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भारत का दूसरा डबल पोडियम, इस बार पैरा 100 मीटर में रचा इतिहास

पुरुषों की 100 मीटर टी47 इवेंट पैरा एथलेटिक्स की स्प्रिंट प्रतियोगिता है जिसमें एक हाथ में शारीरिक अक्षमता या उसके अभाव वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं.

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भारत ने 100 मीटर के T47 कैटगेरी में दो मेडल जीता. (Photo-PTI)

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  • भारत के दिलीप महादू गावित ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 100 मीटर T47 कैटेगरी में 10.71 सेकेंड में रिकॉर्ड टाइमिंग के साथ गोल्ड मेडल जीतकर भारत को दूसरा डबल पोडियम दिलाया।
  • दिलीप गावित ने बचपन में हाथ गंवा दिया था क्योंकि चार साल की उम्र में आम के पेड़ से गिरने के बाद इंफेक्शन के कारण सर्जरी कराकर कोहनी के नीचे का हाथ काटना पड़ा।
  • दिलीप और मोहम्मद बासिल की जीत से भारत ने पैरा एथलेटिक्स में प्रदर्शन बेहतर किया है और भविष्य में इन खेलों में प्रतिस्पर्धा जारी रखने की संभावना बनी है।

भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स अपना दूसरा डबल पोडियम हासिल किया. 100  मीटर के T47 कैटेगरी में भारत के दिलीप महादू गावित ने गोल्ड मेडल हासिल किया. दिलीप का गोल्ड इन खेलों में भारत का तीसरा गोल्ड मेडल है.इसी इवेंट का ब्रॉन्ज मेडल भी भारत के ही नाम रहा. फोटो फिनिश में  मोहम्मद बासिल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया.  

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खिलाड़ियों की रिकॉर्ड टाइमिंग


दिलीप ने गोल्ड के लिए 10.71 सेकेंड का समय निकाला. यह टाइमिंग इस कैटेगरी का कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड है. वहीं बासिल की बात करें तो उन्होंने अपने सीजन का बेस्ट प्रदर्शन किया 10.83 सेकेंड का समय निकाला. इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड के सीजन बेस्ट के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता.

पुरुषों की 100 मीटर टी47 इवेंट पैरा एथलेटिक्स की स्प्रिंट प्रतियोगिता है जिसमें एक हाथ में शारीरिक अक्षमता या उसके अभाव वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं. इससे शरीर के एक हिस्से की ताकत, गति या कॉर्डिनेशन प्रभावित होता है.

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एक हादसे ने छीन लिया हाथ

नासिक के दिलीप को छोटी उम्र में ही अपना हाथ खोना पड़ा था. जब वह महज चार साल के थे, वह आम के पेड़ से गिर गए थे. तब उनके हाथ में चोट लग गई थी. उन्होंने शुरुआत में एक लोकल डॉक्टर से इलाज कराया और इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. इसी कारण दिलीप के हाथ में इंफेक्शन हो गया और आखिरकार सर्जरी करके कोहनी के नीचे का हाथ  काटना पड़ा.  इसके बावजूद उन्होंने खेल नहीं छोड़ा। स्कूल में दौड़ना शुरू किया और बाद में कोच वैजनाथ काले ने उन्हें ट्रेन किया.

दिलीप की खास बात यह है कि वे केवल पैरा-एथलेटिक्स ही नहीं, बल्कि कई बार सामान्य (able-bodied) खिलाड़ियों के साथ भी ट्रेनिंग और कंपीट करते हैं. उनको लगता है कि वह खुद को किसी से कमजोर नहीं मानते.

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बिना एक हाथ के पैदा हुए बासिल  

वहीं मोहम्मद बासिल की बात करें तो वह केरल के मलप्पुरम ज़िले के वेलियानकोड (Veliyancode) के रहने वाले हैं.
उनका जन्म दाहिने हाथ के बिना हुआ था. लेकिन उन्होंने भी खुद को किसी से कम नहीं माना. इस शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने बचपन से खेलों में रुचि दिखाई और बाद में स्प्रिंट (100 मीटर दौड़) को अपना लक्ष्य बनाया.

दिलीप और बासिल से पहले 29 जुलाई को भारत ने F57 कैटेगरी में भी डबल पोडियम हासिल किया था. इवेंट का गोल्ड शर्मिला धनखड़ और ब्रॉन्ज शिल्पा के नाम रहा था.  शर्मिला और दिलीप से पहले  ग्लास्गो में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा वेटलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल जीता था.  
 

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