# Prithvi Shawआज अपनी स्टोरी की शुरुआत हमने भूतकाल से की. क्यों? क्योंकि वर्तमान और भविष्य से बहुत उम्मीद नहीं दिख रही. और जब भी ऐसा होता है, इंसान भूतकाल की ओर देखता है. लेकिन हम नहीं चाहेंगे कि हमारी तरह पृथ्वी शॉ भी भूतकाल देखकर ही खुश हों. सिर्फ 23 साल के पृथ्वी गजब फॉर्म में चल रहे हैं. T20 में सेंचुरी, वनडे (लिस्ट-ए) में डबल सेंचुरी और फर्स्ट क्लास में ट्रिपल सेंचुरी. पृथ्वी लगातार रन बना रहे हैं.
और इन तमाम रन बनाने के बाद भी उन्हें टीम इंडिया में जगह नहीं मिल रही. अफवाहें हैं कि उनके साथ कुछ गंभीर समस्या है. ये समस्या क्या है? मैं नहीं जानता. लेकिन इतना जरूर पता है कि इस गंभीर समस्या के चलते BCCI ने पृथ्वी को टीम इंडिया में शामिल ना करने की कसम सी खा रखी है. और ये कसम अभी टूटती नहीं दिख रही.
क्योंकि मेरे पेशे से जुड़े दिग्गज कई दफ़ा दावा कर चुके हैं कि BCCI अभी पृथ्वी की ओर बंद आंखों से भी नहीं देख रही. लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि अगर ऐसा ही है, तो बोर्ड के सेक्रेटरी जय शाह ने पृथ्वी को बधाई क्यों दी? मतलब उनके ऊपर कोई मोरल प्रेशर तो था नहीं? टीम सेलेक्शन जैसी तमाम चीजें हैं जिन पर वह खुले में नहीं बोलते. लेकिन उन्होंने पृथ्वी के 379 रन की पारी की खुलकर तारीफ की.
उन पर गर्व जताया. अगर उनके ट्वीट की बातें सच हैं, दिल से निकली हैं. तो पृथ्वी को मौके क्यों नहीं मिल रहे? टेस्ट और वनडे में रोहित, शुभमन और ईशान के आगे पृथ्वी को मौके नहीं मिल रहे. कुछ हद तक ये बात समझ आती है. लेकिन T20I? यहां क्या समस्या है? यहां तो हमें शुरुआत में एक फोड़ने वाला बैटर चाहिए ही ना? कब तक हम मेडन ओवर राहुल के भरोसे रहेंगे?
और उन्हें हटाया तो शुभमन को ले आए. जिनके अप्रोच पर भी हजारों सवाल हैं. जबकि पृथ्वी IPL से लेकर घरेलू T20 तक, समान अंदाज में ताबड़तोड़ रन बना रहे हैं. फिर भी उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा. जबकि इस फॉर्मेट में हमारी ओपनिंग एकदम घटिया, निंदनीय, भर्त्सना के योग्य है. हम सदियों पुरानी अप्रोच से क्रिकेट का ये फॉर्म खेल रहे हैं. और वो भी तब, जब हमारे पास एकदम ताजा तरीके से ये फॉर्मेट खेलने वाला बंदा मौजूद है.
फिर भी हम उसे मौके नहीं दे रहे. एक और बात. अगर पृथ्वी के साथ इतनी ही समस्याएं हैं, जितनी बाहर बैठे लोग बता रहे हैं. तो BCCI सेक्रेटरी ने उन्हें बधाई देने का लोड क्यों लिया? और अगर बधाई दी ही है, तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए? दूसरी बात, अगर बाहर बैठे लोग पृथ्वी के खिलाफ़ बढ़ा-चढ़ाकर बातें कर रहे हैं. तो इनका काउंटर क्यों नहीं किया जाता?
और अगर ये बातें सही हैं, और इसके बाद भी जय शाह पृथ्वी से इतने प्रभावित हैं, तो पृथ्वी को सुधारने के लिए कुछ क्यों नहीं किया जा रहा? क्या BCCI भारतीय क्रिकेटर्स की गार्जियन नहीं है? अगर है, तो गार्जियन जैसे काम क्यों नहीं करती? और अगर नहीं है तो फिर... जाने दीजिए. क्या कहा जाए.
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