Amazon Prime Video पर साल के 1,499 खर्च करने के बाद भी विज्ञापन देखने पड़ते हैं. अगर विज्ञापन फ्री मौज लेनी है तो प्लेटफॉर्म 699 रुपये और मांगता है. 17 जून 2025 से कंपनी ने अपनी नियम और शर्तों में बदलाव किया और अब प्रीमियम प्लान होने पर भी विज्ञापन देखने पड़ते हैं. आम आदमी क्या ही कर सकता है. ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर अपनी खीज निकाल सकता है. लेकिन एक वकील इसके लिए कंपनी को कोर्ट (Consumer Commission) में घसीट सकता है. कोर्ट ने 9,499 रुपये का मुआवजा भी ले सकता है.
अमेजन प्राइम ने 1499 रुपये लेकर भी दिखाए ऐड, अब कोर्ट ने कस्टमर को छह गुना पैसा दिलाया
वकील कोंधोबा राजेश ने 11 मई 2025 को 1,499 रुपये में अमेज़न प्राइम की वार्षिक सदस्यता ली गई थी. सब सही चल रहा था लेकिन 17 जून 2025 को कंपनी ने अपनी नीतियों में बदलाव किया और फिर प्रीमियम प्लान में भी विज्ञापन दिखने लगे. राजेश कोर्ट पहुंचे जिसका फैसला अब आया है.

हैदराबाद के एक उपभोक्ता आयोग ने अमेज़न प्राइम वीडियो को निर्देश दिया है कि वह एक सब्सक्राइबर को 9,499 रुपये का भुगतान करे. अदालत ने पूरे सब्सक्रिप्शन शुल्क की रिफंड राशि के साथ-साथ 5,000 रुपये का मुआवजा और 3,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है.
प्राइम वीडियो में विज्ञापन दिखाने का मामलाइकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद के रहने वाले और पेशे से वकील कोंधोबा राजेश ने 11 मई 2025 को 1,499 रुपये में अमेज़न प्राइम की वार्षिक सदस्यता ली गई थी. सब सही चल रहा था लेकिन 17 जून 2025 को कंपनी ने अपनी नीतियों में बदलाव किया और फिर प्रीमियम प्लान में भी विज्ञापन दिखने लगे. अब जो विज्ञापन नहीं देखना तो साल के 699 रुपये और दो. जब उन्होंने कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करके या तो पुरानी सेवा बहाल करने या मेंबरशिप फीस रिफंड करने की मांग की, तो प्लेटफॉर्म ने दोनों अनुरोधों को ठुकरा दिया और केवल आनुपातिक (Proportionate) रिफंड की पेशकश की.
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राजेश को ये बात एकदम पसंद नहीं आई और उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. शिकायत और दस्तावेजों के अनुसार, इस सब्सक्रिप्शन में मोबाइल फोन, टेलीविजन और लैपटॉप पर 12 महीनों तक बिना किसी विज्ञापन (Ad-free) के प्राइम वीडियो कंटेंट देखने की सुविधा शामिल थी. राजेश का आरोप है कि शुरुआत में यह सेवा बिना विज्ञापनों के काम कर रही थी, लेकिन 17 जून 2025 को उनकी मेंबरशिप सक्रिय (Active) होने के बावजूद इसमें बदलाव कर दिया गया. इसके अलावा, उनसे यह भी कहा गया कि बिना विज्ञापनों के कंटेंट देखना जारी रखने के लिए उन्हें अलग से 699 रुपये का भुगतान करना होगा.
उपभोक्ता आयोग का फैसलाकोर्ट में बी. उमा वेंकता सुब्बा लक्ष्मी (अध्यक्ष), सी. लक्ष्मी प्रसन्ना और बी. राजी रेड्डी (सदस्य) की बेंच ने मामले की सुनवाई की और आयोग ने पाया कि वार्षिक सदस्यता चालू रहने के दौरान ही विज्ञापन पेश किए गए थे, न कि सब्सक्रिप्शन समाप्त होने पर या रिन्यूअल के वक्त. अमेज़न यह साबित नहीं कर पाया कि सब्सक्रिप्शन खरीदते समय ग्राहक को यह बताया गया था कि भुगतान की गई अवधि के दौरान विज्ञापन-मुक्त (Ad-free) देखने की सुविधा वापस ली जा सकती है या इसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है.
अमेज़न आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ और न ही कोई लिखित जवाब दाखिल किया. इस वजह से शिकायतकर्ता के दस्तावेज और तर्क बिना किसी खंडन के सही माने गए. आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि चालू विज्ञापन-मुक्त सदस्यता अवधि के दौरान विज्ञापन दिखाना और उस सुविधा को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त भुगतान मांगना 'सेवा में कमी' और 'अनुचित व्यापार प्रथा' है.
आयोग ने प्लेटफॉर्म को कुल 9,499 रुपये लौटाने का आदेश दिया है. इसमें वार्षिक सदस्यता शुल्क 1,499, मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा 5,000, मुकदमे की लागत 3,000 रुपये शामिल है. अमेज़न को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है.
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