लियोनेल मेसी. वो बंदा, जो गोल्स की हैट्रिक लगाता है. फिर अगले मैच में पेनल्टी मिस कर देता है. उसी मैच में दो गोल भी मार देता है. जिसके सपोर्ट में 11 प्लेयर्स की टीम नहीं, पूरा देश खड़ा है. 2026 FIFA World Cup में 39 साल की उम्र में भी मेसी ‘गोल्ड डस्ट’ हैं. मिरोस्लाव क्लोज का वर्ल्ड कप रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं. लेकिन क्या मेसी (Lionel Messi) की महानता सिर्फ रिकॉर्ड या GOAT (Greatest Of All Time) की बहस तक ही सीमित है? शायद नहीं. असली बात तो ये है कि हम जैसे फुटबॉल फैन्स मेसी जैसे प्लेयर को खेलते देख पा रहे हैं. और इससे बड़ा जादू कुछ हो नहीं सकता.
GOAT डिबेट फिर कभी, फिलहाल लियोनल मेसी का जादू एंजॉय करिए!
असली खुशी Lionel Messi को देखने में है. उनके फींट, स्टेपओवर, टर्न और गोल. सब कुछ एकदम मक्खन जैसा लगता है. ऑस्ट्रिया के खिलाफ दूसरे गोल से पहले बॉल पर उनका कंट्रोल ही देख लीजिए. कलेजा ठंडा जाएगा.


मेसी 25 जून को 39 साल के हो जाएंगे. पूरी दुनिया के फुटबॉल फैन्स को ये एहसास तो है कि मेसी का जादू अब बहुत दिनों तक देखने को नहीं मिलेगा. और फिर यंग स्टार्स भी है, जो अपना नाम बनाने में लगे हैं. जिन्हें आज से 10 साल में GOAT की डिबेट में जोड़ा जाएगा.
एर्लिंग हालांड, हैरी केन, जूड बेलिंगहैम, लामिने यामल, विनीसियस जूनियर, किलियन एम्बाप्पे, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलिसे जैसे प्लेयर्स अनरियल फुटबॉल खेल रहे हैं. ये भी कहा जा सकता है कि फुटबॉल में इतने बेहतरीन अटैकिंग टैलेंट एक साथ पहले कभी नहीं देखे गए.
फिर भी टॉप स्कोरर और अपनी टीम को अकेले जीत दिलाने वाले खिलाड़ी अभी भी मेसी ही हैं. मेसी ने पहले मैच में हैट्रिक जड़ी थी. दूसरे मैच में ऑस्ट्रिया के खिलाफ दो गोल करके उन्होंने क्लोज के 16 गोल्स का रिकॉर्ड तोड़ा. इस वर्ल्ड कप अभी वो गोल्डन बूट की रेस में सबसे आगे हैं. पर घोड़ा अगर लगातार तेज रफ्तार में दौड़ता रहे, तो कुछ समय के बाद रफ्तार भी नॉर्मल लगने लगती है. ऐसा ही कुछ मेसी के साथ हुआ है. उन्होंने पूरे करियर इतना कमाल दिखाया है कि अब उनका हर गोल सामान्य लगने लगा है.
मेसी का सफर आसान नहीं रहा. बचपन में हॉर्मोन के इशू के कारण उनका कद छोटा रह गया था. लेकिन बार्सिलोना ने उन पर भरोसा किया और वो दुनिया के सबसे महान खिलाड़ी बन गए. 2022 वर्ल्ड कप जीतकर उन्होंने अपना सबसे बड़ा सपना पूरा किया. 2026 में वो बैक-टू-बैक वर्ल्ड कप जीतने की कोशिश कर रहे हैं. अर्जेंटीना के ग्रेट फुटबॉलर मैराडोना ने 1986 में एक औसत अर्जेंटीना टीम को चैंपियन बनाया था. मेसी भी वैसा ही कर सकते हैं. या कहें कि वो वैसा करने के लिए ही इस वर्ल्ड कप में उतरे हैं.
फुटबॉल में आजकल हर चीज को रैंकिंग में बांध कर देखा जाता है. इंटरनेट पर Ballon d’Or, GOAT की बहस, तुलनाएं, सब कुछ बहुत सीरीयस सा हो गया है. लेकिन मेसी को सिर्फ रोनाल्डो से तुलना करके देखना गलत है. दोनों महान हैं, लेकिन मेसी अब एक अलग लेवल पर हैं. रोनाल्डो भी शानदार हैं, लेकिन उम्र का फर्क साफ दिख रहा है.
असली खुशी मेसी को देखने में है. उनके फींट, स्टेपओवर, टर्न और गोल. सब कुछ एकदम मक्खन जैसा लगता है. ऑस्ट्रिया के खिलाफ दूसरे गोल से पहले बॉल पर उनका कंट्रोल ही देख लीजिए. कलेजा ठंडा जाएगा. मेसी गेंद को अपने कंट्रोल में रखकर पूरा डिफेंस चीर देते हैं. उनकी स्पीड कम हुई है, लेकिन दिमाग और विजन अब भी दुनिया का सबसे बेहतरीन है.
मेसी सिर्फ गोल नहीं करते, वो टीम को उस जगह ला खड़ा करते हैं जहां से जीत आसान हो जाती है. अर्जेंटीना को उन्होंने अकेले कंधे पर उठाया है. 2022 में फाइनल में फ्रांस के खिलाफ उनका प्रदर्शन याद है? 2026 में भी वही जुनून दिख रहा है. वो 6 लगातार वर्ल्ड कप मैचों में गोल करने वाले कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं.
हमारी जनरेशन के लिए सबसे बड़ी बात ये है कि हमारे बच्चे और नाती-पोते मेसी की कहानियां सुनेंगे. ठीक वैसे ही जैसे हम लोगों ने पेले या मैराडोना के किस्से सुने हैं.
लेकिन मेसी को हम सब लाइव देख पा रहे हैं. टीवी में ही सही. हम उस जनरेशन में हैं, जहां मेसी जैसा प्लेयर खेल रहा है. ये मौका कुछ हफ्तों का ही है. इसलिए डिबेट्स के झोल में फंसने से अच्छा है कि हम लोग उनका खेल एंजॉय करें.
मेसी ने फुटबॉल फैन्स को तसल्ली दी है. उन्होंने दिखाया कि टैलेंट, मेहनत और सही सोच से कुछ भी संभव है. छोटे कद के बावजूद वो सबसे बड़े प्लेयर्स में से एक बने. फुटबॉल फैन्स जानते हैं कि ऐसे खिलाड़ी सदी में एक बार आते हैं. पेले, माराडोना, अब मेसी. उनका खेल देखकर हम सब इमोशनल हो जाते हैं.
इसलिए हमें रैंकिंग और बहस को एक तरफ रख कर, मेसी के मैजिक को एन्जॉय करना चाहिए. उनके हर टच, हर पास और हर गोल में जादू है. ताकि हम अपने बच्चों को गर्व से कह सकें, “मैंने मेसी को खेलते हुए देखा था.”
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