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AI उतना अच्छा काम नहीं कर पा रहा... इस बड़ी कंपनी ने लोगों को फिर नौकरी पर बुलाया

अमेरिकी कार निर्माता कंपनी ने पिछले तीन सालों में लगभग 350 अनुभवी इंजीनियरों को फिर से काम (ford rehiring quality inspectors after ai fell short) पर रखा है. इनमें कंपनी के पुराने कर्मचारी और सप्लायर कंपनियों के एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं. यह कदम तब उठाया गया जब कंपनी के AI-पावर्ड और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाए.

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Ford के लिए AI-पावर्ड और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाए

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  • फोर्ड कंपनी ने अपने AI आधारित क्वालिटी सिस्टम के प्रदर्शन में कमी के कारण लगभग 350 अनुभवी इंजीनियरों को पुनः भर्ती करने का निर्णय लिया है।
  • फोर्ड के AI और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाने के कारण कंपनी ने पुराने कर्मचारियों और सप्लायर एक्सपर्ट्स को वापस बुलाया है।
  • इस पुनः भर्ती से फोर्ड को JD पावर क्वालिटी सर्वे में बेहतर रैंकिंग प्राप्त हुई और उत्पाद की लागत में कमी आई है।

सोमवार की सुबह आपको एक अच्छी खबर बताते हैं. अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, ऊबर वाली लिस्ट में अब कार कंपनी Ford का नाम (ford rehiring quality inspectors after ai fell short) भी जुड़ गया है. फोर्ड अपने अनुभवी इंजीनियरों (जिनमें कुछ पुराने कर्मचारी भी शामिल हैं) को वापस काम पर बुला रही है, क्योंकि उसके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाए. इसके पहले Uber ने भी एआई पर जितना पैसा लगाया, उसके हिसाब से कंपनी को कोई फायदा नहीं हो रहा था. माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने कर्मचारियों से एआई का कम इस्तेमाल करने को कहा है क्योंकि खर्चा बहुत हो रहा है.

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AI से कार नहीं चली

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कार निर्माता कंपनी ने पिछले तीन सालों में लगभग 350 अनुभवी इंजीनियरों को फिर से काम पर रखा है. इनमें कंपनी के पुराने कर्मचारी और सप्लायर कंपनियों के एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं. यह कदम तब उठाया गया जब कंपनी के AI-पावर्ड और ऑटोमेटेड क्वालिटी सिस्टम उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पाए. कंपनी का कहना है कि टीम में इंसानों को फिर से शामिल करने का फ़ायदा मिल रहा है. इससे फ़ोर्ड को JD पावर के हालिया 'इनिशियल क्वालिटी सर्वे' में मुख्यधारा के ब्रांड्स में टॉप पर पहुंचने में मदद मिली है और साथ ही लागत भी कम हुई है.

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क्या AI का गियर डाउन हुआ

नहीं एकदम नहीं. एआई बिला शक कमाल की चीज है, मगर टेक कंपनियां उसको बंदर के हाथ में उस्तरे के जैसे इस्तेमाल कर रही हैं. ना सोचा, ना समझा, बस हर जगह एआई घुसेड़ दिया. कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट चार्ल्स पून ने ब्लूमबर्ग को बताया, 

"हमने गलत सोच लिया था कि सिर्फ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने और हमारे पास मौजूद डिज़ाइन की ज़रूरतों को उसमें डालने से ही एक बेहतरीन क्वालिटी वाला प्रोडक्ट बन जाएगा"

उन्होंने आगे कहा कि AI "एक ​​शानदार टूल" है, लेकिन "यह उतना ही अच्छा काम करता है जितनी अच्छी जानकारी का इस्तेमाल इसे ट्रेन करने के लिए किया जाता है.

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दाल में धनिया है एआई

एआई का इस्तेमाल आपके काम को और अच्छा करने के लिए किया जा सकता है, मगर इसे इंसान या सिस्टम से रिप्लेस करने का कोई तुक नहीं. जैसे दाल में अगर ऊपर से धनिया डाल देने से उसका स्वाद बढ़ जाता है लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि धनिया में दाल डाल दो. ऐसा ही मामला एआई का है. अच्छे से इस्तेमाल करेंगे तो वाकई काम आएगा.

हाल ही में इसका एक उदाहरण देखने को मिला जब AI चैटबॉट ने अदालत में इंसानी वकील को हराकर केस जीत लिया. तीन घंटे की बहस के बाद एआई चैटबॉट ने अदालत में असली वकील को हराकर लगभग 7,000 पाउंड (8.79 लाख रुपये) का केस जीत लिया.

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