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यूरोप में मेडल जीतने वाले बैडमिंटन प्लेयर्स को फंड तक नहीं मिले, पीवी सिंधु समेत सभी ने अपने खर्च पर दिन गुजारे

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी यूरोपियन टूर पर हैं. इसकी शुरुआत 6 अक्टूबर को आर्कटिक ओपन से हुई. इस टूर्नामेंट से कुछ दिन पहले ही साई ने खिलाड़ियों को मैसेज भेजकर बताया कि इस टूर की फंडिंग नहीं की गई है.

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लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु ने हाइलो ओपन खिताब जीता. (Courtsey-PTI)

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी इस समय यूरोपियन टूर पर हैं. खिलाड़ियों ने इस दौरे पर अच्छा प्रदर्शन किया है. पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने बीते हफ्ते ही हाइलो ओपन का खिताब जीता. लेकिन इस टूर के लिए खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की तरफ से कोई फंडिंग नहीं मिली. SAI ने पीवी सिंधु समेत सभी खिलाड़ियों के लिए फंडिंग रोक दी थी. इसी वजह से सभी खिलाड़ी अपने खर्च पर इस टूर पर गए हैं.

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फंडिंग रुकने से पीवी सिंधु हैरान

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों को इस दौरे पर फिनलैंड, डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी में टूर्नामेंट खेलने थे. इसकी शुरुआत 6 अक्टूबर को आर्कटिक ओपन से हुई. इस टूर्नामेंट से कुछ दिन पहले ही SAI ने खिलाड़ियों को वॉट्सऐप पर मैसेज भेजकर इस फैसले की जानकारी दी. सिंधु इस फैसले से काफी हैरान थीं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

मुझे जब पता चला तो मैं हैरान थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि फंडिंग कैसे रुक सकती है. मेरे साथ पहले ऐसा कुछ कभी नहीं हुआ. लेकिन मेरा फोकस खेलने पर था. मुझे किसी भी हाल में टूर्नामेंट खेलने थे. मैंने OGQ के साथ मिलकर पूरी ट्रिप का खर्च उठाया.

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इस मुद्दे को एशियन गेम्स में बैडमिंटन खिलाड़ियों के प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है. 12 साल में पहली बार ऐसा हुआ, जब भारत इंडिविजुअल इवेंट्स में एक भी मेडल नहीं जीत सका. एथलीट मैनेजमेंट से जुड़े लोगों का कहना है कि बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के पास फंड की कमी नहीं है. इसके बावजूद खिलाड़ियों के इस दौरे को स्पॉन्सर नहीं किया गया.

क्या है SAI का पक्ष?

SAI के अधिकारियों ने इस दावे से इनकार किया है. उनके मुताबिक, ऐसा बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की लापरवाही के कारण हुआ. SAI के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आमतौर पर किसी भी दौरे से 90 दिन पहले फेडरेशन को अपना प्लान देना होता है. इसके बाद 60 दिन पहले खिलाड़ियों के नाम देने होते हैं. फेडरेशन ने कहा कि वह इतनी जल्दी खिलाड़ियों के नाम नहीं दे सकता. इसलिए उसे टूर्नामेंट से 30 दिन पहले खिलाड़ियों के नाम देने के लिए कहा गया. हालांकि, फेडरेशन ऐसा भी नहीं कर पाया. इसी वजह से SAI ने इस दौरे के लिए फंडिंग नहीं दी.

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SAI के अधिकारियों ने यह भी कहा कि आने वाले टूर्नामेंट्स के लिए खिलाड़ियों को फंडिंग दी जाएगी. हालांकि, मौजूदा यूरोपियन टूर के लिए खिलाड़ियों ने जो पैसा खर्च किया है, उसकी भरपाई नहीं की जाएगी.

बिना कोच के टूर पर गए खिलाड़ी

फेडरेशन ने दौरे पर रवाना होने से पहले खिलाड़ियों को मैसेज भेजा था. इसमें बताया गया कि BAI फिनलैंड में होने वाले पहले टूर्नामेंट के लिए रहने की व्यवस्था करेगा. लेकिन यात्रा, खाने और दूसरी चीजों का खर्च खिलाड़ियों को खुद उठाना होगा.

आर्थिक तंगी के कारण कुछ खिलाड़ियों को अपने कोच के बिना ही टूर्नामेंट में हिस्सा लेना पड़ा. फ्रेंच ओपन के दौरान जब अश्मिता चालिहा ने अकाने यामागुची को हराया, तब उनकी साथी खिलाड़ी इशरानी बरुआ उनके साथ थीं. इशरानी ही एक तरह से उनकी कोच की भूमिका निभा रही थीं. वहीं, डेनमार्क में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली तन्वी शर्मा के साथ भी मैच के दौरान मार्गदर्शन देने के लिए कोई कोच मौजूद नहीं था.

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