जापान के आइची नागोया में एशियन गेम्स का भोंपू बज चुका है. भारतीय दल की अगुवाई की पेरिस ओलंपिक की डबल ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मनु भाकर ने. उनका साथ दिया कबड्डी के सुपर रेडर पवन सहरावत ने. वैसे तय तो ये हुआ था कि तजिंदरपाल सिंह तूर मनु के साथ झंडा उठाएंगे. लेकिन, ऐन मौके पर उनकी ऑफिशियल किट ही नहीं पहुंची.
रोना-धोना छोड़ो, मेडल पर फोकस करो! मनु भाकर ने साथी एथलीट्स को क्यों दे दी ऐसी सलाह?
Asian Games 2026 : भारतीय दल की अगुवाई कर रहीं ओलंपिक डबल मेडलिस्ट Manu Bhaker ने साथी एथलीट्स को एक सख्त सलाह दे दी है. ओपनिंग सेरेमनी को लेकर उन्होंने दिवंगत कोच Jaspal Rana के साथ वाला एक किस्सा भी सुनाया.

सेरेमनी तो रुकती नहीं, तो पवन को मिल गया मौका. खैर झंडा उठाने के बाद मनु से जब जापान की समस्याओं के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब हैरान करने वाला था. साथी एथलीट्स की तरह उन्होंने कंप्लेन नहीं की. उल्टा उन्होंने अपने साथियों को ही हिदायत दे दी.
मनु ने सुनाया कोच राणा वाला किस्सादरअसल, मनु भारत का झंडा उठाकर काफी खुश थीं. खुश हो भी क्यों न? उन्हें अपने दिवंगत कोच जसपाल राणा के साथ का एक किस्सा जो याद आ गया था. मनु ने वो किस्सा भी सबके साथ शेयर किया. 2018 कॉमनवेल्थ की बात है. कोच राणा ने मनु के लिए एक सख्त रूल बनाया था. रूल ये था कि मनु तब तक किसी ओपनिंग सेरेमनी में हिस्सा नहीं लेंगी, जब तक वो खुद फ्लैग बीयरर नहीं बनेंगी.
मनु ने इसके पीछे कोच की मंशा भी बताई. शूटिंग के इवेंट्स ओपनिंग सेरेमनी के अगले ही दिन से शुरू हो जाते हैं. सेरेमनी में खड़े रहकर एथलीट थक जाते हैं. यही कारण था कि जब मनु ने हाथ में झंडा थामा, तो दिवंगत कोच की वो बात याद आ गई.
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साथी एथलीट्स से क्या कहा?ये तो हो गई खुशी की बात. अब आते हैं उस मसले पर जिसे लेकर खूब बवाल मचा हुआ है. दरअसल, पिछले दो दिनों से आपने एशियन गेम्स में एथलीट्स की समस्याओं के बारे में काफी सुना होगा. सोशल मीडिया पर पोस्ट्स भी देखे होंगे. कैसे आइची नागोया में एथलीट्स को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इंतजाम टाइट नहीं हैं. एथलीट्स को रहने-ठहरने और लॉजिस्टिक्स को लेकर काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. यहां तक कि मंत्रालय भी इसे लेकर बहुत परेशान है. लेकिन, मनु से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब चौंकाने वाला था.
उन्होंने कड़क अंदाज में अपने साथी एथलीट्स को ही एक सॉलिड नसीहत दे डाली. मनु ने कहा,
दिक्कतें तो आएंगी. मैंने भी सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायतें देखी हैं. लेकिन, ये मौका जिंदगी में बार-बार नहीं आता. हम खेलने आए हैं. रोना-धोना और शिकायतें छोड़कर अपने गेम पर फोकस करें तो बेहतर है. हमारे हाथ में है बेस्ट देना. हमें उसी पर ध्यान देना चाहिए.
मनु का मैसेज लाउड एंड क्लियर है. शिकायतें अपनी जगह हैं. लेकिन, फोकस मेडल से नहीं हटना चाहिए. एशियन गेम्स 2026 में भारत के 490 से ज्यादा एथलीट्स पार्टिसिपेट कर रहे हैं. ऐसे में पदकों की संख्या भी बढ़ने की सबको उम्मीद है. पिछली बार भारतीय दल चौथे नंबर पर रहा था. ऐसे में इस बार पूरा फोकस टॉप 3 में पहुंचने की होनी चाहिए. ये तभी संभव होगा, जब भारतीय एथलीट्स भर-भर के मेडल्स जीतेंगे.
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