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HYROX आखिर क्या बला है, जिसका अचानक इंडिया में इतना क्रेज बढ़ गया है?

HYROX का क्रेज अचानक इंडिया में बढ़ गया है. कारण हैं जिम फ्रीक्स, जिन्हें ये चैलेंज पेश कर रहा है. HYROX एक ऐसा चैलेंज है, जिसमें कोई बिग‍िनर भी भाग ले सकता है. यही इसकी यूएसपी भी है.

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जर्मनी में HYROX रेस में भाग लेती महिलाएं. (फोटो-AP)

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  • Hyrox एक फिटनेस रेस है जिसमें 8 किमी दौड़ के बाद 8 फंक्शनल वर्कआउट स्टेशनों को पूरा करना होता है, जिसमें दौड़ और स्ट्रेंथ दोनों की आवश्यकताएं शामिल हैं।
  • Hyrox भारत में लोकप्रिय हुआ क्योंकि यह क्रॉसफिट और मैराथन के बीच का विकल्प प्रदान करता है, जिससे नए और अनुभवी दोनों फिटनेस प्रेमी शामिल हो सकते हैं।
  • अगले छह महीनों में Hyrox इंडिया मुंबई, गुजरात और दिल्ली एनसीआर में प्रतियोगिताएं आयोजित करेगा, जिससे स्थानीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

फिटनेस फ्रीक्स के बीच एक कंपीटिशन इन दिनों खूब चर्चा में है. हालत ये है कि ऐसा लगता है इसने इंडिया की फिटनेस कम्युनिटी का पूरा सिस्टम हैंग कर दिया है. जिम जाओ तो लोग एक ही नाम जप रहे हैं. इंस्टाग्राम खोलो, तो वहां भी यही भौकाल मचा है. नाम आपने भी सुना ही होगा- हाईरॉक्स (HYROX). ये आख‍िर क्या बला है, जिसने अचानक आपकी फीड और गूगल ट्रेंड्स सबको हिलाकर रख दिया है. आइए विस्तार से समझते हैं.

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क्या है HYROX?

Hyrox एक रेस है. एक ऐसी फिटनेस रेस, जिसमें 8 किलीमीटर दौड़ना पड़ता है. लेकिन, ये इतनी सीधी नहीं है. इसमें एक ट्विस्ट है. हर 1 किलोमीटर के बाद एक वर्कआउट स्टेशन भी पार करना होता है. नहीं समझे, चलिए इत्मीनान से समझाते हैं. इसमें हर 1 किलोमीटर दौड़ने के बाद एक फंक्शनल वर्कआउट करना पड़ता है. 

माने एक किलोमीटर दौड़ो, फिर भारी भरकम वेट के साथ फंंक्शनल वर्कआउट करो. ऐसे कुल 8 स्टेशन होते हैं. पहला है 1000 मीटर स्की अर्ग. मतलब रेस शुरू होती है 1 किमी रेस से, फिर करना होता है 1000 मीटर स्की अर्ग. 

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इसी तरह फिर 1 किमी दौड़ और उसके बाद 50 मीटर स्लेड पुश, 1 किमी दौड़ फिर 80 मीटर बर्पी ब्रॉड जंप्स. अब आप समझ गए होंगे. 1 किमी दौड़ इस बार 1000 मीटर रो. इसी तरह अगले 1 किमी दौड़ के बाद 200 मीटर फार्मर्स कैरी (20 kg). फिर 100 मीटर सैंडबैग लंजेज और अंत में 100 वॉल बॉल्स (6kg). सबसे खास बात इसके लिए कोई टाइम फिक्स नहीं होता. 

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लिए Hyrox के फंक्शनल एक्सरसाइज. (फोटो-HYROX Official Page)
इंडिया में क्यों बढ़ा क्रेज?

अब ये भी समझ लेते हैं कि अचानक इसका क्रेज इंडिया में क्यों बढ़ गया है? दरअसल, ये रेस क्रॉसफिट (CrossFit) से आसान, मैराथन से ज्यादा मज़ेदार है. क्रॉसफिट में ओलिंपिक लेवल की वेटलिफ्टिंग करनी पड़ती है. इसमें चोट लगने का डर रहता है. दूसरी तरफ, मैराथन में सिर्फ़ दौड़ना होता है. जिम फ्रीक्स इससे बोर हो जाते हैं. Hyrox ने बीच का रास्ता निकाल लिया है. 

इसमें कोई बिगिनर भी हिस्सा ले सकता है. दूसरी चीज है इंस्टाग्राम पर पॉपुलैरिटी. आजकल फिटनेस से ज़्यादा क्रेज कॉन्टेंट बनाने का है. Hyrox के इवेंट्स एकदम रॉक कॉन्सर्ट की तरह होते हैं. डीजे, नियॉन लाइट्स, और पसीने में तर-बतर एथलीट फिनिश लाइन पार करने की भूख. इसकी रील बहुत धांसू बनती है और सोशल मीडिया पर स्वैग दिखाने का मौक़ा अब कौन छोड़ता है?

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क्यों इंडियन जिम लवर्स को आ रही पसंद?

Hyrox की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें कोई 'टाइम लिमिट' नहीं है. माने आप प्रो-एथलीट हैं तो 1 घंटे में पूरा करिए. हफ्ते में 3 दिन जिम जाने वाले हैं, तो 2-3 घंटे में आराम से पूरा करिए. कोई आपको जज नहीं करेगा. उल्टा जब आप थक कर गिर रहे होंगे, तो आसपास के लोग तालियां बजाकर मोटिवेट करेंगे. ये कम्युनिटी वाली फीलिंग भी इंडियंस को बहुत भा रही है.

दरसअल, जिम लवर्स रोज़-रोज़ चेस्ट, बाइसेप्स, लेग मार-मार कर पक गए थे. उन्हें कुछ नया चैलेंज चाहिए था. Hyrox ने उन्हें ये टारगेट दे दिया है. अब लोग जिम सिर्फ़ डोले बनाने नहीं जा रहे, वो स्टैमिना, ताक़त और मेंटल स्ट्रेंथ को टेस्ट करने जा रहे हैं. कुल मिलाकर भारत में अब फिटनेस का मतलब सिर्फ़ सिक्स-पैक एब्स नहीं रह गया है. लोग रियल-लाइफ स्ट्रेंथ और स्टैमिना पर फोकस कर रहे हैं. Hyrox ने इसी नब्ज़ को पकड़ लिया है.

Hyrox रेस की कैटेगरीज भी समझ लेते हैं. इसमें कुल 4 कैटेेेेेगरीज होती है. ओपन, प्रो, डबल्स और रिले. ये अलग-अलग फिटनेस लेवल वालों के लिए बनाई गई हैं. हर शहर में होने वाली इंडोर HYROX रेस का एक लीडरबोर्ड बनता है, जिसमें ग्लोबल कम्पीटिशन चलता रहता है. अगले 6 महीनों में HYROX इंडिया 3 शहरों में इस रेस को ऑर्गेनाइज करने वाला है. मुंबई में ये 17–20 सितंबर के बीच होगी. वहीं, गुजरात में 26–28 नवंबर के बीच और दिल्ली एनसीआर में ये अगले साल 15–17 जनवरी के बीच होगी. 

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