भारतीय टीम को नया स्पिन कोच मिल गया है. नाम है साईराज बहुतुले (Sairaj Bahutule). भारत का यह पूर्व प्लेयर अब टीम इंडिया के स्पिनर्स को गाइड करेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक BCCI और गौतम गंभीर ने लंबी चर्चा के बाद ये फैसला किया है. लेकिन बहुतुले के लिए यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है. एक हादसे के बाद डॉक्टर्स ने उनके ठीक होने तक की उम्मीद तक छोड़ दी थी.
कोमा को मात देकर बने थे क्रिकेटर, साईराज बहुतुले को BCCI ने टीम इंडिया का कोच बनाया
Sairaj Bahutule साल 1990 में मशहूर गजल सिंगर जगजीत सिंह के बेटे विवेक सिंह के साथ सफर कर रहे थे. कार का एक्सीडेंट हुआ. इस दुर्घटना में विवेक की मौत हो गई थी. साईराज कोमा में चले गए थे.


BCCI ने दो जून को साईराज को कोच बनाने का ऐलान किया. ऑफिशियल बयान में कहा गया,
भारत के पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ी और घरेलू क्रिकेट के दिग्गज, बहुतुले अपने साथ एक खिलाड़ी और कोच, दोनों ही तरह का एक्सपियरेंस ले कर आएंगे. पिछले कुछ सालों में, उन्होंने घरेलू और फ़्रैंचाइज़ी क्रिकेट में स्पिन-बॉलिंग की प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें विकसित करने के लिए एक मज़बूत पहचान बनाई है.
बहुतुले का इंटरनेशल क्रिकेट भले ही छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका कद काफी बड़ा था. उन्होंने अपने करियर में कुल 188 फर्स्ट क्लास मैच खेले. 630 विकेट लिए, और 6 हजार रन भी बनाए.
साईराज बहुतुले ने अपने करियर में कुल 10 शतक मारे. उन्होंने ईरानी कप में मुंबई के लिए 13 विकेट हॉल भी लिया. वो साल 1997 में टीम इंडिया के लिए सेलेक्ट हुए. 2013 में संन्यास लिया, और कोचिंग करने का मन बनाया.
साल 2014 आया. इसी साल बहुतुले को सबसे पहला असाइनमेंट मिला. वो केरल क्रिकेट टीम के कोच बने. अगले ही साल उन्हें बंगाल की तरफ से ऑफर आया, और वह उस टीम से जुड़ गए.
IPL में उन्हें सबसे पहले राजस्थान रॉयल्स की तरफ से ऑफर मिला. 2018 में वह टीम के साथ जुड़े. पिछले कुछ समय से वह पंजाब किंग्स के साथ थे, लेकिन अब उन्होंने वह असाइनमेंट छोड़ दिया है.
एक्सीडेंट ने बदल दी जिंदगीबहुतुले के लिए क्रिकेटर बनने का यह सफर आसान नहीं था. एक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. 1990 का साल. वो अपने दोस्त के साथ कार में कहीं जा रहे थे. दोस्त थे विवेक सिंह. वो मशहूर गजल सिंगर जगजीत सिंह और चित्रा सिंह के बेटे थे.
दोनों जिस कार में थे उसका एक्सीडेंट हो गया. विवेक सिंह की जान चली गई. बहुतुले किसी तरह बच गए, लेकिन उनकी हालत काफी गंभीर थी. उनकी जांघ की हड्डी टूट गई थी. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला किया. पैर में रॉड पड़ी. लेकिन बहुतुले को सिर पर भी चोट आई थी. जो ज्यादा सीरियस थी. वो कोमा में चले गए.
डॉक्टरों की मेहनत से कुछ दिनों बाद वो कोमा से बाहर आए. इसके बाद परिवार और बहुतुले ने रिकवरी पर ध्यान. वह क्रिकेट में वापसी करना चाहते थे. महाराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने वाले उनके पिता ने पूरा साथ दिया.
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एक साल बाद उनके पैर में डाली गई रोड निकाली गई. उन्होंने कुछ कैंप जॉइन किए. धीरे-धीरे बहुतुले ने वापसी की और मुंबई की अंडर-19 टीम में सलेक्ट हो गए. इसी के बाद उन्हें मुंबई की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलने का मौका मिला.
सेंट जेवियर स्कूल की तरफ से सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने एक मैच खेला था. जिमसें दोनों ने 664 रन की साझेदारी की थी. इस मैच में बहुतुले विपक्षी टीम के बॉलर थे. बहुतुले ने इसके बाद टीम इंडिया में भी जगह बनाई. आज वो फिर से टीम इंडिया में वापसी कर रहे हैं. लेकिन इस बार कोच के तौर पर.
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