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हॉकी इंडिया के अध्यक्ष को ही नहीं थी जर्सी के 'भगवा' कलर होने की जानकारी!

फेडरेशन के हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों से बात करने के बाद यह फैसला लिया गया. फैसले के बारे में ग्रुप में डाला गया था.

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दिलीप टिर्की को जर्सी चेंज के बारे में नहीं बताया गया. (Photo-PTI)

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  • भारतीय हॉकी फेडरेशन ने हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया की जर्सी का रंग केसरिया रंग में बदलने का निर्णय लिया है, जिसे 31 जुलाई को सार्वजनिक रूप से लॉन्च किया गया।
  • जर्सी के रंग परिवर्तन का फैसला कार्यकारी बोर्ड और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की को जानकारी दिए बिना लिया गया, जिससे विवाद और सफाई की मांग उत्पन्न हुई।
  • अध्यक्ष टिर्की ने फेडरेशन अधिकारियों से लिखित में प्रक्रिया और निर्णय के आधार की जानकारी मांगी है, जबकि महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि यह खिलाड़ियों की मांग पर लिया गया फैसला था।

भारतीय हॉकी टीमों का जर्सी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. फेडरेशन ने हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया की जर्सी लॉन्च की है. यह जर्सी केसरिया रंग की है. इसे लेकर कई पूर्व खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई थी. 31 जुलाई को हॉकी इंडिया ने यह जर्सी का रंग केसरिया करने पर सफाई दी. कहा गया कि फेडरेशन ने बात करके यह फैसला लिया है. लेकिन, यह कैसा फैसला है, जिसके बारे में फेडरेशन के अध्यक्ष दिलीप टिर्की को ही जानकारी नहीं है. अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने अब फेडरेशन के अधिकारयों से सफाई मांगी है. उन्होंने पूछा है कि कार्यकारी बोर्ड की जानकारी या सहमति के बिना यह बड़ा फैसला कैसे लिया गया? हालांकि, महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि सभी अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी थी.

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टिर्की को नहीं थी जानकारी

फेडरेशन की तरफ से जो बयान दिया गया था, वह टिर्की सहित हॉकी इंडिया के अधिकारियों की तरफ से ही था. लेकिन, अब टिर्की ने सुबह कार्यकारी बोर्ड को ईमेल भेजा है. इसमें उन्होंने लिखा,

जर्सी का रंग बदलने का फैसला कार्यकारी बोर्ड के सामने भी नहीं रखा और मुझे भी नहीं बताया. मैं हॉकी इंडिया के अधिकारियों से सफाई चाहता हूं. मुझे तुरंत लिखित में बताया जाए कि इस फैसले का आधार क्या था? किस प्रक्रिया का पालन किया गया? किन हालात में इस फैसले को मंजूरी दी गई और लागू किया गया?

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ओडिशा सरकार ने मांगी सफाई

टिर्की ने कहा कि हॉकी इंडिया को स्पॉन्सर कर रही ओडिशा सरकार ने उनसे इस मसले पर स्पष्टीकरण मांगा है. टिर्की ने आगे लिखा कि यह मसला काफी सुर्खियों में आ गया है और कई सर्कल्स में इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. वर्ल्ड कप ज्यादा दूर नहीं है, जिसकी वजह से उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि यह फैसला खेल से जुड़े कारणों से लिया गया है. टिर्की ने आगे कहा कि उन्हें केसरिया रंग से कोई दिक्कत नहीं है. वह बस यह चाहते हैं कि नेशनल टीम से जुड़े मसले चुनी लीडरशिप बोर्ड से बात करन के बाद लिए जाएं.

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भोलानाथ का पक्ष

वहीं, हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों से बात करने के बाद यह फैसला लिया गया. फैसले के बारे में ग्रुप में डाला गया था. उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतना बड़ा बन जाएगा. भोलानाथ ने यह भी कहा कि रंग बदलने के लिए उन पर कहीं से भी कोई बाहरी दबाव नहीं था. भोलानाथ ने यह भी कहा कि यह फैसला पलटा जाएगा या नहीं, वह नहीं जानते. वह यह फैसला अकेले नहीं ले सकते. वह इस पर चर्चा करेंगे. लेकिन, वह इस बात पर टिके रहे कि यह खिलाड़ियों और कोचों की मांग थी और उन्होंने बात मान ली. 

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