प्रोजेक्ट चीता के पीछे की अनकही कहानी जानिए. नामीबिया से चीते लाने के लिए भारत को किन कूटनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा? ईरान के बजाय नामीबिया क्यों चुना गया और चीतों का चयन कैसे हुआ? प्रशांत अग्रवाल ने ‘किताबवाला’ में लल्लनटॉप के धनंजय से इन सवालों पर बात की. क्या बातें हुईं, और क्या राज खुले, जानने के लिए देखिए किताबवाला का ये एपिसोड.
प्रोजेक्ट चीता: दो घंटे तक किसने रोक दिया था प्लेन? एयरपोर्ट पर ही मर जाते सारे चीते!
70 साल बाद भारत में चीतों की वापसी सिर्फ वन्यजीव संरक्षण का मिशन नहीं, बल्कि लंबी कूटनीतिक बातचीत, वैज्ञानिक चयन और मुश्किल फैसलों की कहानी भी है. नामीबिया में भारत के पूर्व उच्चायुक्त प्रशांत अग्रवाल ने अपनी किताब में इस पूरे मिशन के पर्दे के पीछे की कहानी दर्ज की है.
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