FIFA चीफ जियानी इन्फैंटिनो (Gianni Infantino) के एक फैसले ने फुटबॉल जगत में हड़कंप मचा दिया है. इन्फैंटिनो FIFA में प्राइवेट इन्वेस्टर्स को लाना चाहते हैं. लेकिन, उनके इस फैसले से यूरोप, एशिया, नॉर्थ एंड सेंट्रल अमेरिका के कन्फेडरेशंस सहमत नहीं है. UEFA के 55 देशों ने तो FIFA के सभी टूर्नामेंट्स से हटने की धमकी दे दी है. उन्होंने 2030 वर्ल्ड कप के बॉयकॉट तक की बात कह दी है. माने होस्टिंग तो दूर, स्पेन और पुर्तगाल अगली बार वर्ल्ड कप में हिस्सा भी नहीं लेंगे.
यूरोप के 55 देश बॉयकॉट करेंगे FIFA वर्ल्ड कप? एशिया और नॉर्थ अमेरिका भी हुए खिलाफ
फीफा चीफ जियानी इन्फैन्टिनो के प्रपोजल FIFA फॉरवर्ड एंटरप्राइज को लेकर पूरी दुनिया से उन्हें बैकलैश का सामना करना पड़ रहा है. पहले UEFA, फिर AFC और अब CONCACAF ने भी विरोध कर दिया है.

फीफा के 6 कॉन्टिनेंटल कन्फेडरेशन्स में से 3 फीफा के प्रपोजल से सहमत नहीं हैं. एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (AFC) ने तो ये तक आरोप लगा दिया है कि फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था ने उनसे कंसल्ट तक नहीं किया. वहीं, CONCACAF ने पूरे प्रोसेस पर ही सवाल उठा दिया है.
FIFA की क्या है प्लानिंग?सबसे पहले ये समझते हैं कि आखिर फीफा की प्लानिंग क्या है, जिसे लेकर इतना विरोध हो रहा है. 28 जुलाई को FIFA चीफ FIFA फॉरवर्ड एंटरप्राइज (FFE) नाम का एक प्रपोजल लेकर आए हैं. FIFA ने इसके लिए 19 सितंबर तक की डेडलाइन दी है. लेकिन,
आप कहेंगे ये FFE है क्या? दरअसल, FFE FIFA की एक प्रपोज्ड नई सब्सिडियरी कंपनी होगी. यह कंपनी FIFA के कमर्शियल और इवेंट से जुड़े कामकाज को एक ही ढांचे के तहत लाएगी.
FIFA के प्रपोजल के मुताबिक, FFE की वैल्यूएशन $20 बिलियन हो सकती है. साथ ही इसके तहत बाहरी इन्वेस्टर्स को माइनॉरिटी और नॉन-कंट्रोलिंग शेयर बेचकर $4.2 बिलियन तक जुटाए जा सकते हैं. हालांकि, इस एंटरप्राइज और फुटबॉल से जुड़े सभी गवर्ननेंस, कॉम्पिटिशन और खेल संबंधी फ़ैसलों पर FIFA का ही कंट्रोल रहेगा.
कन्फेडरेशंस के लिए समस्या सिर्फ पैसे नहीं हैं. उनके लिए दिक्कत ये भी है कि इस प्रपोजल को कैसे लाया गया है.
AFC ने कहा कि इस प्लान की पब्लिक अनाउंसमेंट से पहले कन्फेडरेशन से सलाह-मशविरा तक नहीं किया गया. न ही उसे इसके संभावित असर के बारे में कोई डिटेल्ड जानकारी दी गई. AFC ने साफ कर दिया है कि ऐसे कदम उन्हें पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं. साथ ही उन्होंने वॉर्निंग दी कि FIFA अगर ऐसा ही रवैया रखता है तो इससे एकजुटता, सहयोग और पारदर्शिता पर आधारित कॉन्टिनेंटल फ़ुटबॉल की नींव कमज़ोर हो जाएगी.
FFE को लेकर कंसर्न कोई साधारण नहीं है. AFC समझना चाहता है कि प्रपोजल से कॉन्टिनेंटल और मेंबर एसोसिएशन के कंपीटिशंस के फ्यूचर और कमर्शियल माहौल पर क्या असर पड़ सकता है? यही कंसर्न यूरोप में भी है. लेकिन, यूएफा ने इसके ओ भी एक कदम उठा लिया है. UEFA के 55 मेंबर एसोसिएशंस ने FIFA के प्रपोजल को न सिर्फ ठुकरा दिया है. उन्होंने आगे होने वाले सारे FIFA इवेंट्स को बॉयकॉट करने की भी धमकी दे दी है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वो वर्ल्ड कप तक में भाग नहीं लेंगे.
इसे लेकर यूएफा ने कहा,
वर्ल्ड कप को इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट की तरह ट्रीट नहीं किया जा सकता. वर्ल्ड कप बेचने वाली चीज नहीं है.
यूरोपियन गवर्निंग बॉडी ने फीफा पर आरोप लगाए हैं. उनके मुताबिक, फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था ने उनसे प्रपोजल छिपाकर रखा. उनसे बिना कंसल्ट किए अप्रूवल के लिए सीधा पेश कर दिया.
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UEFA की आपत्ति सिर्फ़ इस प्रोसेस तक ही सीमित नहीं है. उसे डर है कि अगर बाहरी निवेशकों को FIFA प्रतियोगिताओं में हिस्सेदारी खरीदने की इजाज़त दी गई, तो इससे खेल की प्रायोरिटीज बदल जाएंगी.
उसका सीधा तर्क है, अगर प्राइवेट इन्वेस्टर्स का पैसा लगेगा, तो फ़ैसले लेने के प्रोसेस में कमर्शियल फ़ायदे भी अपने-आप शामिल हो जाएंगे. इसका असर इंटरनेशनल कैलेंडर और इवेंट के फ़ॉर्मेट से लेकर FIFA टूर्नामेंट की भविष्य की दिशा तक, हर चीज़ पर पड़ सकता है.
CONCACAF को भी है आपत्तिइसी बीच, CONCACAF (कन्फेडरेशन ऑफ नॉर्थ, सेंट्रल और कैरिबियन एसोसिएशन फुटबॉल) ने बॉयकॉट नहीं किया है. लेकिन, प्रपोजल से जुड़े प्रोसेस को खारिज कर दिया है. इसके 41 मेंबर्स एसोसिएशंस ने उचित प्रक्रिया की कमी, बहुत कम समय-सीमा और संबंधित FIFA गवर्निंग बॉडीज़ से समीक्षा या मंज़ूरी न मिलने को लेकर गहरी चिंता ज़ाहिर की.
UEFA, AFC और CONCACAF मिलकर FIFA के 211 मेंबर एसोसिएशन में से 143 को रिप्रजेंट करते हैं. इससे FIFA के लिए उनके विरोध को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है. फिर भी FIFA पीछे नहीं हट रहा है.
FIFA ने इसे लेकर 31 जुलाई को कहा कि बढ़ते विरोध के बावजूद वह अपनी बातचीत की प्रक्रिया जारी रखेगा. FIFA का तर्क है कि इस प्रपोजल को लेकर आई खबरों से भ्रम पैदा हुआ है. हर मेंबर एसोसिएशन को इस प्रपोजल को देखने और उस पर वोट करने का मौका मिलना चाहिए. FIFA ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि वह इससे फुटबॉल बेच रहा है.
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