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लोगों की जॉब छीन AI को काम सौंपा, अब खर्चा देख कंपनियों के हाथ-पैर फूल रहे

Uber का साल भर का AI बजट सिर्फ चार महीने में खत्म हो गया. अब उसके सीओओ को समझ (AI Investment Is ‘Harder to Justify) नहीं आ रहा कि क्या करें. माइक्रोसॉफ्ट भी अपने कर्मचारियों से एआई का कम इस्तेमाल करने के लिए कह रहा क्योंकि खर्च ज्यादा हो रहा है.

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27 मई 2026 (पब्लिश्ड: 01:59 PM IST)
(AI Investment Is ‘Harder to Justify)
टेक कंपनियों का एआई खर्चा लिमिट से ज्यादा हो रहा है
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Uber के COO Andrew Macdonald को समझ ही नहीं आ रहा है कि उन्होंने अपनी कंपनी में जो पैसा AI पर लगाया, वो सही था या आधा सही. दरअसल कंपनी का 2026 का पूरा एआई बजट सिर्फ चार महीने (AI Investment Is Harder to Justify) में खत्म हो गया है. एआई पर कंपनी ने जितना पैसा लगाया, उसके हिसाब से कंपनी को कोई फायदा नहीं हो रहा है. माइक्रोसॉफ्ट भी कुछ ऐसी समस्या से जूझ रहा है. उसने अपने कर्मचारियों से एआई का कम इस्तेमाल करने को कहा है क्योंकि खर्चा बहुत हो रहा है. माने जिस खर्चे को बचाने के लिए कंपनियों ने कर्मचारी निकाले और उसके बदले एआई को रखा, वो अब हाथी पालने जैसे हो गया है.

क्या एआई का फुग्गा फूट गया है

एकदम नहीं क्योंकि अब फुग्गे में हवा ही पूरे तरीके से नहीं भरी गई तो फूटेगा कैसे. एआई बिला शक कमाल की चीज है मगर टेक कंपनियां उसको बंदर के हाथ में उस्तरे के जैसे इस्तेमाल कर रही हैं. ना सोचा, ना समझा, बस हर जगह एआई घुसेड़ दिया. सिस्टम में एआई लगाना कोई सस्ता सौदा नहीं है. इसके लिए मोटा पैसा खर्च करना पड़ता है.

आप एकदम ठीक पढ़े. आपके पास जो चैटजीपीटी या Claude ऐप है वो बेसिक वर्जन है जो ज्यादातर समय आपकी बे सिर पैर की बातों का जवाब देता है. कंपनी के सिस्टम में फिट करने के लिए इसका पेड वर्जन चाहिए होता है जो बहुत महंगा है. एआई को अपने सिस्टम में फिट करने में ऊबर सबसे आगे है. उसके पूरे सिस्टम में अब काम एआई एजेंट के जरिए हो रहा है मगर इसकी लागत अब उसके हाथ से निकल रही है.

बॉट की बात महंगी पड़ रही है

बात ऊबर या माइक्रोसॉफ्ट की नहीं है. कई सारी कंपनियों ने कस्टमर केयर में इंसानों की जगह एआई बॉट बिठा दिए हैं. इन बॉट से बतियाना अब महंगा पड़ रहा है. कुछ महीने पहले Accenture ने 11,000 लोगों की छंटनी करके 8900 करोड़ बचाने का सोचा, मगर उनके फाइनल सेटेलमेंट में उसके 19000 करोड़ खर्च हो गए. बोले तो जितने के ढोल नहीं, उतने के मजीरे फूट गए.

ये भी पढ़ें: Accenture ने की 11,000 छंटनी, 8900 करोड़ बचाने थे, मगर खर्च हो गए 19000 करोड़

पैसे से इतर एआई एजेंट गड़बड़ी भी खूब कर रहे हैं. अमेजन के सिस्टम में इन्होंने ऐसा झोल किया कि उसका शॉपिंग ऐप बिगड़ गया. कंपनी ने परेशान होकर अब एआई के ऊपर दो इंसानी मैनेजर बिठाए हैं. एआई की वजह से जिनको पहले बाय बोला, अब उनको वापस से ज्यादा पैसे पर हायर किया.

कुल जमा बात ये कि आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाला मामला हो गया है. देखना होगा कि क्या फिर से सिस्टम इंसान के हाथ में आएगा.

वीडियो: रजत पाटीदार ने क्वालिफायर में दिखाया बल्ले का दम, RCB पहुंची फाइनल में

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