ANI ने एक ट्वीट किया. ANI इस वक़्त का नारद है. हर जगह विद्यमान रहता है. जहां न जाए रवि, वहां आये कवि और जहां न आ पाए कवि वहां मिलता है ANI. अपना कैल्कुलेटर रुपी कैमरा लिए जिसमें कैप्शन देख के समझना पड़ता है कि फ़ोटो में अजय देवगन है या बिपाशा बासु. खैर, बात वो नहीं है. बात है ANI के ट्वीट की. ANI ने ट्वीट किया कि दिल्ली में केजरीवाल की गाड़ी चोरी हो गई. वही नीली वैगन आर जिसके बगल में गद्दा बिछा के वो सड़क के किनारे सो गए थे. वही वैगन आर जो केजरीवाल के लिए उतने ही मायने रखती थी जितना सुब्रत राय सहारा के लिए उनका स्कूटर.

खैर, बात वो भी नहीं है. बात ये है कि ट्विटर बहुत खराब जगह है. बहुत ही ज़्यादा खराब. यहां रायता कब और कैसे फैल जाए, मालूम नहीं रहता. और हां, केजरीवाल और रायते के बीच कनेक्शन निकालना बंद करो. मैंने भी लिखने के बाद अहसास किया कि असल में क्या हो गया है. खैर, बात रायते की भी नहीं है. बात है सुब्रमनियम स्वामी की. स्वामी जी ने दोपहर 2 बजे एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि मैं दिल्ली में हूं और मैं ऐक्शन के लिए तैयार हूं. अब इस ऐक्शन का मतलब क्या था, अपने को नहीं मालूम. अपन ने तो बस ऐक्शन के जूते पहने थे बचपन में.
खैर, बात ऐक्शन की नहीं है. बात इसकी है कि इस ट्वीट लगभग 3-साढ़े 3 घंटे बाद ANI का ट्वीट आया कि केजरीवाल की गाड़ी चोरी हो गई है. अब जनता को मसाला मिल गया. यही मसाला छिड़क दिया गया उस रायते पर जो फैलने को तैयार था. जनता ने दोनों ट्वीट के बीच कनेक्शन बिठा लिया. और लगे फैलाने.
इस बीच ध्यान ये दिया जाए कि हम अपने मन से कुछ भी नहीं कह रहे हैं. ये सफाई देनी बहुत ज़रूरी है. डरते तो हम किसी के बाप से भी नहीं हैं लेकिन ये बाप से डरने वाली बात आज कल एक-दो 'समूह विशेषों' को साल रही है. थोड़ा कहा है, ज़्यादा समझो. तार को ख़त वाली बात. बाकी तो समझ ही लो.
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