देहरादून के एक हॉस्पिटल में एडमिट क्रिकेटर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) से मिलने के लिए 2 जनवरी को दो युवक पहुंचे. रजत और नीशू. इन लोगों ने पुलिस को पंत के पैसे वापस किए, जो उन्हें एक्सीडेंट वाली जगह से मिले थे. रजत और नीशू ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद उन्होंने पंत की मदद की थी. उन्हें कंबल दिया था और हॉस्पिटल ले जाते वक्त वो एंबुलेंस में पंत के साथ थे.
पंत को हॉस्पिटल पहुंचाया था, पैसे मिले थे, दो युवकों ने वापस आकर लौटाए
दोनों युवकों ने बताया कि पंत को हॉस्पिटल ले जाते समय वो उनके साथ एंबुलेंस में थे.


न्यूज एजेंसी ANI ने जानकारी दी,
रजत और नीशू, जो ऋषभ पंत को रुड़की के एक हॉस्पिटल ले गए थे, देहरादून के हॉस्पिटल में उनसे (ऋषभ पंत) मिलने आए. उन्होंने क्रिकेटर के 4 हजार रुपये पुलिस प्रशासन को सौंपे, जो हादसे के दौरान खो गए थे.
रजत ने बताया,
'हम उन्हें सबसे नजदीकी हॉस्पिटल ले गए'नगदी में हमें 4 हजार रुपये मिले थे. बाकी सब सामान जल गया था. इलाज के दौरान उनके गले में जो चेन और हाथ के ब्रेसलेट थे, वो डॉक्टर ने उतार लिए थे और पुलिस को दे दिए थे.
पंत के एक्सीडेंट के वक्त क्या हालात थे, इसके बारे में रजत ने बताया कि गाड़ी में आग लगी हुई थी और पंत बाहर पड़े थे. उनकी पीठ छिली हुई थी. सिर पर और माथे पर चोट लगी थी. रजत ने बताया,
सबसे पहले हमने उन्हें (ऋषभ पंत को) देखा था. कार एक्सीडेंट के कारण उनकी हालत बहुत गंभीर थी. बस कंडक्टर सुशील जी ने 108 नंबर पर और पुलिस को कॉल की थी. उस टाइम हम नहीं जानते थे कि वो कौन हैं. कंबल, दुपट्टा जो भी था, हमने डाला. उसके बाद एंबुलेंस आई. एंबुलेंस में बैठाकर रुड़की के सबसे नजदीकी हॉस्पिटल ले गए. हमने उन्हें भर्ती कराया.
ऋषभ पंत का 30 दिसंबर को एक्सीडेंट हो गया था. पंत दिल्ली से अपने घर रुड़की जा रहे थे. सुबह 5 बजे के आसपास ये एक्सीडेंट हुआ था. हादसे के दौरान वो कार में अकेले थे. एक्सीडेंट की वजह से ऋषभ की कलाई, कमर, घुटने और सिर पर चोट आई थी. BCCI की मेडिकल टीम पंत की हालत पर नजर बनाए हुए है. माना जा रहा है की चोट की वजह से पंत को करीब 6 महीने के लिए क्रिकेट से दूर होना पड़ सकता है.
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