केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के आश्वासन के बाद दिल्ली में धरना दे रहे खिलाड़ियों ने प्रदर्शन वापस ले लिया. खेल मंत्री ने जांच का भरोसा दिलाया है. ये खिलाड़ी रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. अनुराग ठाकुर ने आश्वासन दिया कि खिलाड़ियों के आरोपों की जांच एक ओवरसाइट कमेटी करेगी. ये जांच चार हफ्ते में पूरी की जाएगी.
धरना खत्म, बृजभूषण सिंह की जांच होगी, पहलवानों के प्रदर्शन में क्या-क्या हुआ सबकुछ जानिए
जांच पूरी होने तक बृजभूषण सिंह को फेडरेशन से दूर रखा जाएगा.
.webp?width=360)

अनुराग ठाकुर ने कहा कि जांच पूरी होने तक बृजभूषण शरण सिंह को फेडरेशन से दूर रखा जाएगा और वे जांच में सहयोग करेंगे. ESPN की खबर के मुताबिक, ये कमेटी सेक्शुअल हैरेसमेंट से लेकर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की भी जांच करेगी. इस ओवरसाइट कमेटी में कौन लोग होंगे, इसकी घोषणा 21 जनवरी को होगी. ठाकुर के मुताबिक जांच पूरी होने तक कमेटी ही फेडरेशन के रोजाना के कामों को देखेगी.
खेल मंत्री से बातचीत के बाद देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. इस दौरान पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा,
"सभी खिलाड़ियों को केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है. सभी को समझाया भी है. हम खिलाड़ी अपने आंदोलन को बंद कर रहे हैं क्योंकि हमें सरकार ने आश्वासन दिया है. हमें भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा."
एक दिन पहले भी अनुराग ठाकुर ने खिलाड़ियों से बात की थी लेकिन तब वे नहीं माने थे. इसके बाद खबरें आईं कि खेल मंत्रालय ने बृजभूषण सिंह से इस्तीफा मांगा. हालांकि सिंह ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था.

BJP सांसद बृजभूषण सिंह ने कहा था कि वो 'अपराधी' के टैग के साथ इस्तीफा नहीं देने वाले हैं. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा था कि वो पुलिस या फिर सीबीआई का सामना करने को तैयार हैं. उन्होंने ये भी कहा कि अगर उनके खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप सही साबित होते हैं तो वो फांसी के लिए तैयार हैं.
उधर, अनुराग ठाकुर की घोषणा से पहले इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है. इस कमेटी की अध्यक्षता ओलंपिक मेडलिस्ट मैरीकॉम करेंगी. इसके अलावा कमेटी में डोला बैनर्जी, योगेश्वर दत्त, सहदेव यादव और दो वकील हैं. पहलवानों ने 20 जनवरी को IOA की अध्यक्ष पीटी उषा को शिकायती पत्र लिखा था.
हालांकि कमेटी बनाने के अलावा खिलाड़ियों की मांग ये भी थी कि बृजभूषण सिंह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें और रेसलिंग फेडरेशन को भंग कर दिया जाए. इस पर ओलंपिक एसोसिएशन ने कोई जवाब नहीं दिया. किसी भी नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को तब तक भंग नहीं किया जा सकता है जब तक उसने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के नियमों का उल्लंघन ना किया हो या फिर खेल की किसी विश्व स्तरीय संस्था ने उसकी मान्यता रद्द ना की हो.
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकीं विनेश फोगाट ने आरोप लगाया था कि नेशनल कैंप्स में नियुक्त कुछ कोच सालों से महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न कर रहे हैं. उनमें WFI अध्यक्ष बृजभूषण सिंह भी शामिल हैं. जंतर-मंतर पर जो खिलाड़ी फेडरेशन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, उनमें विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया के अलावा रियो ओलंपिक की ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता साक्षी मलिक, सरिता मोर, संगीता फोगाट, सत्यव्रत मलिक, जितेंद्र किन्हा और सुमित मलिक समेत 30 रेसलर्स शामिल थे. सभी खिलाड़ी 18 जनवरी से जंतर मंतर पर धरने पर बैठे थे.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: पहलवानों के बवाल पर क्या करेगी मोदी सरकार? BJP सांसद बृज भूषण शरण सिंह क्या करेंगे?






















