आपको फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ का वह सीन याद होगा, जब मिल्खा सिंह को पहली बार इंडिया का ब्लेजर मिलता है. ब्लेजर पर अशोक चक्र बना होता है और नीचे लिखा होता है- INDIA. उस ब्लेजर को देखते ही मिल्खा को अपना सालों का संघर्ष याद आ जाता है. उनकी मेहनत आंसू बनकर आंखों से बहने लगती है. यह लम्हा हर एथलीट की जिंदगी में बेहद खास होता है.
इंडिया की जर्सी मिलते ही रचा इतिहास, हरिता भद्रा खेल के साथ जिंदगी में भी हैं 'ऑलराउंडर'
हरिता मुख्य रूप से 200 मीटर इवेंट की एथलीट हैं. एशियन गेम्स में भी वह इसी इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. वह भारत के लिए मेडल लाने के प्रबल दावेदारों में शामिल हैं.

10 सितंबर की तारीख हरिता भद्रा की जिंदगी में भी ऐसा ही खास पल लेकर आई. पहली बार इस एथलीट को इंडिया किट मिली. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. किट मिलने के बाद जब हरिता पहली बार ट्रैक पर उतरीं, तो उन्होंने इतिहास रच दिया. यह कहानी है हरिता की, जो एथलीट हैं, स्कॉलर हैं, जूलरी डिजाइनर हैं और एक बिजनेसवुमन भी हैं.
बाल-बाल बचा दुती का रिकॉर्डहरिता मुख्य रूप से 200 मीटर इवेंट की एथलीट हैं. एशियन गेम्स में भी वह इसी इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. इन गेम्स से पहले दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज के फाइनल का आयोजन हुआ. यह एथलीट्स के लिए एशियन गेम्स से पहले फाइनल रिहर्सल की तरह था. हालांकि इसमें सभी इवेंट्स को शामिल नहीं किया गया था. महिलाओं का 200 मीटर इवेंट भी लिस्ट में नहीं था. ऐसे में अपनी तैयारियों का जायजा लेने के लिए हरिता ने 100 मीटर में हिस्सा लेने का फैसला किया. यह फैसला उनके लिए सही साबित हुआ.
हरिता ने 100 मीटर इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया. लेकिन इससे भी ज्यादा खास था उनका समय. उन्होंने 11.22 सेकंड में रेस पूरी की. यह 100 मीटर में भारत की ऑलटाइम दूसरी सबसे तेज टाइमिंग है. इस इवेंट का नेशनल रिकॉर्ड 11.17 सेकंड का है, जो दुती चंद के नाम है. हरिता यह रिकॉर्ड तोड़ने से सिर्फ 0.05 सेकंड दूर रह गईं. यानी जिस दिन हरिता ने पहली बार इंडिया किट पहनी, उसी दिन उन्होंने भारतीय महिला 100 मीटर की ऑलटाइम लिस्ट में खुद को दूसरे नंबर पर पहुंचा दिया.
लल्लनटॉप से बात करते हुए हरिता ने अपने प्रदर्शन को लेकर कहा,
रेस से पहले कोच ने मुझसे कहा था कि मैं अच्छी शेप में हूं और 11.2 सेकंड का समय निकाल सकती हूं. मैंने भी पूरी कोशिश की. मुझे खुशी है कि इसी सीजन की आखिरी 100 मीटर रेस में यह कर दिखाया. एशियन गेम्स से पहले यह टाइमिंग और मेडल मेरे आत्मविश्वास के लिए बहुत खास है.
हरिता इस समय रिलायंस फाउंडेशन का हिस्सा हैं और रोहित माने के साथ ट्रेनिंग करती हैं. पिछले एक साल में हरिता ने जिस तरह की प्रोग्रेस दिखाई है, वह साबित करती है कि वह इस इंडियन जर्सी की कितनी बड़ी हकदार हैं. हरिता के कोच रोहित माने उनके ऊपर टाइमिंग को लेकर कोई दबाव नहीं डालते. उनका ध्यान सिर्फ तैयारी पर रहता है. हरिता ने पिछले एक साल में जो प्रोग्रेस की है, वह उनकी मेहनत का नतीजा है.
11.22 सेकंड से पहले 100 मीटर में हरिता का पर्सनल बेस्ट 11.46 सेकंड था, जो उन्होंने इसी साल अगस्त में बनाया था. यानी सिर्फ एक महीने में उन्होंने अपनी टाइमिंग में 0.24 सेकंड का सुधार किया. लेकिन हरिता की टाइमिंग में यह सुधार सिर्फ 100 मीटर तक सीमित नहीं है. 60 मीटर इंडोर और 200 मीटर में भी उन्होंने इस साल अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार किया है.
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जून में हुई नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप की हीट्स में उन्होंने 200 मीटर में 23.55 सेकंड का समय निकाला. लेकिन जब इसी इवेंट का फाइनल आया, तो हरिता ने 23.14 सेकंड का समय निकालकर सभी को हैरान कर दिया. यह उनका पर्सनल बेस्ट भी बना. साथ ही यह टाइमिंग एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से तय एशियन गेम्स क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड 23.70 सेकंड से 0.56 सेकंड बेहतर थी. हरिता को पहले एशियन गेम्स के लिए टीम में नहीं चुना गया था. लेकिन 200 मीटर में लगातार बेहतर होती उनकी टाइमिंग और पिछले कुछ महीनों की शानदार प्रोग्रेस को देखते हुए उन्हें इस इवेंट के लिए टीम में मौका दिया गया.
कैसे शुरू हुआ सफर?
23 साल की हरिता मुंबई की रहने वाली हैं. एथलेटिक्स बचपन से ही उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा है. उनकी स्कूलिंग मुंबई के उदयाचल हाई स्कूल से हुई. स्कूल के समय में वह अंडर-16 कैटेगरी में 200 मीटर इवेंट में हिस्सा लेती थीं. उस समय उनका बेस्ट टाइमिंग 25.6 सेकंड था. वह अपने एज ग्रुप में देश की टॉप-5 एथलीट्स में शामिल थीं.
लेकिन ऐसा नहीं है कि एथलेटिक्स के कारण उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया. हरिता स्कूल में पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं. उन्होंने 10वीं में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए. वहीं 12वीं में उन्होंने 95 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके साथ-साथ हरिता को जूलरी बनाने का भी शौक है. वह अपना स्टार्टअप भी चलाती हैं, जहां अपनी डिजाइन की हुई जूलरी बेचती हैं. अपने ब्रैंड के लिए मॉडलिंग से लेकर मार्केटिंग तक खुद करती हैं. वह ट्रैक पर जितनी तेज हैं, उनका स्टाइल उतना ही अलग. अपनी हर रेस में वह अपनी ही डिजाइन की गई जूलरी पहनती हैं. सिर्फ इतना ही नहीं वह कई बार अपनी बिब पर अपने ब्रैंड का नाम लिखकर प्रमोट भी करती हैं. उन्होंने अपने पैशन और अपनी हॉबी दोनों को बैलेंस किया हुआ है.
हरिता कुछ समय पहले तक इंग्लैंड में थीं. लेकिन यहां भी वजह सिर्फ पढ़ाई नहीं, खेल भी था. उन्होंने लॉफबरो यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स साइंस में BSc कोर्स में एडमिशन लिया. वह एथलेटिक्स के साथ-साथ स्पोर्ट्स की पढ़ाई भी करना चाहती थीं. तीन साल तक उन्होंने वहां पढ़ाई के साथ अपनी एथलेटिक्स जर्नी भी जारी रखी. भारत लौटने के बाद हरिता रिलायंस फाउंडेशन से जुड़ीं. इसके बाद पिछले एक साल में उन्होंने लगभग हर बड़े नेशनल इवेंट में शानदार प्रदर्शन किया और मेडल जीते.
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