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मीठे के लालच में शुरू हुआ था शूटिंग का सफर, कहानी एशियन गेम्स में हैट्रिक लगाने वाले रुद्रांक्ष पाटिल की

भारतीय राइफल शूटर रुद्रांक्ष पाटिल ने एशियन गेम्स 2026 में तीन मेडल हासिल किए. इसमें दो टीम मेडल और एक इंडिविजुअल मेडल शामिल है.

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रुद्रांक्ष पाटिल 18 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बन गए थे. (Photo-PTI)

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  • भारतीय राइफल शूटर रुद्रांक्ष पाटिल ने एशियन गेम्स 2026 में तीन मेडल जीते हैं, जिनमें 10 मीटर एयर राइफल टीम और थ्री पॉजिशन एयर राइफल में सिल्वर, तथा 10 मीटर एयर राइफल इंडिविजुअल में ब्रॉन्ज शामिल हैं।
  • रुद्रांक्ष ने 12 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की, उन्हें शुरुआत में शूटिंग बोरिंग लगी और उन्होंने छोड़ने का मन बनाया था, लेकिन उनकी मां के प्रोत्साहन से उन्होंने निरंतर प्रशिक्षण जारी रखा।
  • रुद्रांक्ष के विश्व चैंपियन बनने और एशियन गेम्स में प्रदर्शन के बावजूद उन्हें खेल रत्न पुरस्कार नहीं मिला है, जिसके कारण उन्होंने इस विषय पर सवाल उठाए हैं और भविष्य में सम्मान की उम्मीद जताई है।

भारतीय राइफल शूटर रुद्रांक्ष पाटिल के लिए एशियन गेम्स 2026 खास रहे. उन्होंने इन खेलों में तीन मेडल अपने नाम किए. रुद्रांक्ष ने 10 मीटर एयर राइफल के टीम इवेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया. इसी के इंडिविजुअल इवेंट में वह ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहे. वहीं, 25 सितंबर को वह थ्री पॉजिशन एयर राइफल में भी मेडल जीतने में कामयाब रहे. उन्होंने नीरज और ऐश्वार्य प्रताप सिंह के साथ मिलकर सिल्वर मेडल जीता. रुद्रांक्ष इन एशियन गेम्स में फिलहाल सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाले शूटर हैं.

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मीठे के लालच में शूटिंग

रुद्रांक्ष के लिए आज शूटिंग ही सबकुछ है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. जब उन्होंने यह खेल शुरू किया तो उन्हें सबकुछ बहुत बोरिंग लगता था. Sportstar की रिपोर्ट के मुताबिक, रुद्रांक्ष ने 12 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की. वह थाणे के द्रोणाचार्य स्पोर्ट्स अकेडमी में ट्रेन करते थे. उन्हें एक ही जगह खड़े होकर निशाने लगाना बहुत बोरिंग लगता था. उन्होंने शूटिंग छोड़ने का भी मन बना लिया था. लेकिन, उनकी मां ने उन्हें रोका. रुद्रांक्ष ने Sportstar को बताया,

मेरी मां ने मुझे मिठाई का लालच दिया. उन्होंने कहा कि अगर मैं अकेडमी जाऊंगा तो वह मुझे कुछ मीठा बनाकर खिलाएंगी.

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2022 में बने वर्ल्ड चैंपियन

इसी लालच में रुद्रांक्ष ने हर रोज शूटिंग रेंज जाना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्हें शूटिंग पसंद आने लगी. तभी उनके कोच ने थाणे से अंधेरी शिफ्ट होने का फैसला किया. वह अपनी भारी राइफल और पूरी किट के साथ हर रोज लोकल ट्रेन से सफर करते थे. उन्होंने नेशनल इवेंट में मेडल हासिल किया था. उनके करियर के लिए 2019 बेहद खास रहा. उन्होंने इस साल 6 मेडल हासिल किए. रुद्रांक्ष ने करियर में बहुत पहले ही साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना शुरू कर दिया था. रुद्रांक्ष को अपना यह फैसला सही साबित होता दिखा. साल 2022 में रुद्रांक्ष ने वह कर दिखाया, जो अब तक केवल अभिनव बिंद्रा ही कर सके थे. रुद्रांक्ष ने 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता. रुद्रांक्ष के वर्ल्ड चैंपियन बनने के कारण भारत को इस इवेंट में कोटा भी मिला. हालांकि, वह ओलंपिक ट्रायल्स में जीत हासिल नहीं कर सके.

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पेरिस ओलंपिक के बाद उनका आत्मविश्वास टूट गया. वह टूर्नामेंट दर टूर्नामेंट मेडल जीतने के लिए संघर्ष करते दिखे. इसी दौरान स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स का ऐलान हुआ. वर्ल्ड चैंपियन बनने के बावजूद रुद्रांक्ष को खेल रत्न नहीं मिला. वह इससे काफी निराश थे. उन्होंने गुकेश का उदाहरण देते हुए सवाल उठाए. गुकेश को सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बनने पर खेल रत्न दिया गया था. 25 सितंबर को सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्होंने एक बार फिर यही सवाल उठाया. उन्हें उम्मीद है कि अब उन्हें वह सम्मान मिलेगा, जिसके वह हकदार हैं.

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