टोनी ग्रेग हिन्दुस्तानी क्रिकेट प्रेमी के लिए काफ़ी स्पेशल हैं. हम सभी के ज़हन में शारजाह में खेली कई सैंडस्टॉर्म इनिंग्स ठीक उसी तरह दर्ज है जैसे दो का पहाड़ा. और उस इनिंग्स के इस कदर यादगार होने की एक वजह सचिन के छक्कों के साथ चीखती टोनी ग्रेग की आवाज़ भी है. "They are dancing in the aisles in Sharjah." टोनी ग्रेग का कहना था. और वो कहना हमारे लिए कहावत बन गया. जिस हद तक सचिन हमें इंटरटेन कर रहे थे, उसी हद तक टोनी ग्रेग भी.टोनी ग्रेग एकदम मस्तमौला इंसान था. लम्बा. चौड़ा माथा. और आवाज़ ऐसी कि जी करता था कमेंट्री बॉक्स में बस इसे ही बिठाये रखा जाए. अपनी मस्ती में एक रोज़ 2008 में साउथ अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया की सीरीज़ के दौरान टीवी स्क्रीन पर एक लड़की के दिखाई देने पर कहते हैं, "Oh boy, doesn't she look gorgeous?" https://www.youtube.com/watch?v=2WVl0NgdsDk और इसी क्रम में शेन वॉर्न के पीछे लगी साइट स्क्रीन पर खड़ी चीयर गर्ल्स को देखकर भी काफ़ी खुश हुए ग्रेग ने कहा, "Changing behind the bowler's arm? That's enough to put any batsman off." https://www.youtube.com/watch?v=59aoWggycSE टोनी ग्रेग यानी क्रिकेट कमेंट्री का पितामह. बड़ी लम्बाई और उससे भी बड़े दिलवाला गुस्सैल क्रिकेटर. लेकिन गुस्सा सिर्फ एक्सप्रेस करने की हद तक था. उसके अंदर एक दादा था जो सामने आने वाले हर खिलाड़ी, क्रिकेट प्रेमी को अपार लाड़ देता था. वो क्रिकेटर जो हिंदुस्तान और पाकिस्तान की टीमों से गालियां सीख प्लेयर्स को खूब हिंदी में गालियां देता था. टोनी ग्रेग, तुम्हारी कमेंट्री के बिना सचिन की वो शारजाह की इनिंग्स वैसी ही लगती जैसे हम म्यूट करके पोर्न देख रहे हों. तुम्हारा हमें छोड़ कर जाना बुरा लगा.
टोनी ग्रेग की कमेंट्री के बिना सचिन की इनिंग्स फीकी लगती
टोनी ग्रेग. इंग्लैंड का प्लेयर. क्रिकेट का महान कमेंट्रेटर.
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फोटो - thelallantop
साल 1973. इंग्लैंड क्रिकेट टीम इंडिया आई हुई थी. तीसरा टेस्ट मद्रास में होना तय था. पहले दो टेस्ट के बाद सीरीज़ का हाल था 1-1. मद्रास टेस्ट जब चौथी शाम में पहुंच चुका था. माइक डेनिस 86 रन की इनिंग्स के साथ जा चुके थे. और इंडिया को जीतने के लिये मात्र 76 रन का टार्गेट मिला. अजीत वाडेकर क्रीज़ पर आये. उनके आने की वजह थी फारुख इंजीनियर का जल्दी वापस चले जाना. वाडेकर ने एक आउटस्विंग पर बल्ला लगाया. बॉल, बैट का किनारा लेते हुए फर्स्ट स्लिप तक पहुंची. वहां खड़े टोनी ग्रेग ने एक लो कैच लिया. सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि कुछ कहना मुश्किल था. अजीत वाडेकर श्योर नहीं थे कि कैच सही था या नहीं. टोनी ग्रेग और उनके साथी अपील कर रहे थे. वाडेकर को मालूम था कि ग्रेग चैपल किसी भी हालत में जीतना चाहते हैं. और इसी वजह से वो क्रीज़ में खड़े रहे. अम्पायर के फैसले का इंतज़ार कर रहे थे. अहमद मम्सा उस मैच में अम्पायरिंग कर रहे थे. उन्होंने नॉट आउट क़रार दिया. और फिर वो हुआ जिसके लिए टोनी ग्रेग अक्सर जाने जाते थे. वो अपनी फ़ील्डिंग पोज़ीशन से अम्पायर तक चलते हुए आये. पूरे दौरान वो चार अक्षर के अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल कर रहे थे. कीपर ऐलेन नॉट ने अपने दस्ताने फ़ेंक दिए. और कुछ इंग्लिश प्लेयर्स के साथ अम्पायर तक पहुंच गए. मम्सा फिर स्क्वायर लेग पर खड़े अम्पायर के पास पहुंचे. दूसरे अम्पायर ने कैच को साफ़-साफ़ देखा था. उन्होंने कहा कि आउट है. अजीत वाडेकर को फिर आउट दिया गया. मैच इंडिया ने जीता. सलीम दुरानी ने छक्का मारकर इंडिया को जीत दिलाई. इसी सीरीज़ का आख़िरी मैच. वानखेड़े स्टेडियम, बॉम्बे. पहली इनिंग्स में इंडिया बैटिंग कर रही थी. विश्वनाथ ने दुरानी के साथ बढ़िया पार्टनरशिप की. इसी दौरान विश्वनाथ ने अपनी सेंचुरी पूरी की. और उनके सेंचुरी पूरी करते ही 6 फ़ुट 6 इंच लम्बा टोनी ग्रेग विश्वनाथ के पास पहुंचा. विश्वनाथ को गोदी में उठाया. और बच्चे की तरह गोदी खिलाने लगा. इंडिया में शायद ही कभी किसी क्रिकेट के मैदान में इस कदर शोर उठा होगा. इंडियन क्राउड के लिए लम्बू, टोनी ग्रेग कई बार लोगों के सामने घुटने टेक कर बैठ जाते थे. क्यूंकि वो जहां जा रहे होते थे, शोर बढ़ जाता था. जैसे वो माफ़ी मांग रहे हों. एक बार तो कलकत्ता में बाउंड्री पर फील्डिंग करते-करते अपनी पैंट नीचे कर दी. उन्हें चिढ़ाने के लिए. वो जहां जाते, लोग उनके प्रेम में पड़ जाते. टोनी ग्रेग उस ज़माने में उस प्यार को पा रहे थे जो आज डिविलियर्स या गेल के हिस्से में आता है.
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