वॉटर कैनन चली तो पानी की धुन पर थिरकने लगे. कंटीले बैरिकेड कंधे पर उठा कर ले गए. लाठियां तो चलीं लेकिन पुलिस पर जवाबी हमले नहीं हुए. रास्ता बदल विधानसभा के दरवाजे तक पहुंच गए. पतली गली पकड़ी और विधानसभा के दरवाज़े पर दस्तक दे दी. इस देश की याददाश्त में हाल-फ़िलहाल ऐसी तस्वीरें नहीं देखी गई थीं. विधानसभा के अंदर पूरी सरकार बैठी थी. मंत्री बैठे थे. विधायक बैठे थे. और बाहर आंदोलनकारी युवाओं ने विधानसभा को ही घेर लिया.
रांची में पुलिस-प्रोटेस्टर्स के बीच 'तू डाल डाल मैं पात पात' का खेल, दिनभर की बड़ी अपडेट्स
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च किया. इस दौरान पुलिस के साथ उनका हिंसक टकराव हुआ. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का भी इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बावजूद छात्र विधानसभा की बाउंड्री तक पहुंचने में कामयाब रहे.

सरकार से बात नहीं बनी
उम्र के 50वें पड़ाव पर पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन. जन्मदिन पर ऐसे तोहफे तो कतई नहीं चाह रहे होंगे. पर अपनी मांगों पर अड़े आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. विधानसभा के सामने बैठ गए जहां से सिर्फ मुख्यमंत्री ही आते-जाते हैं. लेकिन इन तस्वीरों के आने से पहले रांची की सड़कों पर जो हुआ वो कुछ अनदेखा-अनसुना था. कल सरकार और छात्रों के बीच पांच घंटे की बातचीत तो हुई. पर बात बनी नहीं. आज 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा घेराव का कॉल दिया था. सरकार ने सारी मांगों पर बात नहीं बनी तो आज सुबह 10 बजे पुरानी विधानसभा के पास जमा होने के लिए कहा गया. छात्र सुबह से ही जुटना शुरू हो गए. और वहीं से मार्च शुरू हुआ.
बैरिकेड तोड़कर बढ़े आगे
नई विधानसभा. जहां अब सदन की कार्यवाही होती है. उसके 750 मीटर के दायरे में BNS की धारा 163 लागू थी. जिसे पहले CrPc की धारा 144 कहते थे. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने व्यवस्था भी की थी. पहला पड़ाव था बैरिकेड का. छात्रों को विधानसभा से दूर ही रोकने के लिए पुलिस ने सड़क पर बैरिकेड लगाए थे. कुछ-कुछ दूर पर बैरिकेडिंग की गई थी. लेकिन छात्रों ने उसे कुछ समझा ही नहीं. कुछ ही देर में बैरिकेडिंग जमीन पर बिछी हुई थी और छात्र आगे निकल गए.
कंटीली बैरिकेडिंग को उखाड़कर फेंक दिया
अगला पड़ाव था कंटीली बैरिकेडिंग. पुलिस ने ऊंचे बैरिकेड्स के ऊपर कंटीली तार लगा रखी थी. ये सोचकर कि अगर नॉर्मल वाले बैरिकेड्स पार भी कर लिए तो इनको कैसे तोड़ पाएंगे. लेकिन छात्रों ने तार वाले बैरिकेड्स को ऐसे तोड़ा जैसे पेड़ झुलाकर आम तोड़े जाते हैं. न ये बैरिकेड टिक पाया न वो. आंदोलनकारियों ने उखाड़कर फेंक दिया. जब बैरिकेंडिंग भी नहीं टिकी तो प्रशासन ने बल प्रयोग किया. सबसे पहले वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. आमतौर पर कोई प्रदर्शन होता है और पुलिस वॉटर कैनन चलाती है. तो भीड़ भागती है. प्रदर्शनकारी पीछे हट जाते हैं. लेकिन रांची में छात्रों पर जैसे जैसे वॉटर कैनन चली. छात्र झूमते नज़र आए.
वॉटर कैनन का भी कोई असर नहीं
बैरिकेडिंग, वॉटर कैनन दोनों को छात्र धता बता चुके थे. लेकिन लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखना भी पुलिस-प्रशासन की जिम्मेदारी थी. छात्र हर ब्लॉकेज को पार कर धीरे-धीरे विधानसभा के नज़दीक पहुंच रहे थे. ऐसी स्थिति में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. छात्रों पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ. इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठियां भी भांजीं. कुछ प्रदर्शनकारियों को चोटें आई हैं.
पुलिस ने विधानसभा के नज़दीक में सड़क पर बैरिकेडिंग की थी. वहां भारी पुलिसबल तैनात था. तो प्रदर्शनकारियों ने शॉर्टकट मार दिया. बगल में खेतों से होते हुए कंटीला रास्ता पकड़ा और सीधे विधानसभा की ओर कूच कर दिया.
विधानसभा की बाउंड्री तक पहुंचे
शाम करीब 4 बजे के आसपास छात्रों ने विधानसभा के गेट के सामने धावा बोल दिया था. अंदर विधानसभा की कार्रवाई चल रही है और बाहर प्रदर्शनकारी पहुंच गए. शाम साढ़े चार बजे देवेंद्र महतो भी विधानसभा तक पहुंच गए. विधानसभा का घेराव एक तरह से सांकेतिक प्रदर्शन था. इस पूरे प्रदर्शन की सबसे अच्छी बात यही थी कि सबकुछ शांतिपूर्ण हुआ. विधानसभा पहुंचने के बाद कुछ ही देर में ज्यादातर छात्र वहां से लौट गए. हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी विधानसभा के गेट पर ही बैठ गए. इन छात्रों को हटाने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया. कुछ लाठियां भी भांजीं.
पुलिस ने माना आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठियां चलीं
रांची सिटी एसपी पारस राणा ने पुष्टि की है कि प्रदर्शनकारियों का एक समूह विधानसभा की बाउंड्री तक पहुंच गया. उन्होंने बताया कि टकराव में चार जवान और चार से पांच प्रदर्शनकारी मामूली तौर पर घायल हुए हैं. सिटी एसपी ने बताया,
पत्थरबाजी के दौरान एक जगह आंसू गैस के गोले दागे गए थे. कई लेयर की सिक्योरिटी होने के बावजूद उग्र भीड़ विधानसभा की बाउंड्री तक पहुंच गई. हालांकि 80-90 फीसदी प्रदर्शनकारी शांति से थे. लेकिन 15-20 फीसदी ऐसे थे जिन्होंने हुड़दंग और पथराव किया. हुड़दंग की वजह से हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें चार से पांच स्टूडेंट घायल हुए हैं.
पारस राणा ने आगे बताया कि पुलिस द्वारा जितना संयम बरता जा सकता था वो किया गया. अधिकतर स्टूडेंट यहां से लौट गए हैं. विधानसभा घेराव संपन्न हो चुका है. दूसरी तरफ कई महिला प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उन पर लाठीचार्ज किया है.
नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रही?
कांग्रेस सासंद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहु्ल गांधी ने झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस एक्शन का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट के ऊपर किसी भी तरह की हिंसा की वे निंदा करते हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसका दोष केंद्र सरकार के मत्थे मढ़ दिया. अखिलेश यादव ने कहा,
झारखंड के बच्चों से सरकार बातचीत कर रही है. उम्मीद है रास्ता निकलेगा. लेकिन असली जिम्मेदारी भारत सरकार की है. केंद्र सरकार नौकरी देने के लिए कुछ नहीं कर रही है.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करके विधानसभा मार्च के दौरान स्थिति संभालने के लिए पुलिस के अधिकारियों को धन्यवाद दिया है. साथ ही इस पोस्ट में उन्होंने छात्रों को भरोसा दिया है, कि उनकी सरकार छात्रों की मांगों पर एक्शन लेगी और परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करेगी.
देवेंद्रनाथ महतो ने क्या कहा?
नौ दिन से अनशन पर बैठे स्टूडेंट लीडर देवेंद्र महतो भी इस मार्च में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि वे भूख हड़ताल पर होने के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने आए हैं. उन्होंने छात्रों पर वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठियां चलवाने के लिए सरकार को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा,
सरकार वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का सहारा ले रही है. वो डर गई है. हम देखेंगे कि उनके आंसू गैस और लाठी में कितना दम है. आज के प्रदर्शन के बाद अगर सरकार नहीं सुनती है तो इससे साबित होता है कि खुद मुख्यमंत्री धांधली में शामिल हैं.
देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीन राउंड की बात हो चुकी है. अब सरकार से कोई बात नहीं होगी. उन्होंने कहा कि अब छात्रों की बात नहीं मानी जाती है तो सरकार की कुर्सी हिल सकती है.
वीडियो: झारखंड विधानसभा में JPSC और JSSC पर क्या होगा? जयराम महतो ने बताया














