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नेमार का संन्यास: पेले से ज्यादा गोल, मेसी-रोनाल्डो से टक्कर, फिर भी अधूरी 'जोगा बोनिटो' के जादूगर की कहानी?

Neymar Junior Retires: 6 जुलाई 2026 को फीफा वर्ल्ड कप से ब्राजील के बाहर होते ही नेमार जूनियर ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास ले लिया. पेले का रिकॉर्ड तोड़ने वाले और दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी रहे नेमार के करियर, चोटों, मेसी-रोनाल्डो के साए और 'जोगा बोनिटो' के खत्म होने की पूरी इन साइड स्टोरी.

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फुटबॉल की दुनिया में क्या है नेमार होने का मतलब? (फोटो- AFP)

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  • 6 जुलाई 2026 को फीफा वर्ल्ड कप के राउंड-ऑफ-16 मैच में ब्राजील 2-1 से नॉर्वे से हार गया, और नेमार ने इस मैच के बाद अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कह दिया।
  • नेमार के विदाई मैच के पीछे उनकी लगातार चोटें और मेसी व रोनाल्डो जैसे दिग्गजों की छाया में छुपी हुई दबाव की स्थितियां थीं, जिन्होंने उनके करियर को प्रभावित किया।
  • नेमार की विदाई से ब्राजील फुटबॉल ने एक युग खो दिया है, और अब उनकी विरासत को आंकड़ों के साथ-साथ उनके खेल के रोमांटिसिज्म के कारण भी याद किया जाएगा।

न्यू जर्सी का मेटलाइफ स्टेडियम… चारों तरफ पसरा सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ब्राजीलियाई फैंस की सिसकियां... तारीख 6 जुलाई 2026… फीफा वर्ल्ड कप का राउंड-ऑफ-16 मैच अभी-अभी खत्म हुआ है. स्कोरबोर्ड पर लिखा है- नॉर्वे 2, ब्राजील 1. पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है. मैदान के बीचों-बीच पीले रंग की 10 नंबर की जर्सी पहने एक खिलाड़ी घुटनों के बल बैठा है. वो अपने चेहरे को दोनों हाथों से छुपाए है, लेकिन उसकी कांपती हुई पीठ बता रही है कि वो रो रहा है. ये नेमार जूनियर हैं. ब्राजील फुटबॉल का वो शहंशाह जिसके पैरों में कभी जादू था, आज उसकी आंखों में सिर्फ बेबसी है.

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मैच खत्म होने के कुछ ही मिनटों बाद जब नेमार मिक्स्ड ज़ोन में आते हैं, तो उनके चेहरे पर छाई मायूसी सब कुछ बयां कर देती है. वो भारी आवाज में कहते हैं, 

"सब खत्म हो चुका है. ये ब्राजील के लिए मेरा आखिरी मैच था. मैं अब दोबारा इस जर्सी में मैदान पर नहीं उतरूंगा." 

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ये सिर्फ एक मैच की हार नहीं थी, ये फुटबॉल के एक बेहद खूबसूरत, कॉन्ट्रोवर्शियल और मैजिकल चैप्टर का दर्द भरा ‘The End’ था. जहां से कहानी शुरू हुई थी, नियति ने उसे वहीं लाकर इतनी क्रूरता से खत्म किया कि देखने वाले भी दंग रह गए.

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नेमार का शुरुआती दौर (फोटो- AFP)

चैप्टर1: 16 साल पहले की बात...

अब जरा समय के पहिए को थोड़ा पीछे घुमाते हैं. पूरे 16 साल पीछे. साल 2010. यही मेटलाइफ स्टेडियम था. एक 18 साल का दुबला-पतला लड़का, जिसके सिर पर अजीब सा मोहाक हेयरस्टाइल था, पहली बार ब्राजील की सीनियर टीम के लिए पीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरा था. उस मैच में उसने अमेरिका के खिलाफ एक शानदार हेडर से गोल दागा था. तब उसके चेहरे पर एक अल्हड़, बेफिक्र मुस्कान थी. उसे देखकर लगता था कि वो फुटबॉल खेलने नहीं, बल्कि मैदान पर जिंदगी का जश्न मनाने आया है. किसे पता था कि ठीक 16 साल बाद, इसी मैदान की घास उसके आंसुओं से भीगेगी और वो इसी स्टेडियम को अपनी विदाई का गवाह बनाएगा. इसी को शायद कर्मा चक्र कहते हैं, जहां आपकी यात्रा का पहला कदम ही आपके आखिरी कदम की जमीन तैयार करता है.

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'जोगा बोनिटो' दौर का खिलाड़ी (फोटो-AFP)

चैप्टर2: 'जोगा बोनिटो' का आखिरी सिपाही

नेमार होना असल में क्या है? क्या ये सिर्फ बहुत सारे पैसे कमाना, महंगे विज्ञापनों में आना और इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स रखना है? नहीं. नेमार होने का असली मतलब फुटबॉल के उस रोमांटिसिज्म को जीना है, जिसे ब्राजील में 'जोगा बोनिटो' यानी 'खूबसूरत खेल' कहा जाता है. ये वो फुटबॉल है जो सिर्फ जीतने के लिए नहीं खेला जाता, बल्कि देखने वालों को आनंद देने के लिए खेला जाता है. ये वो फुटबॉल है जो सड़कों पर, सांबा डांस की धुनों पर और बिना किसी डर के खेला जाता है.

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नेमार की अहमियत को बयां कहते हुए सीनियर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट पद्मपति शर्मा कहते हैं,

"मॉर्डन फुटबॉल चेंज हो चुका है, एकदम रोबॉटिक टाइप. कोच टैक्टिकल बोर्ड पर स्ट्रैटेजी बनाते हैं और खिलाड़ी जिम में भारी-भरकम बॉडी. मैच के दौरान लगता है कि कोच का आदेश ‘माहिष्मति का कानून’ (अरे वो बाहुबली वाला) बन चुका है. आज टीमों को ऐसे प्लेयर चाहिए जो मशीन की तरह उनकी प्लानिंग को मैदान पर लागू कर सकें. लेकिन नेमार? नेमार उस मशीनरी के बीच एक कल्ट हीरो थे. वो मैदान पर अपनी मर्जी के मालिक थे."

दुनिया भर की स्पोर्ट्स मैगजीन्स और पोर्टल पर मौजूद आंकड़े गवाह हैं कि जब नेमार के पास गेंद होती थी, तो स्टेडियम में बैठे लोगों की सांसें थम जाती थीं. वो पारंपरिक विंगर या स्ट्राइकर नहीं थे, वो एक कलाकार थे. उनका ड्रिबल करना किसी सांबा डांसर की तरह लयबद्ध होता था. 

वो डिफेंडर्स को न सिर्फ छकाते थे, बल्कि अपने जादुई टच से उन्हें चिढ़ाते भी थे. 'रेनबो फ्लिक', 'नटमेग', और गेंद पर पैर रखकर विरोधी को अपनी तरफ बुलाना- ये सब नेमार की पहचान थी. आलोचक इसे कई बार विरोधी का अपमान कहते थे, लेकिन नेमार के लिए ये खेल की सहजता थी. उनके जाने से फुटबॉल की दुनिया से वो 'अल्हड़पन' और 'मस्ती' हमेशा के लिए खत्म हो गई है, जो कभी इस खेल की आत्मा हुआ करती थी.

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रोनाल्डो-नेमार और मेसी (फोटो- इंडिया टुडे)

चैप्टर3: मेसी और रोनाल्डो के साए में घुटती महानता

नेमार के पूरे करियर को अगर एक ट्रैजिडी फिल्म की तरह देखें तो उनके हर तकलीफ, हर अधूरेपन की सबसे बड़ी वजह रही, उनका 'एलियंस के युग' में जन्म लेना. फुटबॉल का वो दौर जब एक तरफ लियोनेल मेसी नाम का जादूगर था और दूसरी तरफ क्रिस्टियानो रोनाल्डो नाम की गोल मशीन. इन दोनों दिग्गजों ने करीब डेढ़ दशक तक पूरी दुनिया के फुटबॉल पर अपना एकाधिकार जमाए रखा. बैलन डी'ओर (Ballon d'Or) जैसी प्रतिष्ठित ट्रॉफियां इन दोनों के बीच ही बंटती रहीं.

इस दौर में अगर किसी तीसरे इंसान ने उठकर ये दावा किया कि वो दुनिया का बेस्ट बन सकता है, तो वो सिर्फ नेमार थे. सांतोस से निकलकर जब वो 2013 में बार्सिलोना पहुंचे, तो उन्होंने मेसी और लुइस सुआरेज के साथ मिलकर 'MSN' नाम की वो ऐतिहासिक तिकड़ी बनाई, जिसने यूरोप के बड़े-बड़े डिफेंस को मलबे में तब्दील कर दिया. साल 2015 में बार्सिलोना ने ट्रेबल (ला लीगा, कोपा डेल रे और चैंपियंस लीग) जीता, तो उसमें नेमार की भूमिका किसी से कम नहीं थी. लेकिन बार्सिलोना में रहकर वो चाहे जितना अच्छा खेल लेते, हेडलाइन हमेशा मेसी के नाम की ही बनती थी.

साल क्लब ट्रांसफर फीस (मिलियन यूरो) मुख्य उपलब्धि
2013 सांतोस से बार्सिलोना 88.2 ला लीगा, चैंपियंस लीग ट्रेबल (2015)
2017 बार्सिलोना से पीएसजी 222 फुटबॉल इतिहास का सबसे महंगा ट्रांसफर
2023 पीएसजी से अल-हिलाल 90 मिडिल ईस्ट फुटबॉल का नया चेहरा

(नोट: AI की मदद से तैयार ग्राफिक्स)

यही वो कशमकश थी जिसने नेमार को एक बड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया. वो मेसी के साए से बाहर निकलना चाहते थे. वो दुनिया का 'नंबर-1' खिलाड़ी बनना चाहते थे. इसी चाहत में साल 2017 में उन्होंने वो कदम उठाया जिसने फुटबॉल जगत को हिलाकर रख दिया. ट्रांसफरमार्केट प्लेयर प्रोफाइल एंड फीस रिकॉर्ड्स के मुताबिक वो 222 मिलियन यूरो की रिकॉर्ड फीस पर पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) चले गए. 

ये आज भी फुटबॉल इतिहास का सबसे महंगा ट्रांसफर है. पीएसजी उन्हें अपना मुख्य चेहरा बनाना चाहता था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. वो पेरिस में भी नंबर-1 बनने के लिए जूझते रहे. कभी चोटों ने रास्ता रोका, तो कभी किलियन एम्बाप्पे जैसे नए सितारे के उभार ने उन्हें फिर से दूसरे नंबर पर धकेल दिया. वो जिस साए से चैप्टररहे थे, अंततः उसी साए के इर्द-गिर्द उनकी महानता घुटती रही.

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पेले से ज्यादा गोल (फोटो- AI)

चैप्टर4: पेले से बड़े आंकड़े, लेकिन विरासत अधूरी

अगर आप सिर्फ आंकड़ों के चश्मे से नेमार के करियर को देखेंगे, तो आपको लगेगा कि वो ब्राजील के इतिहास के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं. उन्होंने ब्राजील के लिए 128 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेले और 79 से ज्यादा गोल दागे. उन्होंने महान पेले के 77 गोलों के उस सर्वकालिक रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया, जिसे कभी नायाब माना जाता था. पेले जैसे भगवान का दर्जा पाए खिलाड़ी से ज्यादा गोल होना किसी भी फुटबॉलर के लिए अमर होने के लिए काफी होना चाहिए था.

लेकिन ब्राजील की फुटबॉल संस्कृति बहुत क्रूर है. वहां की जनता सिर्फ आंकड़ों की पूजा नहीं करती. जब ब्राजील में सर्वकालिक महान खिलाड़ियों की लिस्ट बनती है, तो लोग पेले, रोनाल्डो नाज़ारियो, रोमारियो, रिवाल्डो या रोनाल्डिन्हो का नाम पहले लेते हैं, और नेमार का नाम लेने से कतराते हैं. इस कड़वे सच की वजह सिर्फ एक है- 'वर्ल्ड कप ट्रॉफी'. ब्राजील में पीली जर्सी पहनने वाले हर महान खिलाड़ी ने देश को विश्व विजेता बनाया है. रोनाल्डो ने 2002 में बनाया, रोमारियो ने 1994 में बनाया, और पेले ने तो तीन बार ये कारनामा किया.

नेमार ने चार वर्ल्ड कप (2014, 2018, 2022, 2026) खेले, लेकिन वो अपनी टीम को फाइनल तक भी नहीं ले जा सके. और के दौर की सबसे बड़ी विडंबना है कि हमें सिर्फ चमचमाती ट्रॉफियां ही याद रहती हैं. किसी खिलाड़ी के पैरों का जादुई सांबा डांस नहीं. नेमार के पास क्लब लेवल की हर ट्रॉफी थी, उनके पास व्यक्तिगत आंकड़े थे, लेकिन उनके पास वो एक सोने की ट्रॉफी नहीं थी जो उन्हें ब्राजील के फुटबॉल के 'ओलंपस' पर पेले के बगल में बैठा देती. यही वजह है कि उनकी इतनी बड़ी विरासत हमेशा अधूरी ही रहेगी.

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नेमार की लाइफस्टाइल (फोटो- सोशल मीडिया)

चैप्टर5: चोटें, पार्टी लाइफस्टाइल और 'व्हाट इफ' का मलाल

नेमार के जिंदगी की दास्तान ‘अगर-मगर’, ‘If-But’ या फिर ‘What If’ के मलाल के बिना पूरी हो ही नहीं सकती. उनका शरीर मानो उनके टैलेंट का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया था. अल-हिलाल मेडिकल बुलेटिन एंड इंजरी रिपोर्ट्स (2023-2024) के मुताबिक जब-जब नेमार अपने करियर के सबसे बेहतरीन फॉर्म में होते थे, उनका टखना (ankle) या उनकी पीठ जवाब दे जाती थी. इसकी शुरुआत हुई 2014 के घरेलू वर्ल्ड कप से. पूरा ब्राजील उम्मीद लगाए बैठा था कि नेमार उन्हें अपनी धरती पर चैंपियन बनाएंगे. लेकिन क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के जुआन जुनिगा ने उनकी पीठ पर ऐसा घुटना मारा कि नेमार की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया. वो सेमीफाइनल से बाहर हो गए और उसके बाद जो हुआ वो इतिहास का सबसे बड़ा काला पन्ना है- जर्मनी ने ब्राजील को 7-1 से रौंद दिया. अगर नेमार उस मैच में होते, तो शायद वो शर्मिंदगी ना झेलनी पड़ती.

इसके बाद पीएसजी के दिनों में भी हर बड़े चैंपियंस लीग नॉकआउट मैच से ठीक पहले नेमार का दाहिना टखना मुड़ जाता था. साल 2023 में जब वो सऊदी अरब के क्लब अल-हिलाल गए, तो वहां भी कुछ ही मैचों के बाद उनके घुटने का एसीएल (ACL) टूट गया, जिसने उन्हें महीनों के लिए मैदान से दूर कर दिया.

टूर्नामेंट साल चोट का प्रकार टीम पर असर
फीफा वर्ल्ड कप 2014 रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर सेमीफाइनल में जर्मनी से 7-1 की हार
चैंपियंस लीग (PSG) 2018, 2019 पैर के पंजे की हड्डी (Metatarsal) पीएसजी नॉकआउट से बाहर
अल-हिलाल (सऊदी) 2023 एसीएल (ACL) और मेनिस्कस टियर पूरे सीजन से बाहर

(नोट: AI की मदद से तैयार ग्राफिक्स)

लेकिन इस सिक्के का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे उनके आलोचक बार-बार उठाते हैं. आलोचकों का मानना है कि नेमार की चोटें सिर्फ बदकिस्मती नहीं थीं, बल्कि उनकी ग्लैमरस लाइफस्टाइल का नतीजा थीं. मैदान के बाहर उनकी लेट-नाइट पार्टियां, हर साल अपनी बहन के जन्मदिन पर ब्राजील उड़ जाना, कार्निवल में शामिल होना और पोकर के प्रति उनका जुनून- इन सबने उनके शरीर को वो रिकवरी टाइम नहीं दिया जिसकी एक टॉप एथलीट को जरूरत होती है. फैंस इसे किस्मत का दोष मानते हैं, जबकि एक्सपर्ट्स इसे अनुशासन की कमी कहते हैं. लेकिन सच जो भी हो, फुटबॉल लवर्स के जहन में हमेशा ये सवाल रहेगा कि ‘अगर नेमार पूरी तरह फिट रहते, तो वो किस ऊंचाई तक पहुंच सकते थे?’

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नेमार का अलविदा (फोटो- AFP)

चैप्टर-6: रियो का सोना और अलविदा

तो क्या नेमार का ब्राजीलियाई जर्सी में सफर सिर्फ आंसुओं और मलाल की कहानी है? नहीं. विदाई के वक्त भले ही उनकी आंखें नम हों, लेकिन उन्होंने ब्राजील के फुटबॉल इतिहास को एक ऐसा लम्हा दिया है जो खुद महान पेले भी कभी नहीं दे पाए थे. वो लम्हा था साल 2016 का रियो ओलंपिक.

ब्राजील ने फुटबॉल में सब कुछ जीता था, लेकिन उनके पास कभी ओलंपिक का 'गोल्ड मेडल' नहीं था. ये एक ऐसा खालीपन था जो उनके समृद्ध इतिहास को खटकता था. वो भी घरेलू मैदान यानी मरकाना स्टेडियम में, जहां 1950 वर्ल्ड कप की हार का भूत आज भी भटकता था. फाइनल में मुकाबला जर्मनी से था- वही जर्मनी जिसने दो साल पहले 7-1 का घाव दिया था. नेमार ने उस मैच में फ्री-किक से एक शानदार गोल किया. मैच पेनल्टी शूटआउट तक गया. आखिरी पेनल्टी लेने की जिम्मेदारी नेमार के कंधों पर थी. पूरे देश का दबाव, करोड़ों लोगों की उम्मीदें और इतिहास का बोझ. नेमार ने दौड़ते हुए गेंद को नेट के कोने में डाल दिया और ब्राजील को उसका पहला ओलंपिक गोल्ड दिला दिया. उस जीत के बाद नेमार मैदान पर गिरकर रोने लगे थे. वो आंसू राहत के थे, देश का कर्ज उतारने के थे.

आज जब नेमार मेटलाइफ स्टेडियम में रोते हुए इंटरनेशनल फुटबॉल को अलविदा कह रहे हैं, तो हमें उस खिलाड़ी को याद रखना चाहिए जिसने हमें फुटबॉल से प्यार करना सिखाया. वो परफेक्ट नहीं थे. वो गिरते थे, वो एक्टिंग करते थे, वो पार्टियां करते थे, लेकिन जब उनके पैरों में गेंद होती थी, तो वो शुद्ध जादू बिखेरते थे. वो फुटबॉल के उस सुनहरे दौर के आखिरी शहंशाह थे जहां खेल दिमाग से नहीं, दिल से खेला जाता था. अलविदा नेमार, शुक्रिया उस सांबा के लिए जो तुमने हमें दिखाया.

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