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'23 साल कमेंट्री की, रंग की वजह से टॉस के समय नहीं भेजा', परेशान होकर इस कमेंटेटर ने छोड़ा काम

कमेंटेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का कहना है कि उन्हें ये तक कहा गया था कि वो ‘प्रेजेंटेबल’ नहीं लगते. उन्होंने एक बार प्रोडक्शन टीम से पूछा कि उन्हें मेन रोल क्यों नहीं मिलते, तो जवाब चौंकाने वाला था.

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शिवरामकृष्णन ने बताया कि जब वो इंडियन टीम के लिए खेल रहे थे तो भी रंग के आधार पर उन्हें नजरअंदाज किया जाता था. (फोटो- X)

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने हाल ही में अपने 23 साल लंबे कमेंट्री करियर को खत्म करने का फैसला लिया. इस फैसले के पीछे सिर्फ प्रोफेशनल कारण ही नहीं, बल्कि गहरे व्यक्तिगत अनुभव और भेदभाव से जुड़ी पीड़ा भी सामने आई है. शिवरामकृष्णन को ये तक कहा गया था कि वो ‘प्रेजेंटेबल’ नहीं लगते. उन्होंने एक बार प्रोडक्शन टीम से पूछा कि उन्हें मेन रोल क्यों नहीं मिलते, तो जवाब चौंकाने वाला था.

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लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने बताया कि उन्होंने करीब दो दशकों से ज्यादा समय तक क्रिकेट कमेंट्री की. लेकिन इस पूरे टाइम पीरियड में उन्हें कभी भी टॉस या पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन जैसे अहम मौके नहीं दिए गए. जब उन्होंने एक बार प्रोडक्शन टीम से पूछा कि उन्हें ऐसे रोल क्यों नहीं मिलते, तो जवाब चौंकाने वाला था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोडक्शन टीम ने शिवरामकृष्णन ने बताया,

“हमारे बॉस ने निर्देश दिया है कि आपको ये काम न दिया जाए. कहा गया कि आप ‘प्रेजेंटेबल’ नहीं लगते.”

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इस पर शिवरामकृष्णन ने सवाल उठाया, और कहा,

“दुनिया के सबसे करिश्माई और बेहतरीन कमेंटेटर विजय अमृतराज भी तो गहरे रंग के हैं. फिर मेरे साथ ऐसा क्यों?”

उन्होंने बताया कि जब वो इंडियन टीम के लिए खेल रहे थे तो भी रंग के आधार पर उन्हें नजरअंदाज किया जाता था. कमेंट्री बॉक्स में भी वही समस्या बनी रही.

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क्वारंटाइन के दौरान डिप्रेशन

कोरोना महामारी के दौरान IPL UAE में आयोजित हुआ था. क्वारंटाइन में रहते हुए शिवरामकृष्णन की पुरानी डिप्रेशन की समस्या वापस आ गई. दूसरे कमेंटेटर्स बार जाते थे, लेकिन उन पर शराब पीने का आरोप लगाते. इसलिए वो कमरे में ही ऑर्डर करते थे. उनकी पुरानी यादें और हैलुसिनेशन (भ्रम) वापस लौट आया.

शिवरामकृष्णन बताते हैं कि BCCI प्रोडक्शन हाउस के लोग उनके दोस्तों को फोन करके उनका हाल पूछते थे. वो बताते हैं,

“इससे मुझे झूठी उम्मीद जगने लगी. मैं कॉल का इंतजार करने लगा. ठीक वही बात जो मेरे क्रिकेट करियर के दौरान हुई थी. यही चीज मुझे ट्रॉमा देती रही. अगर उन्हें मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं थी और काम नहीं देना था, तो फिर मेरे दोस्तों को फोन करके मेरी हालत क्यों पूछते? मैं वही पुरानी गलती दोबारा नहीं करना चाहता था. एक स्पंज जितना सोख सकता है, उतना ही सोखता है. उसके बाद वो टूट जाता है. मैं और कितना सहन कर सकता हूं, और कितना सहन करना चाहिए?”

पूर्व कमेंटेटर शिवरामकृष्णन ने हाल ही में ट्वीट करके अपना रिटायरमेंट ऐलान कर दिया. उन्होंने लिखा,

“मैं बीसीसीआई के लिए कमेंट्री से रिटायर हो रहा हूं.”

उन्होंने कहा कि 15 साल की उम्र से 60 साल तक, यानी 45 साल से वो इस ट्रॉमा से गुजर रहे हैं. उनके घर में न कोई ट्रॉफी है, न कोई पुरानी जर्सी या फोटो, कुछ भी नहीं है. वो बस इससे बाहर आना चाहते थे.

वीडियो: लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने छोड़ी कॉमेंट्री, क्यों संन्यास में अपने रंग का किया जिक्र?

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