दीवार. अंग्रेजी में बोले तो वॉल. दीवार एक ही जगह खड़ी रहती है. चट्टानों सी मज़बूत. एक दम सीना ताने हुए. कितनी भी तेज आंधी आ जाए. दीवार हिलती नहीं है. जस की तस खड़ी रहती है. और थामे रहती है. दीवार का यही काम है. क्रिकेट में एक ऐसा ही खिलाड़ी हुआ है, जिन्हें दीवार कहा गया. वो खिलाड़ी हैं राहुल द्रविड़. इस समय टीम इंडिया के हेड कोच भी हैं. दरअसल, दीवार भरोसे का दूसरा नाम है. जब टीम इंडिया की पारी ढहने लगती थी. तो फै़न्स को ये यकीन रहता था कि
'अरे राहुल द्रविड़ अभी टिके हुए है. वो सब संभाल लेंगे.'
जब राहुल द्रविड़ ने संन्यास लिया. तो उनकी जगह भरने के लिए सौराष्ट्र से एक खिलाड़ी आया. नाम चेतेश्वर पुजारा. पुजारा, एकदम चट्टानों सा खड़ा. गेंदबाजों को थकाने वाला बल्लेबाज़. साल 2019 में सिडनी टेस्ट में पुजारा ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को इतना फ्रस्ट्रेट कर दिया था कि स्पिनर नेथन लियोन ने चुटकी लेते हुए पुजारा को कहा-
'यार तुम बोर नहीं होते क्या?'
टेस्ट क्रिकेट से दिलचस्पी रखने वाले फै़न्स ने पुजारा को
'दूसरी दीवार' की उपाधि तक दे डाली. और टेस्ट क्रिकेट को ऐसे ही बोरियत बल्लेबाज़ों की जरूरत होती है. पर दिक्कत ये है कि चेतेश्वर पुजारा अब बोर नहीं करते. और पिछले दो सालों से वह बोर नहीं कर रहे हैं. मतलब कि न तो क्रीज पर टिक रहे हैं और न ही उनके बल्ले से रन बन रहे हैं.
#Pujara का करियर ग्राफ # इस चीज़ की गवाही देते हैं आंकड़ें. पुजारा (Cheteshwar Pujara) के लिए 2017 का साल शानदार, ज़बरदस्त और जिंदाबाद रहा था. 11 टेस्ट की 18 पारियों में 67 के एवरेज से 1140 रन बनाए थे. इस दौरान उन्होंने चार शतक और पांच अर्धशतक भी लगाए थे.
# इसके बाद बात 2018 की. पुजारा की फॉर्म थोड़ी खराब हुई. 67 से एवरेज गिरकर 38 पर आ गया. 23 परियों में 837 रन बनाए. हालांकि, उस साल पुजारा ने तीन शतक और चार अर्धशतक लगाए थे.
# अब बात साल 2019 की. इस साल 11 पारियों में 46 की एवरेज से 507 रन बनाए. एक शतक और चार पचासे उन्होंने जड़ दिए.
# लेकिन असली कहानी शुरू हुई 2020 में. पुजारा ने चार टेस्ट मैचों की आठ पारियों में 20 की एवरेज से सिर्फ 163 रन ही बनाए. और मात्र एक पचासा. ये चारों मुकाबले पुजारा ने विदेशी जमीं पर खेले थे. दो ऑस्ट्रेलिया और दो न्यूज़ीलैंड में.
# 2021 यानि कि इस साल चेतेश्वर पुजारा ने 20 टेस्ट पारियां खेली हैं. सिर्फ 31 का बैटिंग एवरेज रहा है. छह अर्धशतक की मदद से 591 रन बनाए हैं. हाँ, आप ये ज़रूर कह सकते हैं कि पुजारा ने हेडिंग्ली और ओवल में अर्धशतकीय पारियां खेलीं थीं. लेकिन इक्का-दुक्का इनिंग्स से आप कब तक किसी खिलाड़ी को डिफेंड करेंगे. दो सालों से पुजारा के बल्ले से एक भी शतक नहीं आया है. जिसमें पांच टेस्ट तो उन्होंने भारत में भी खेले. जहां की विकेट पर रन बनाना विदेशों के मुकाबले आसान माना जाता है.
#Kohli vs Pujara
अब दो साल की बात पर आप ये भी कह सकते हैं कि यार कोहली ने भी तो दो साल से शतक नहीं लगाए हैं. तो क्या उसे भी बाहर करना चाहिए? या फिर कोहली की जगह विकल्प ढूंढा जाए. तो कुछ बातों के आधार पर इसका जवाब 'ना' में आता है. पहली बात ये कि कोहली और पुजारा का रोल टीम इंडिया में अलग है. दोनों का बैटिंग स्टाइल भी अलग है. दूसरी बात ये कि पुजारा और कोहली की तुलना बेकार है. कोहली बल्लेबाज़ी के अलावा टीम इंडिया के कप्तान भी हैं. उनकी दो भूमिकाएं हैं. हां ये सही है कि कोहली ने भी दो सालों में इंटरनेशनल क्रिकेट में शतक नहीं लगाए हैं. पिछले 24 महीनों में कोहली ने 12 टेस्ट में 27 की एवरेज से 563 रन बनाए हैं. पांच अर्धशतक भी लगाए हैं. वहीं वनडे में 15 मुकाबले खेले. आठ अर्धशतक और 43 की एवरेज से 649 रन कूटे. जो इतना भी बुरा नहीं है. चूंकि बल्लेबाज कोहली हैं तो शतक की डिमांड होगी ही. शतक से नीचे मतलब कोहली की फॉर्म खराब. खैर, पुजारा का फॉर्म ही नहीं इंटेंट पर भी सवाल उठे हैं. दिक्कत ये रही है कि ज्यादा गेंद खेलने के बाद भी वो पारी को आगे नहीं ले जा पा रहे हैं. प्लस क्रिकेट में स्ट्राइक रोटेट करना बहुत ज़रूरी होता है. ऐसा न हो कि एक छोर से बल्लेबाज़ रन बना रहे हैं. और आप सिर्फ गेंद खा रहे हों. ऐसे में रन बनाने का दबाव दूसरे बल्लेबाज पर पड़ता है. और फिर वह विकेट गंवा बैठता है. विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में मिली हार के बाद कोहली ने इशारों में कहा भी था कि
'सीनियर खिलाड़ियों में इंटेंट नहीं दिखी. वह बेख़ौफ़ होकर नहीं खेले. विकेट खोने से डरेंगे तो विपक्षी गेंदबाज आप पर हावी होंगे. मुझे 80 गेंदों में 50 रन चाहिए. 80 गेंदों में 15 रन बनाने का कोई मतलब नहीं.'
# पुजारा नहीं तो कौन?
अब सवाल ये उठता है कि चेतेश्वर पुजारा की जगह कौन? तो विकल्प ढूंढना मैनेजमेंट का काम है. लेकिन अभिमन्यु ईश्वरन, प्रियांक पांचाल, शेल्डन जैक्सन जैसे कई ऐसे नाम है. जो घरेलू क्रिकेट में बढ़िया कर रहे हैं. लगातार मौकों का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन उन्हें तारीख़ पर तारीख़ मिलती रही है. बस मौका नहीं मिलता. हालांकि, लंबे समय के बाद श्रेयस अय्यर को टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला है. कानपुर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ वह टेस्ट खेलेंगे. सूर्यकुमार यादव को भी टेस्ट टीम में लिया गया है. यानी कि मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ी को लेकर मैनेजमेंट ने विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है.
इस समय विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का दूसरा फेज़ चल रहा है. हर मैच अहम है. और अगर ऐसे में टीम इंडिया चाहती है कि चैंपियनशिप अपने नाम करे. तो उन्हें अनुभवी बल्लेबाजों के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों को भी लेकर चलना होगा. भले ही प्लेइंग इलेवन में मौका मिले, या न मिले. लेकिन विज़न लेकर चलने की ज़रूरत है. और इसमें कोई बुराई नहीं है. इस बात में कोई शक नहीं कि पुजारा टीम इंडिया के बड़े टेस्ट क्रिकेटर हैं. कमाल के खिलाड़ी हैं. लेकिन क्रिकेट में कहावत है,
जब तक बल्ला चल रहा है. तब तक ठाठ है.
उम्मीद करते हैं कि चेतेश्वर पुजारा न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में रन बनाएंगे. और शतक लगाएंगे. अगर ऐसा करते हैं तो साउथ अफ्रीका दौरे पर जाने से पहले उन्हें कॉन्फिडेंस मिलेगा.