ऋषभ पंत को कंट्रोल करने की कोशिश में सब बर्बाद ना कर दे भारत की जनता!
हमारे पास विकेटकीपर्स कई हैं, ऋषभ पंत सिर्फ एक.
Advertisement

Rishabh Pant जैसे खिलाड़ी को अक्सर तारीफ से ज्यादा आलोचना मिलती है (एपी फाइल)
ऋषभ पंत. इंडियन क्रिकेट के उन चंद प्लेयर्स में से एक, जो ना चाहते हुए भी चर्चा में बने रहते हैं. विकेट के आगे बेअंदाज शॉट्स और विकेट के पीछे की बकैती पंत की चर्चित प्रोफाइल का अहम हिस्सा हैं. कुछ वक्त पहले तक पंत भारत के दुलारे थे. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया टूर, स्पेशली गाबा में जो किया उसकी गाथाएं गाई जाती थीं. लेकिन अब मामला बदल गया है. अब पंत हीरो से विलेन बन चुके हैं. ठीक गॉथम के पूर्व डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हार्वी डेंट की तरह. लोग नहीं चाहते कि वह टीम इंडिया में रहें. पूर्व दिग्गज क्रिकेटर्स तो उन पर लट्ठ बजाए जाने की वकालत कर रहे हैं. और फ़ैन्स भी पूरी तरह से उनके साथ हैं. यहां तक कि कोच राहुल द्रविड़ ने भी उनकी बैटिंग के तरीके पर सवाल उठा दिए हैं. और इन सवालों की सबसे खास बात ये है कि ये सारे के सारे पब्लिक डोमेन में हैं. पूर्व क्रिकेटर कॉमेंट्री और प्री-पोस्ट मैच शो में, फ़ैन्स सोशल मीडिया पर और कोच साब प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंत पर सवाल उठा रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि जैसे एकाएक कुछ अलग सा हो गया है. अकस्मात पंत ने अपनी खेलने की शैली बदल दी. और लोगों से ये सहन नहीं हो रहा. आसमान फटा जा रहा है और उस फटे से चित्तौरी सेना अटैक किए जा रही है.
# Rishabh Pant
कुछ ही मैच पहले तक इंडियन क्रिकेट का भविष्य रहे ऋषभ पंत अब लापरवाह और टीम पर बोझ बताए जा रहे हैं. कुछ दिग्गजों का मानना है कि पंत के चलते ही इंडियन क्रिकेट टीम जोहानसबर्ग टेस्ट हारी. अगर वह कगीसो रबाडा की गेंद पर आगे बढ़कर शॉट नहीं जमाते तो भारत मैच जीत जाता. अब इस उम्मीद में ही कितना विरोधाभास है. एक तरफ तो आप उस आदमी के एटिट्यूड से परेशान हैं. और दूसरी ओर आपने उससे ही उम्मीद भी लगा ली है? वाह, नहीं, नहीं वाह! वही शॉट कनेक्ट हो जाता तो आप सब भूलकर उस एक शॉट की क्लिप्स शेयर करते. जैसे आपने मार्च 2021 में जेम्स एंडरसन और जोफ्रा आर्चर पर लगाए पंत के रिवर्स शॉट्स की क्लिप्स शेयर की थी. समस्या पंत में नहीं हैं. पंत हमेशा से ऐसे ही थे. फिर चाहे वो एक हाथ से छक्के मारना हो. या फिर किसी भी बोलर की रेस्पेक्ट के चक्कर में ना पड़ते हुए उसे रिवर्स फ्लिक या रिवर्स स्वीप करना. पंत का कैरेक्टर ऐसा ही है. और इसी कैरेक्टर से हम सब उनके फैन बने. जबकि हमारे पास और भी कई ऑप्शंस हैं. उनसे पहले संजू सैमसन आए, आपके पास ऋद्धिमान साहा पहले से थे. आपके पास ईशान किशन भी हैं.
और अगर मैं इन्हीं चार विकेटकीपर्स की बात करूं तो मित्र आपको इन चार में ईशान और ऋषभ ही सबसे ज्यादा पसंद हैं. जाहिर है, कुछ लोग मुझसे सहमत नहीं होंगे. तो उन्हें इग्नोर करने का काम करते हुए आगे बढ़ना चाहूंगा. क्योंकि लोकतंत्र में भी गाड़ी वहीं रुकती है जहां मेजॉरिटी चाहे. और मेजॉरिटी को ऋषभ और ईशान पसंद हैं. और इस पसंद में ना तो कोई कला है और ना ही कोई बहुत खास टेक्नीक. आप इन्हें चाहते हैं क्योंकि ये दुस्साहसी हैं. बेख़ौफ हैं. 24-25 साल के ये लौंडे पहली गेंद से लेकर आखिरी गेंद तक, कभी भी, किसी भी बोलर पर स्टेप आउट करके छक्का जड़ सकते हैं. और आपको यही अनिश्चितता पसंद है. आप अभी कितनी भी कसम खाएं... लेकिन सच्चाई यही है कि आपने राहुल द्रविड़ की किसी भी पारी को शुरू से एंड तक नहीं देखा होगा. और मैं श्योर हूं कि ऋषभ की पारियों के बारे में आप ऐसा नहीं कह सकते. आप ऋषभ को देखना चाहते हैं. क्योंकि इनमें जंगलीपन है, एक नैसर्गिक बहाव है और है एक अनिश्चितता. वही अनिश्चितता जिसने क्रिकेट के बारे में सबसे प्रसिद्ध हिंदी लाइन दी- क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. और हम सब क्रिकेट इसीलिए देखते हैं क्योंकि हमें नहीं पता कि अगली गेंद पर क्या होगा. बस समस्या इतनी सी है कि जो चीज हमें बहुत अच्छी लगती है एक वक्त के बाद हम उसे कंट्रोल करने की कोशिश करने लगते हैं. और जब वो चीज हमारे कंट्रोल में नहीं आती तो हम फ्रस्ट्रेट होते हैं. और आ जाए तो उससे बोर हो जाते हैं. इसलिए मेरे प्यारे मित्रों. LET HIM BE. ऋषभ पंत जैसे हैं, अच्छे हैं. उन्हें वैसा ही रहने दीजिए. क्योंकि हमारे पास विकेटकीपर कई हैं, ऋषभ पंत सिर्फ एक.
Advertisement











