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'दुनिया पैसे और ग्लैमर के पीछे भाग रही', श्रीनाथ ने नए क्रिकेटरों को बड़ी नसीहत दे दी

पूर्व क्रिकेटर जवागल श्रीनाथ ने युवा खिलाड़ियों से टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान देने की अपील की है. उन्होंने क्रिकेट अकादमियों के बढ़ते कल्चर को लेकर भी बात की. उन्होंने साफ कहा कि आज के समय में अकादमियां क्रिकेट सिखाने से ज्यादा एक बिजनेस के तौर पर काम करती हैं.

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जवागल श्रीनाथ ने IPL को लेकर बात की. (Photo- इंडिया टुडे)

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  • पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने युवा खिलाड़ियों से टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है, क्योंकि यह पांच दिन का फॉर्मेट खिलाड़ियों की वास्तविक क्षमता परीक्षण करता है।
  • बड़ी टी20 लीगों जैसे IPL के बढ़ते प्रभाव के कारण युवा खिलाड़ी टी20 क्रिकेट की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनकी प्राथमिकता कम हो रही है।
  • श्रीनाथ ने माता-पिता, कोचों और राज्य संघों से अनुरोध किया है कि वे युवा खिलाड़ियों को सही दिशा में मार्गदर्शन दें ताकि टेस्ट क्रिकेट का महत्व बढ़े और क्रिकेट की दीर्घकालिक गुणवत्ता बनी रहे।

भारत के पूर्व खिलाड़ी जवागल श्रीनाथ ने अपील की है कि टी20 के जमाने में युवा खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान देना चाहिए. यही वह फॉर्मेट है, जो खिलाड़ियों की असली परीक्षा लेता है. आज के समय में दुनिया पैसे और ग्लैमर के पीछे भाग रही है. लेकिन खिलाड़ियों को अपने खेल को सुधारने के लिए काम करना चाहिए.

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टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान देने की जरूरत

एक इवेंट में श्रीनाथ ने IPL को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि किस तरह यह युवाओं पर असर डाल रहा है. उनके मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी 15 साल तक लगातार खेलना चाहता है, तो उसे टेस्ट क्रिकेट खेलना होगा, क्योंकि T20 में उन्हें रोटेशन का सामना करना पड़ सकता है. श्रीनाथ ने कहा,

IPL ज़रूरी है, लेकिन क्रिकेट में डेप्थ भी होनी चाहिए. मेरा मतलब है कि टेस्ट क्रिकेट पांच दिन का फॉर्मेट है, इसीलिए इसे 'सभी तरह के क्रिकेट की जननी' कहा जाता है. जो खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट खेलता है, उसके लिए T20 क्रिकेट खेलना आसान हो सकता है. लेकिन जो सिर्फ़ T20 क्रिकेट खेलता है, उसके लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना उतना आसान नहीं होता. इसलिए, मैं कह रहा हूं कि टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान दें. जो खेल का लंबा फॉर्मेट है. इसके साथ-साथ, आप T20 भी खेल सकते हैं.

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अकेडमी कल्चर पर भी दी राय

श्रीनाथ ने यहां क्रिकेट अकादमियों के बढ़ते कल्चर को लेकर भी बात की. उन्होंने साफ कहा कि आज के समय में अकादमियां क्रिकेट सिखाने से ज्यादा एक बिजनेस के तौर पर काम करती हैं. यह सही नहीं है. उन्होंने कहा,

मैं बहुत कुछ होते हुए देख रहा हूं. क्रिकेट को बेचा नहीं जा सकता. इसके लिए कोचिंग की ज़रूरत होती है. मैं समझता हूं कि अकादमी वगैरह इसमें कुछ निवेश करती हैं, और यह ठीक भी है. लेकिन अगर क्रिकेट को बेचा जाता है, तो टैलेंट को नुकसान पहुंचेगा. इसलिए, हमें इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

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पूर्व दिग्गज खिलाड़ी ने माता-पिता, राज्य संघों और कोचों से अपील की है कि उन्हें अपने बच्चों को क्रिकेट करियर के बारे में सही सलाह देनी चाहिए.

श्रीनाथ भारत के दिग्गज तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं. उन्होंने 1991 से 2002 के बीच भारत के लिए 67 टेस्ट मैच खेले. उन्होंने 30.49 की गेंदबाजी औसत से 236 विकेट लिए. इसमें 10 बार एक पारी में पांच विकेट और एक बार मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा शामिल है.

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