बनाया. इवांका ट्रंप ने 2009 में जारेड कुशनर से शादी से पहले ऑर्थोडॉक्स यहूदी धर्म अपना लिया था. उनके तीन बच्चे हैं. हाल के दिनों में कुशनर ट्रंप प्रशासन में ईरान से जुड़े शांति के प्रयासों में अहम भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, अल-सादी कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है. उस पर आरोप है कि मार्च 2026 में एम्स्टर्डम में बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन की बिल्डिंग पर हुए बम हमले में उसका हाथ था.

इसके अलावा, अप्रैल में लंदन में दो यहूदियों पर चाकू से हमला और इसी साल टोरंटो में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हुई फायरिंग में भी उसका नाम सामने आया है. अल-सादी सिर्फ IRGC से ही नहीं जुड़ा था, बल्कि वो कताइब हिज्बुल्लाह नाम के इराकी शिया पैरामिलिट्री ग्रुप का भी मेंबर था. इस संगठन को अमेरिका आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है. इन ग्रुपों को ईरान समर्थित माना जाता है.
अल-सादी का जन्म बगदाद में हुआ था. उसकी परवरिश ज्यादातर उसकी इराकी मां ने की. उसके पिता अहमद काजमी ईरान के ब्रिगेडियर जनरल थे. कम उम्र में ही उसे तेहरान भेज दिया गया, जहां उसने IRGC के साथ ट्रेनिंग ली. IRGC सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है और ईरानी सेना से अलग काम करता है.
2006 में उसके पिता की मौत हो गई. इसके बाद कासिम सुलेमानी ने उसे सहारा दिया. दोनों काफी करीब आ गए. अल-सादी सुलेमानी को पिता जैसा मानने लगा था. फिर 2020 में जब अमेरिकी हमले में सुलेमानी मारा गया, तो अल-सादी पूरी तरह टूट गया. दावा किया जा रहा है कि यहीं से इवांका ट्रंप को निशाना बनाने की कथित साजिश शुरू हुई.
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