पिछले 24 घंटों में आप PHP, eMudhra जैसे शब्दों से थोड़ा बहुत तो परिचित हो ही चुके होंगे. जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Sanae Takaichi) से लेकर एफ़बीआई इसके बारे में दुनिया को आगाह कर रहे हैं. शॉर्ट में बताएं तो PHP यानी दुनिया की कई वेबसाइट के बेस में खामी निकली है. पैन कार्ड से लेकर दूसरे डिजिटल प्रमाणपत्र देने वाली eMudhra यानी इंडियन सर्टिफिकेट अथॉरिटी में भी कुछ कनेक्शन मिले हैं.
इंटरनेट की दुनिया अब सेफ नहीं? Railway ऐप, PHP-eMudhra तक में सेंधमारी
गुजरे 24 घंटे इंटरनेट और साइबर सिक्योरिटी की दुनिया के लिए बहुत भारी रहे हैं. PHP ने एक तरफ जापान से लेकर अमेरिका और यूरोप को हिलाया तो eMudhra ने इंडियन एक्सपर्ट की नींद हराम की. लेकिन इसके अलावा भी दुनिया भर में कई क्लाउड सर्विस का डेटा लीक हुआ. WhatsApp Web का सर्वर बनाने वाले भी हैक हुए.

हालांकि दोनों ही मामलों में समय रहते एक्सपर्ट ने काबू पा लिया और कोई कांड नहीं हुआ. लेकिन पिछले 24 घंटे में इंटरनेट और साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में बस यही नहीं घटा है.
ऐसी कई छोटी-मोटी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने सबका ध्यान खींचा है. सरकारी वेबसाइटें ऑफलाइन हो गई हैं, डेटा के खतरे में होने की आशंका है. दिलचस्प बात ये है कि ये सब उस महीने में हो रहा है जिसे 'साइबर सुरक्षा जागरूकता माह' (साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ) के तौर पर मनाया जाता है.
ये इंडियन रेलवे नहीं बल्कि एक क्लाउड प्लेटफॉर्म है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाउड प्लेटफॉर्म रेलवे ने बुधवार को बताया कि उसके सिस्टम में भी सेंधमारी हुई. कुछ अनाधिकृत थर्ड पार्टी हैकर्स ने उसके सिस्टम से कस्टमर्स का डेटा, मसलन नाम, यूजर आईडी, और दूसरे डेटा को चुराने की कोशिश की. कंपनी के शुरुआती आकलन से पता चला कि इसका असर केवल कुछ यूजर्स तक ही होगा. लेकिन उसने अपने सभी ग्राहकों को सिस्टम अपडेट करने को कहा है.
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बुधवार को, Node.js ने सुरक्षा अपडेट जारी किए, जिनमें चार गंभीर कमजोरियों को ठीक किया गया. इनमें से एक के ज़रिए हैकर्स सिस्टम पर दूर से ही कोड चला सकते थे. जानकारी के लिए बताते चलें कि Node.js एक ओपन-सोर्स क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म और JavaScript रनटाइम एनवायरनमेंट है. इसे मुख्य रूप से ब्राउज़र के बाहर, यानी सर्वर साइड पर JavaScript कोड को चलाने के लिए बनाया गया है. इसका उपयोग वेब सर्वर बनाने के लिए किया जाता है. चैट ऐप्स (जैसे WhatsApp Web), ऑनलाइन गेमिंग और लाइव स्ट्रीमिंग ऐप्स बनाने के लिए भी इसका ही इस्तेमाल होता है. मोबाइल और वेब ऐप्स के लिए बैकएंड API तैयार करने के लिए भी इसकी जरूरत होती है.
LiteLLM पर ‘भारी’ खतराएक हैकर ने LiteLLM में मैलिशियस कोड डाल दिया, जिससे सिस्टम की जानकारी, ब्राउज़र डेटा, डेवलपर्स के सीक्रेट्स, क्लाउड क्रेडेंशियल्स और AI टूल्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ऑथेंटिकेशन फ़ाइलों के चोरी होने का खतरा पैदा हो गया है. इस मैलवेयर ने किसी एप्लिकेशन द्वारा LiteLLM को इम्पोर्ट करने का इंतज़ार करने के बजाय, पायथन स्टार्टअप हुक्स का इस्तेमाल किया. यानी, कोई अन्य पायथन कमांड भी इस मैलवेयर को सक्रिय कर सकती थी, भले ही LiteLLM को कभी सीधे तौर पर न खोला गया हो.
LiteLLM भी एक ओपन-सोर्स पाइथन लाइब्रेरी और प्रॉक्सी सर्वर है, जिसका इस्तेमाल कई लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) जैसे OpenAI या गूगल LLM में किया जाता है. बोले तो आपके चैट बॉट को बड़े काम करने से पहला ककहरा सिखाने के लिए. LiteLLM ने बताया कि उसने नुकसान पहुंचाने वाले रिलीज़ और इमेज को हटा दिया है. उसने अपने यूजर्स को सिस्टम अपडेट करने की सलाह दी है.
माइक्रोसॉफ्ट ने चेतावनी दी है कि चीन से जुड़े एक हैकिंग ग्रुप ने दुनिया भर की सैकड़ों कंपनियों को निशाना बनाने के लिए AI-आधारित टूल का इस्तेमाल किया है. माइक्रोसॉफ्ट इस ग्रुप को ‘Storm-0940’ के नाम से ट्रैक करती है. बताया गया कि एआई टूल के चलते हैकर्स तीन घंटे से भी कम समय में क्लाउड नेटवर्कों के अंदर तक घुसने में कामयाब भी हो गए थे.
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