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ईरान-अमेरिका अब एक-दूसरे पर नहीं करेंगे हमला, होर्मुज फिर खुला, कतर में बड़ी मीटिंग

US-Iran halt strikes: अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका और ईरान दोनों ने ही एक-दूसरे पर हमला करना बंद कर दिया है. अब दोनों पक्ष क़तर की राजधानी दोहा में बातचीत के लिए मिलेंगे.

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अमेरिका ईरान के बीच क़तर में बातचीत हो सकती है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • अमेरिका और ईरान ने अपने हथियार डाल दिए हैं और 30 जून को दोहा में फिर से बातचीत करने के लिए सहमति जताई है, जिससे 11 दिन पुराना सीजफायर पुनः सामान्य स्थिति में लौटेगा।
  • पिछले विवादों में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए बनाई गई हॉटलाइन स्थापित नहीं हो पाई थी, जिससे दोनों देशों के बीच एग्रीमेंट को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए।
  • इस बैठक में अमेरिकी तकनीकी टीम के प्रमुख निक स्टीवर्ट के शामिल होने की संभावना है और इसके बाद दोनों पक्ष समस्या सुलझाने के लिए आगे की बातचीत करेंगे।

अमेरिका और ईरान. दोनों ही देशों ने अपने हथियार डाल दिए हैं और बातचीत के लिए राज़ी हो गए हैं. 11 दिन पुराना सीजफायर फिर से अपने सामान्य स्थिति में लौट आया है. जिस एग्रीमेंट पर दोनों पक्षों ने साइन किए थे, उसपर दोबारा बातचीत होगी. ये मुलाक़ात क़तर की राजधानी दोहा में मंगलवार यानी 30 जून को हो सकती है. 

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अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एक्सिओस के मुताबिक, एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस वक़्त वे हमले रोक रहे हैं. जब तक तकनीकी लेवल पर बातचीत चल रही है, तब तक हमले नहीं किए जाएंगे. दूसरे अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों ही देशों ने अपने हथियार डाल दिए हैं. अब होर्मुज में जहाज आ-जा सकते हैं.

बातचीत का वेन्यू बदला

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दोनों पक्षों के बीच ये बातचीत स्विट्जरलैंड में होने वाली थी. लेकिन हाल के हमलों के बाद वेन्यू बदलकर दोहा कर दिया गया है. यहां तक कि बातचीत का केंद्र भी बदल गया है. मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग के मुताबिक, आगे की बातचीत ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर होनी थी. चूंकि बीच में ही एग्रीमेंट ब्रेक हो गया. इसलिए पहले अब स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज का मसला सुलझाया जाएगा.

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इस बातचीत में अमेरिकी टेक्निकल टीम के हेड निक स्टीवर्ट भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि इस मीटिंग के बारे में वाइट हाउस से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. 

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होर्मुज पर विवाद क्यों?

पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच एक बात पर सहमति बनी थी. अमेरिकी डेलीगेशन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लीड कर रहे थे. तय हुआ कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में जो ट्रैफिक है उसे मैनेज करने के लिए अमेरिकी मिलिट्री और IRGC के बीच एक ‘हॉटलाइन’ बनाया जाएगा. माने एक कम्युनिकेशन चैनल होगा. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हफ्ताभर बीतने के बाद भी ऐसा कोई चैनल नहीं बनाया गया. 

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इसी बीच, तेहरान ने फिर से इस बात पर जोर देना शुरू कर दिया कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी अधिकारियों से सीधी बातचीत करनी होगी. ईरान का ये रुख वॉशिंगटन के मुताबिक एग्रीमेंट के बाहर है. दोनों ही देशों ने एग्रीमेंट को अपने-अपने तरीके से इन्टरप्रेट किया. जिसकी वजह से सीजफायर के बावजूद हमले शुरू हो गए.  

वीडियो: पीस डील के बाद ईरान-अमेरिका क्यों भिड़ गए?

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