भारतीय फुटबॉल इस समय खराब दौर से गुजर रहा है. हालात ये हैं कि फेडरेशन के पास अपनी फर्स्ट डिविजन लीग कराने तक के पैसे नहीं हैं. लेकिन अगले चार सालों में यह स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है. वर्ल्ड फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA अपने काउंसिल के सामने एक खास प्रस्ताव रखने वाली है. अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो भारतीय फुटबॉल फेडरेशन को 237 करोड़ रुपये मिलेंगे.
खस्ताहाल भारतीय फुटबॉल को ₹FIFA 237 करोड़ देगा
वर्ल्ड फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था FIFA साल 2027 से 2030 तक अपनी काउंसिल के सामने प्रस्ताव रखेगी. इसमें फुटबॉल के विकास के लिए 6.35 बिलियन अमेरिकी डॉलर के फंड का प्रस्ताव भी शामिल है.

फीफा ने अगले चार साल के लिए डेवलपमेंट फंड 6.35 बिलियन डॉलर तय किया है. AP की रिपोर्ट के मुताबिक, FIFA इसे अपने सदस्यों में बांटेगा. ऐसे में हर संघ को 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 237 करोड़ रुपये) की धनराशि मिल सकती है. पिछली बार हर फेडरेशन को 10 मिलियन डॉलर की राशि दी गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक 28 सितंबर को फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने सभी कॉन्टिनेंटल फेडरेशंस को एक पत्र लिखा. इस पत्र में उन्होंने बताया कि हाल में हुए वर्ल्ड कप से उन्हें बड़ी धनराशि हासिल हुई है. वह इस राशि को अपने 211 संघों, कन्फेडरेशनों और स्टेकहोल्डरों में बांटेगा. ताकि इन देशों में फुटबॉल का विकास हो सके.
दस्तावेज़ में आगे कहा गया है कि इस योजना को फीफा काउंसिल के सामने रखा जाएगा. दिसंबर 2026 में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. मार्च 2027 में 77वीं फीफा कांग्रेस में इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी. फीफा के बयान में कहा गया कि अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो अगले 4 सालों के लिए सदस्य देशों को मिलने वाली धनराशि दोगुने से भी अधिक हो जाएगी. इससे महिला और युवा फुटबॉल में निवेश और विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा. लेकिन इस फैसले को फीफा चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
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18 मार्च 2027 को फीफा के चुनाव होने हैं. इन्फैंटिनो फिर से अध्यक्ष पद की रेस में शामिल हैं. वह 2016 से इस पद पर हैं. लेकिन इस बार उनके लिए चुनाव जीतना आसान नहीं है. इन्फैंटिनो पिछले कुछ समय से काफी विवादों में हैं. वर्ल्ड कप को लेकर उनके इन्वेस्टमेंट प्लान की काफी आलोचना हुई थी. इस प्लान को जुलाई में सार्वजनिक किया गया था.
हालांकि कुछ ही दिनों में इसे वापस ले लिया गया था. इसे लेकर इन्फैंटिनो की काफी आलोचना हुई थी. अब वे फीफा सदस्यों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में डेवलपमेंट फंड बढ़ाने के फैसले को भी इसी से जोड़ा जा रहा है.
भारत को है जरूरतकारण चाहे जो भी, अगर ऐसा होता है तो भारतीय फेडरेशन को राहत ही मिलेगी. बीते साल कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारतीय फेडरेशन आर्थिक दबाव में है. फेडरेशन के खाते में केवल 50 करोड़ रुपये थे. इस रकम में ISL चलाना, खिलाड़ियों और अधिकारियों की सैलरी देना और तमाम बाकी खर्च उठाना बहुत मुश्किल था. इसी कारण ISL को रद्द करने की बात होने लगी. क्लब एक साथ आए और उन्होंने खुद लीग चलाने का फैसला लिया.
इसी साल ऐसी खबरें भी आईं कि AIFF ने आर्थिक दबाव के चलते कुछ टूर्नामेंट्स में टीम को न भेजने का फैसला किया था. हालांकि फेडरेशन ने इस दावे को गलत बताया था.
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