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पृथ्वी शॉ को सिर्फ बधाई देंगे, या टीम में भी लेंगे जय शाह?

पृथ्वी के साथ समस्या क्या है?

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जय शाह-पृथ्वी शॉ (फोटो - PTI)

'कई बार, आप फ्रस्ट्रेट होते हैं. आपको पता होता है कि आप सबकुछ सही कर रहे हैं. आपको पता होता है कि आपकी प्रोसेस सही है, आप अपने लिए ईमानदार हैं, फील्ड पर और फील्ड के बाहर भी आप अपने करियर के साथ अनुशासित हैं. फिर भी लोग अलग तरीके से बात करते हैं. वो लोग, जो आपको जानते तक नहीं, आपको जज करते हैं.' - पृथ्वी शॉ.

साल 2013 की बात है. एक 14 साल के लड़के ने क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचा दिया. अख़बारों से लेकर टीवी तक, उसी के चर्चे होने लगे. और इस चर्चा के पीछे वजह भी बड़ी थी. इस बच्चे ने मुंबई के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट हैरिस शील्ड के एक मैच में अपने स्कूल के लिए 546 रन कूट डाले थे. 330 गेंदों की इस पारी में 85 चौके और पांच छक्के शामिल रहे.

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फास्ट फॉरवर्ड नवंबर 2016. पृथ्वी शॉ नाम का ये लड़का यूथ एशिया कप जीतने वाली इंडियन अंडर-19 टीम का हिस्सा रहा. दो महीने बाद शॉ ने रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल के जरिए अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया. तमिलनाडु के खिलाफ हुए इस मैच की दूसरी पारी में शॉ ने सेंचुरी मारी. सितंबर 2017 में सिर्फ 17 साल के शॉ दलीप ट्रॉफी डेब्यू पर सेंचुरी मारने वाले सबसे युवा प्लेयर बने. उन्होंने सचिन तेंडुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा.

शॉ की कप्तानी में भारतीय अंडर-19 टीम ने 2018 का वर्ल्ड कप जीता. इसी वर्ल्ड कप के दौरान दिल्ली डेयरडेविल्स ने 1.2 करोड़ में उन्हें अपने साथ जोड़ लिया. पहले ही सीजन शॉ ने 153 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए. इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज़ और साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ़ घर में और बाहर बेहतरीन प्रदर्शन किया. साल 2018 में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ राजकोट टेस्ट में डेब्यू किया. डेब्यू पर सेंचुरी मारने वाले सबसे युवा भारतीय बने.

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# Prithvi Shaw

आज अपनी स्टोरी की शुरुआत हमने भूतकाल से की. क्यों? क्योंकि वर्तमान और भविष्य से बहुत उम्मीद नहीं दिख रही. और जब भी ऐसा होता है, इंसान भूतकाल की ओर देखता है. लेकिन हम नहीं चाहेंगे कि हमारी तरह पृथ्वी शॉ भी भूतकाल देखकर ही खुश हों. सिर्फ 23 साल के पृथ्वी गजब फॉर्म में चल रहे हैं. T20 में सेंचुरी, वनडे (लिस्ट-ए) में डबल सेंचुरी और फर्स्ट क्लास में ट्रिपल सेंचुरी. पृथ्वी लगातार रन बना रहे हैं.

और इन तमाम रन बनाने के बाद भी उन्हें टीम इंडिया में जगह नहीं मिल रही. अफवाहें हैं कि उनके साथ कुछ गंभीर समस्या है. ये समस्या क्या है? मैं नहीं जानता. लेकिन इतना जरूर पता है कि इस गंभीर समस्या के चलते BCCI ने पृथ्वी को टीम इंडिया में शामिल ना करने की कसम सी खा रखी है. और ये कसम अभी टूटती नहीं दिख रही.

क्योंकि मेरे पेशे से जुड़े दिग्गज कई दफ़ा दावा कर चुके हैं कि BCCI अभी पृथ्वी की ओर बंद आंखों से भी नहीं देख रही. लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि अगर ऐसा ही है, तो बोर्ड के सेक्रेटरी जय शाह ने पृथ्वी को बधाई क्यों दी? मतलब उनके ऊपर कोई मोरल प्रेशर तो था नहीं? टीम सेलेक्शन जैसी तमाम चीजें हैं जिन पर वह खुले में नहीं बोलते. लेकिन उन्होंने पृथ्वी के 379 रन की पारी की खुलकर तारीफ की.

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उन पर गर्व जताया. अगर उनके ट्वीट की बातें सच हैं, दिल से निकली हैं. तो पृथ्वी को मौके क्यों नहीं मिल रहे? टेस्ट और वनडे में रोहित, शुभमन और ईशान के आगे पृथ्वी को मौके नहीं मिल रहे. कुछ हद तक ये बात समझ आती है. लेकिन T20I? यहां क्या समस्या है? यहां तो हमें शुरुआत में एक फोड़ने वाला बैटर चाहिए ही ना? कब तक हम मेडन ओवर राहुल के भरोसे रहेंगे?

और उन्हें हटाया तो शुभमन को ले आए. जिनके अप्रोच पर भी हजारों सवाल हैं. जबकि पृथ्वी IPL से लेकर घरेलू T20 तक, समान अंदाज में ताबड़तोड़ रन बना रहे हैं. फिर भी उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा. जबकि इस फॉर्मेट में हमारी ओपनिंग एकदम घटिया, निंदनीय, भर्त्सना के योग्य है. हम सदियों पुरानी अप्रोच से क्रिकेट का ये फॉर्म खेल रहे हैं. और वो भी तब, जब हमारे पास एकदम ताजा तरीके से ये फॉर्मेट खेलने वाला बंदा मौजूद है.

फिर भी हम उसे मौके नहीं दे रहे. एक और बात. अगर पृथ्वी के साथ इतनी ही समस्याएं हैं, जितनी बाहर बैठे लोग बता रहे हैं. तो BCCI सेक्रेटरी ने उन्हें बधाई देने का लोड क्यों लिया? और अगर बधाई दी ही है, तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए? दूसरी बात, अगर बाहर बैठे लोग पृथ्वी के खिलाफ़ बढ़ा-चढ़ाकर बातें कर रहे हैं. तो इनका काउंटर क्यों नहीं किया जाता?

और अगर ये बातें सही हैं, और इसके बाद भी जय शाह पृथ्वी से इतने प्रभावित हैं, तो पृथ्वी को सुधारने के लिए कुछ क्यों नहीं किया जा रहा? क्या BCCI भारतीय क्रिकेटर्स की गार्जियन नहीं है? अगर है, तो गार्जियन जैसे काम क्यों नहीं करती? और अगर नहीं है तो फिर... जाने दीजिए. क्या कहा जाए.

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