भारत की युवा पैरा साइकिलिस्ट लिशा दास कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाली सबसे युवा खिलाड़ी थीं. लिशा कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाली देश की एकमात्र पैरा-ट्रैक साइकिलिस्ट थी. लेकिन, अपने इवेंट में वो आखिरी स्थान पर रहीं. इस प्रदर्शन के लिए लिशा दास जितनी जिम्मेदार हैं, शायद भारतीय खेल सिस्टम भी उतना ही जिम्मेदार है. खेल में जाने से लेकर रेस शुरू होने तक, लिशा को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
न साइकिल मिली, न कपड़े! सिस्टम से हार गईं लिशा दास
भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स में मुश्किलों को सामना करते हुए लिशा ने महिलाओं की C4-C5, 4000 मीटर रेस 6:58.000 समय में पूरी की. वह क्वालिफिकेशन राउंड में आखिरी स्थान पर रहीं.

सबसे पहले, उनके ग्लासगो जाने पर ही संशय था. उनके कोच को साथ जाने की अनुमति नहीं मिल रही थी. लिशा ने कहा था कि उनके कोच आदित्या मेहता अपना खर्च खुद उठाने को तैयार थे. वह सिर्फ आधिकारिक तौर पर उनके साथ जाने के लिए जरूरी एक्रिडिटेशन चाहते थे. फिर भी उन्हें मना कर दिया गया. उनकी जगह एक अधिकारी को भेजा जा रहा था. जब यह विवाद बढ़ गया तो आखिरी समय में लिशा की सपोर्ट टीम को ग्लासगो भेजने का फैसला किया गया. इसमें उनके कोच और एक महिला सपोर्ट स्टाफ शामिल थीं. टीम को ज्यूरिख के रास्ते ग्लासगो जाना था.
ज्यूरिख से सपोर्टिंग स्टाफ तो रवाना हो गया, लेकिन सामान नहीं. लिशा की कस्टामाइज्ड साइकिल को ट्रैवल के लिए खास बॉक्स में पैक किया गया था. इस बॉक्स में उनके बाकी इक्विपमेंट्स भी थे. हालांकि, कनेक्टिंग फ्लाइट पर इस सामान को चढ़ाया नहीं गया. पूरा एक दिन भारतीय दल के शेफ डी मिशन और कोचिंग टीम सामान के लिए एक जगह से दूसरी जगह चक्कर लगाती रहे. इवेंट से महज कुछ घंटे पहले ही लिशा को अपनी साइकिल मिली.
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कोच और स्टाफ को नहीं मिली एंट्रीलिशा की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुआ. उनके कोच आदित्या को तो एक्रेडिशन मिल गया लेकिन वह भी फील्ड ऑफ प्ले में नहीं जा सकते थे. वहीं, महिला सपोर्ट स्टाफ डॉ आशा शेख को कॉम्पिटिशन वेन्यू में जाने की अनुमति नहीं मिली. लिशा को रेस के दौरान सपोर्ट नहीं मिला. सपोर्ट न होने की वजह से वह अपना खास ऐरोडायनेमिक स्किनसूट नहीं पहन सकीं. उन्होंने जर्सी और बिब शॉर्ट्स पहनकर खेलने का फैसला किया क्योंकि इसे पहनने के लिए किसी की मदद की जरूरत नहीं थी. जो थोड़ी बहुत जरूरत थी वह उन्हें विपक्षी खिलाड़ियों से मिली.
कोचिंग स्टाफ में केवल एक ही एक्रेडिशन प्राप्त शख्स थे. वह थे टेक्निशियन के दत्तात्रेय. वहीं, लिशा के कोच को स्टैंड्स से रेस देखनी पड़ी. सारी मुश्किलों को सामना करते हुए लिशा ने महिलाओं की C4-C5, 4000 मीटर रेस 6:58.000 मिनट में पूरी की. वह क्वालिफिकेशन राउंड में आखिरी स्थान पर रहीं.
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